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Bilaspur High Court: संविदा कर्मचारियों को लेकर हाई कोर्ट का अहम फैसला, पढ़िए हाई कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा

संविदा कर्मचारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। संविदा कर्मचारियों ने नियमितिकरण की मांग को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। पढ़िए हाई कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा है।

फाइल फोटो
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Bilaspur High Court:संविदा कर्मचारियों को लेकर हाई कोर्ट का अहम फैसला, पढ़िए हाई कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा 

By Radhakishan Sharma

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस सिम्स में संविदा पर काम कर चुके कर्मचारियों ने नियमितिकरण की मांग करते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं में एनेस्थीसिया टेक्नीशियन, स्वीपर, वार्ड बॉय और कुक और ओटी टेक्नीशियन हैं। सिम्स प्रबंधन ने संविदा आधार पर काम करने वाले याचिकाकर्ताओं को संविदा की अवधि समाप्त होने के बाद सभी की सेवाएं समाप्त कर दी थी। मामले की सुनवाई जस्टिस रजनी दुबे के सिंगल बेंच में हुई। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। जस्टिस दुबे ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गएग निर्णय का हवाला भी दिया है। जस्टिस रजनी दुबे ने अपने फैसले में लिखा है कि संविदा कर्मचारियों को सेवा विस्तार का अधिकार नहीं होता। कोर्ट ने यह भी कहा है कि प्रक्रिया के तहत याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति नहीं हुई तो नियमितकरण का दावा भी नहीं किया जा सकता।

सिम्स में यदुनंदन पोर्चे, जगदीश मुखी, सुनील सिंह, अनिल श्रीवास्तव सहित 23 लोगों की संविदा नियुक्ति हुई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि संविदा नियुक्ति के बाद वर्ष 1996, 2001, 2002, 2003, 2005 और 2008 से कार्य कर रहे थे। सिम्स के डीन ने संविदा अवधि समाप्त होने की बात कहते हुए 1 जून 2015 को नोटिस जारी किया। एक महीने के भीतर 30 जून 2015 से सेवा समाप्ति की जानकारी देते हुए संविदा नियुक्ति को समाप्त कर दिया।

उन्हीं पदों पर भर्ती के लिए निकाला विज्ञापन-

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि संविदा नियुक्ति को समाप्त करने के बाद 5 जून 2015 को नए संविदा पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया। याचिका के अनुसार उन्हीं पदों पर संविदा भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था जिस पद पर हम सब काम कर रहे थे। मुख्यमंत्री से शिकायत के बाद यह तय किया गया था कि पांच साल से अधिक समय से कार्यरत संविदा कर्मियों की सेवाएं नियमितीकरण तक जारी रहेंगी। डीन ने 5 अप्रैल 2011 को इस पर सहमति जताई थी। इसके बावजूद 1 जून 2015 को सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया।

याचिकाकर्ताओं ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि 2012 के संविदा नियमों में पांच साल की ना तो बाध्यता है और ना ही अधिकतम सीमा तय करने का कोई प्रावधान ही है। याचिका के अनुसार 17 जनवरी 2014 को सामान्य प्रशासन विभाग ने स्पष्ट किया था कि संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को सीधी भर्ती का लाभ मिलेगा। जीएडी के नियमों के बाद भी संविदा भर्ती के लिए विज्ञापन जारी कर दिया गया है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा है कि संविदा कर्मियों को हटाकर नए संविदा कर्मियों की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ है।

मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने सिम्स के निर्णय को सही ठहराते हुए याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की संविदा पर सीमित अवधि के लिए नियुक्ति की गई थी। पद से हटाने से पहले नियमानुसार उनको नोटिस दिया गया था। लिहाजा कोई राहत नहीं दी जा सकती।

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

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