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बड़ी खबर: हाई कोर्ट ने पूर्व चीफ जस्टिस व जजों के खिलाफ शिकायत किया रद्द, डिवीजन बेंच ने कहा...

Bilaspur High Court: चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने पूर्व चीफ जस्टिस, एक वर्तमान हाई कोर्ट जस्टिस और राज्य की उच्च न्यायिक सेवा के कई अधिकारियों के खिलाफ दायर आपराधिक शिकायत को रद्द कर दिया है।

Bilaspur High Court
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फोटो सोर्स- NPG News

By Radhakishan Sharma

बिलासपुर।10 मार्च 2026| चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने पूर्व चीफ जस्टिस, एक वर्तमान हाई कोर्ट जस्टिस और राज्य की उच्च न्यायिक सेवा के कई अधिकारियों के खिलाफ दायर आपराधिक शिकायत को रद्द कर दिया है। डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है, न्यायपालिका और सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ केवल आशंका के आधार पर आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है, आपराधिक प्रक्रिया को उत्पीड़न का हथियार नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने साफ कहा, केवल आशंका और अनुमान के आधार पर न्यायपालिका के सदस्यों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही चलने देना न्यायिक संस्थाओं की गरिमा को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

हाई कोर्ट ने कहा- आपराधिक कानून को उत्पीड़न या दबाव का साधन नहीं बनने दिया जा सकता चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने कहा, आपराधिक कानून का इस्तेमाल किसी को परेशान करने, डराने या व्यक्तिगत अथवा सेवा संबंधी शिकायतों को आपराधिक मुकदमे का रूप देने के लिए नहीं किया जा सकता।

डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा, आपराधिक कार्यवाही शुरू करना कोई औपचारिक प्रक्रिया नहीं है। संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों और हायर ज्यूडिशियल सर्विस के अधिकारियों को तलब करने के गंभीर परिणाम होते हैं। लिहाजा आपराधिक कानून को उत्पीड़न या दबाव का साधन नहीं बनने दिया जा सकता।

पढ़िए क्या है मामला?

पूरा मामला वर्ष 2015 की एक घटना से जुड़ा है, जिसमें एक टोल प्लाजा पर शिकायतकर्ता के पति के साथ कथित दुर्व्यवहार का आरोप लगाया गया। उस समय शिकायतकर्ता के पति सुकमा में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट CJM के पद पर कार्यरत थे। इस घटना को लेकर पुलिस ने एफआईआर भी दर्ज किया है ।

पढ़िए पुलिस पर क्या आरोप लगाया है

शिकायत में आरोप लगाया गया कि उस FIR में पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल नहीं किया, क्योंकि इसमें पुलिस अधिकारियों, न्यायिक अधिकारियों, तत्कालीन चीफ जस्टिस और एक वर्तमान हाई कोर्ट जस्टिस की कथित साजिश शामिल थी। हाई कोर्ट ने शिकायत की जांच करते हुए पाया कि इसमें साजिश से जुड़ा कोई ठोस तथ्य या साक्ष्य नहीं है। डिवीजन बेंच ने कहा कि भारतीय दंड संहिता IPC की धारा 120-बी के तहत साजिश सिद्ध करने के लिए यह दिखाना जरूरी होता है कि दो या अधिक व्यक्तियों के बीच किसी अवैध कार्य को करने के लिए स्पष्ट सहमति या योजना बनी थी।

डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा, शिकायत में ऐसे किसी भी ठोस तथ्य का उल्लेख नहीं है। शिकायतकर्ता ने स्वयं यह कहा, आरोप पत्र दाखिल न होने के पीछे साजिश होने की आशंका है, लेकिन इसके समर्थन में कोई ठोस सामग्री पेश नहीं कर पाए। कोर्ट ने कहा, पूरे आरोप केवल आशंका और संदेह पर आधारित हैं। शिकायत में ऐसा कोई तथ्य नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि संबंधित जजों या अधिकारियों के बीच किसी तरह की साजिश, सहमति या योजना बनी थी।

शिकायतकर्ता ने कहा, पति को झेलनी पड़ी परेशानी

मामले में शिकायतकर्ता की ओर से यह भी आरोप लगाए गए कि उनके पति को नक्सल प्रभावित क्षेत्र में स्थानांतरण, वेतन वृद्धि रोकने और सेवा समाप्त करने जैसी प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करना पड़ा।

डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा, ऐसे विवाद सेवा कानून के दायरे में आता है और इन्हें आपराधिक साजिश का रूप नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने कहा, इस तरह की शिकायत को जारी रहने देना कानून की प्रक्रिया का गंभीर दुरुपयोग होगा। इससे संबंधित व्यक्तियों को बिना किसी ठोस आधार के अनावश्यक आपराधिक मुकदमे का सामना करना पड़ेगा। इस टिप्प्णी के साथ डिवीजन बेंच ने शिकायत रद्द करते हुए कहा कि न्यायपालिका और सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ केवल अनुमान या आशंका के आधार पर आपराधिक मुकदमे नहीं चलाया जा सकता।

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

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