कर्मचारियों की खबर: हाई कोर्ट ने कहा: कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करते समय निर्धारित नियम, प्रक्रिया का सख्ती से हो पालन....
Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने कहा, किसी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करते समय निर्धारित प्रक्रिया और नियमों का सख्ती के साथ पालन हो। जांच में पादर्शिता और निष्पक्षता जरुरी है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने आरक्षक की याचिका को स्वीकार करते हुए बर्खास्तगी आदेश को रद्द कर दिया है।

फोटो सोर्स- NPG News
बिलासपुर। 31 मार्च 2026|छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने कहा, किसी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करते समय निर्धारित प्रक्रिया और नियमों का सख्ती के साथ पालन हो। जांच में पादर्शिता और निष्पक्षता जरुरी है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने आरक्षक की याचिका को स्वीकार करते हुए बर्खास्तगी आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने आरक्षक को सेवा में बहाल करने और 50% बैक वेतन देने का आदेश का राज्य सरकार को दिया है।
बता दें, हाई कोर्ट ने विभाग द्वारा की गई बर्खास्तगी आदेश को त्रुटिपूर्ण बताने के अलावा जांच पर सवाल भी उठाए हैं। सिंगल बेंच ने बर्खास्तगी आदेश को रद्द कर दिया है।
पढ़िए क्या है मामला?
आरक्षक शिवकुमार सायतोड़े के खिलाफ उसकी पत्नी ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था, आरक्षक पति शराब के नशे में उसके साथ मारपीट करता है। पत्नी की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आरक्षक के खिलाफ विभागीय जांच का आदेश आला अफसर ने दिया था। विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर आरक्षक की सेवा समाप्त करते हुए बर्खास्तगी आदेश जारी किया गया। आरक्षक ने बर्खास्तगी आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई जस्टिस एके प्रसाद के सिंगल बेंच में हुई। याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जांच प्रक्रिया के परीक्षण के दौरान इसमें गंभीर त्रुटियां व खामियां पाई। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में विभागीय जांच की खामियों की ओर इशारा करते हुए कहा, विभागीय जांच निष्पक्ष और विधि सम्मत तरीके से नहीं की गई है। कोर्ट ने यह भी कहा, जांच प्रक्रिया में उचित साक्ष्यों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया है, लिहाजा बर्खास्तगी आदेश न्याय संगत नहीं माना जा सकता। इस टिप्पणी के साथ सिंगल बेंच ने याचिकाकर्ता आरक्षक की याचिका को स्वीकार करते हुए विभाग द्वारा जारी बर्खास्तगी आदेश को रद्द करते हुए याचिकाकर्ता को सेवा में बहाली का निर्देश राज्य शासन को दिया है।
हाई कोर्ट की टिप्पणी
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करते समय विभाग को निर्धारित मापदंडों और प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए। कोर्ट ने दोटुक कहा, जांच में निष्पक्षता और पारदर्शिता का अभाव रहेगा तो इस तरह की कार्रवाई अदालत में टिक नहीं पाती है। कोर्ट ने राज्य सरकार को यह छूट दी है, वेतन भुगतान सेवा बहाली की तिथि व अन्य शर्तों के अनुसार कर सकती है।
