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अफीम की खेती के पीछे का सच भयावह और बेहद डरावना, आर्थिक तंगी और लालच भी बड़ा कारण, कहीं किसानों का संगठित प्रयास तो नहीं?

CG News: रायगढ़ जिले में जिन लोगों को अफीम की खेती करने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया है, पूछताछ के दौरान कुछ इस तरह का भयावह और दिल दहला देने वाला सच सामने आया है।

अफीम की खेती के पीछे का सच भयावह और बेहद डरावना, आर्थिक तंगी और लालच भी बड़ा कारण, कहीं किसानों का संगठित प्रयास तो नहीं?
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इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News

By Radhakishan Sharma

रायगढ़। 24 मार्च 2026| रायगढ़ में एक के बाद एक अफीम की खेती सामने आने के बाद एक भयावह और दिल दहला देने वाली सच भी सामने आ रही है। परपंरागत खेती में कम आमदनी,बेकारी और परिवार के बीच आर्थिक तंगी ने किसानों को जोखिम भरे और गैरकानूनी खेती की ओर ढकेल दिया है। रायगढ़ जिले में जिन लोगों को अफीम की खेती करने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया है, पूछताछ के दौरान कुछ इस तरह का भयावह और दिल दहला देने वाला सच सामने आया है।

कम जमीन पर लाखों के फायदे के फेर में ग्रामीण अब कानूनी शिकंजे में बुरी तरह फंस चुके हैं। रायगढ़ जिले में पुलिस ने अफीम की खेती से जुडे एक आपराधिक नेटवर्क का खुलासा तो किया है साथ ही ग्रामीण इलाकों खासकर दूरस्थ वनांचल और यहां रहने वाले गरीब किसानों की उस सच्चाई को भी सामने ला दिया है जो बेहद डरावना और भयावह है। दरअसल जिन लोगों को पुलिस ने अफीम की खेती करने के आरोप में गिरफ्तार किया है, ये परंपरागत किसान हैं। परंपरागत खेती में बहुत ज्यादा आय ना होने और परिवार की जरुरतें पूरा ना होने के अलावा पूरे साल आर्थिक तंगी ने इनको उस रासते की ओर ढकेल दिया जिसका परिणाम बेहद खतरनाक है। इस रास्ते पर सिवाय जेल के और कुछ भी नहीं है। कानूनी शिकंजा और परिवार के गर्त में चले जाने के अलावा कुछ भी नहीं। 61 किलो से अधिक अफीम जब्ती और तीन गिरफ्तारियों के पीछे की कहानी सिर्फ कानून तोड़ने की नहीं, बल्कि ग्रामीण संकट, सीमित आय और आसान तरीके से ज्यादा पैसे कमाने का लालच ही तो है।

छोटी जमीन, बड़ी रकम और जोखिम बेहद डरावना

पुलिस की कार्रवाई में यह कड़वी सच्चाई सामने आई है, जिन लोगों को अफीम की खेती करने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, ये लोग मात्र दो डिसमिल जमीन में अफीम की खेती कर रहे थे। अचरज की बात ये कि आरोपी ग्रामीण किसान हैं और पीढ़ी-दर-पीढ़ी परंपरागत खेती करते चले आ रहे हैं। लालच ने इन सभी को जेल पहुंचा दिया है। ये अफीम की खेती करते थे, पकने के बाद उसे छिपाकर, काटकर और सुखाकर स्टोर करते थे और बिचौलियों के हाथों बेच देते थे।

यह लालच,युवा पीढ़ी को बर्बाद कर देगी

पुलिस की जांच में एक और बड़ी बात सामने आई है, जो काफी चौेंकाने वाली है और सरकार के लिए चिंता की बात भी है। जांच में यह बात सामने आई है, यह किसी बड़े माफिया का नेटवर्क नहीं है, यह स्थानीय स्तर पर छोटे और आर्थिक रूप से कमजोर किसानों का संगठित नेटवर्क और प्रयास भी कहा जा रहा है। पुलिस की मानें तो अगर ऐसा है तो यह बेहद चिंताजनक है। कम जमीन पर लाखों रुपये कमाने के फेर में कहीं युवा पीढ़ी इस ओर आगे आ गई तब क्या होगा।

इसलिए बढ़ रहा अफीम की खेती की ओर झुकाव

ग्रामीण जानकारों की माने तो परंपरागत खेती में इतनी आय नहीं मिल पाती, फसल का उचित दाम भी बाजार में नहीं मिलता। कम जगह में अफीम की खेती करने से ज्यादा मुनाफा और यही लालच किसानों को गैर कानूनी खेती करने आकर्षित कर रहा है। लेकिन यह आसान कमाई का रास्ता सीधे जेल और बर्बादी का रास्ता भी खोलता है।

कानून में सख्त प्रावधानर

अफीम की खेती को लेकर सरकार ने सख्त कानून बनाने के साथ सजा का प्रावधान भी किया है। NDPS एक्ट के तहत अवैध खेती, भंडारण या बिक्री गंभीर अपराध है। जेल की लंबी सजा भुगतने के अलावा भारी भरकम जुर्माना भी पटाना पड़ता है। इस तरह की सजा का पूरे परिवार पर सामाजिक और आर्थिक असर भी गहरा पड़ता है।

ड्रोन निगरानी ने खत्म की ‘छिपी खेती’

पहले जंगल और दूरस्थ इलाकों में अफीम व गांजे की खेती छिप जाती थी, लेकिन अब ड्रोन से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। छोटी से छोटी फसल भी ड्रोन के दायरे में आ जा रही है। मतलब साफ है, अब छुपकर खेती लगभग असंभव होती जा रही है।

समाधान क्या है?

विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ कार्रवाई नहीं, बल्कि किसानों को वैकल्पिक फसल और बाजार देने के अलावा ग्रामीण रोजगार के अवसर बढ़ाने होंगे। गांव में लगातार जागरुकता अभियान चलाने होंगे। इन सबके बीच सख्त निगरानी भी निरंतर जारी रखनी होगी। इन सबके संतुलन से ही इस समस्या को जड़ से खत्म किया जा सकता है।

सख्त संदेश, स्पष्ट संकेत

प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अवैध मादक पदार्थों के कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। लैलूंगा की यह घटना सिर्फ एक पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि एक बड़ा सवाल है, क्या ग्रामीणों को सही विकल्प नहीं मिल रहे, या लालच उन्हें कानून तोड़ने पर मजबूर कर रहा है?

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

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