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कर्मचारियों की खबर, हाई कोर्ट ने कहा- अधिकार व्यक्ति के मृत्यु के साथ खत्म नहीं होते, कोर्ट के फैसले से कृषि विभाग के एक अफसर को मृत्यु के बाद मिली पदोन्नति

MP High Court News: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का यह फैसला कर्मचारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। पदोन्नति को लेकर कृषि विभाग के मृत अधिकारी के परिजनों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने साफ कहा, अधिकार व्यक्ति के मृत्यु के साथ खत्म नहीं होते। कोर्ट ने मृत कर्मचारी को पदोन्नति देने व सभी लाभ परिजनों को देने का निर्देश मध्य प्रदेश सरकार को दिया है।

कर्मचारियों की खबर, हाई कोर्ट ने कहा- अधिकार व्यक्ति के मृत्यु के साथ खत्म नहीं होते, कोर्ट के फैसले से कृषि विभाग के एक अफसर को मृत्यु के बाद मिली पदोन्नति
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इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News

By Radhakishan Sharma

ग्वालियर। 30 मार्च 2026|मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के ग्वालियर पीठ ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है,अधिकार व्यक्ति के मृत्यु के साथ खत्म नहीं होते। मृत कर्मचारी को प्रमोशन देने व सभी लाभ कर्मचारी के परिजन को देने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है। कोर्ट के इस फैसले से मृत अधिकारी के परिवार को वर्ष 2002 से पदोन्नति का लाभ मिलेगा।

डॉ. राधाकृष्ण शर्मा अपने जूनियर अधिकारियों से वरिष्ठ थे, वर्ष 2002 में जब विभाग ने पदोन्नति सूची जारी को तो उनके जूनियर को प्रमोशन मिल गया, जबकि उनकी पदोन्नति रोक दी गई। विभाग ने इसके पीछे लंबित आपराधिक मामला और उनकी गोपनीय रिपोर्ट ACR को कारण बताया। बाद में डॉ. शर्मा उस आपराधिक मामले में बरी हो गए थे,जिसको कारण बताते हुए विभाग ने उनकी पदोन्नति रोक दी थी। बहाल होने के बाद उसने पदोन्नति के लिए अभ्यावेदन पेश किया था। इसके बाद भी उन्हें पदोन्नति नहीं दी गई।

18 साल लड़ा कानूनी लड़ाई, हो गया निधन

विभाग और राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए डा शर्मा ने साल 2008 हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। मामला चलते रहा, 18 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ते-लड़ते उनकी मौत हो गई। पिता के निधन के बाद पुत्र रमन शर्मा ने पिता की अधूरी इच्छा को पूरी करने अदालती लड़ाई लड़ी। याचिका की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, अगर किसी कर्मचारी की पदोन्नति विभागीय गलती से रोकी जाती है, तो उसे पूरा लाभ मिलना चाहिए। नो वर्क-नो पे का सिद्धांत ऐसे मामलों में लागू नहीं होगा। बिना बताए एसीआर को पदोन्नति का आधार बनाना कानून के खिलाफ है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में ये कहा

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, डॉ. राधाकृष्ण शर्मा को 28 अक्टूबर 2002 से पदोन्नत माना जाए, उस तिथि से सभी एरियर, वेतन, वरिष्ठता और अन्य लाभ दिए जाएं और यह पूरी राशि उनके परिवार को दी जाए। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, पदोन्नति न मिलना डॉ. शर्मा की गलती नहीं, बल्कि विभाग की लापरवाही थी। कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा, अधिकार कभी खत्म नहीं होते, चाहे इंसान इस दुनिया में रहे या नहीं।

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

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