हाई कोर्ट ने क्यों कहा: विशिष्ट पदों पर लंबे समय तक भर्ती ना होना,आम आदमी के हित में नहीं, हेल्थ सिकरेट्री से शपथ पत्र के साथ मांगा जवाब

Bilaspur High Court
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फोटो सोर्स- NPG News

Bilaspur High Court News: स्वत: संज्ञान वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने कहा, विशिष्ट पदों पर लंबे समय तक भर्ती प्रक्रिया के लंबित रहने का मतलब है, आम आदमी के हित में नहीं है।

बिलासपुर। 7 अप्रैल 2026| स्वत: संज्ञान वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने कहा, विशिष्ट पदों पर लंबे समय तक भर्ती प्रक्रिया के लंबित रहने का मतलब है, आम आदमी के हित में नहीं है। नाराज हाई कोर्ट ने हेल्थ सिकरेट्री को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।

छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने विशेषज्ञ पदों, विशेष रूप से MD मनोचिकित्सक की भर्ती में हो रही देरी को लेकर डिवीजन बेंच ने नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में छत्तीसगढ़ में पर्याप्त मानसिक स्वास्थ्य देखभाल बुनियादी ढांचा और सुविधाओं की कमी, तथा विशेषज्ञ पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी होने में हो रहे विलंब को स्वत: संज्ञान में लेते हुए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई चल रही है।

पढ़िए राज्य सरकार ने शपथ पत्र के साथ क्या दी है जानकारी

छत्तीसगढ़ सरकार के स्वास्थ्य सचिव ने शपथ पत्र पेश करते हुए हाई कोर्ट को जानकारी दी है, मनोचिकित्सकों की नई भर्ती प्रक्रिया चल रही है। सचिव ने बताया कि पिछली भर्ती प्रक्रिया असफल हो गई थी। 6 एमडी मनोचिकित्सक पदों के लिए एक प्रस्ताव छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग CGPSC को भेजा गया। वह प्रस्ताव वित्त विभाग की मंजूरी का इंतजार कर रहा था। मनोचिकित्सकों के अलावा परामर्शदाताओं Counsellors और नैदानिक ​​मनोवैज्ञानिकों Clinical Psychologists की भर्ती प्रक्रिया चल रही थी। पैथोलाॅजिस्ट की भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, एक उम्मीदवार का चयन किया गया है।

राज्य सरकार ने बताया, इसलिए भर्ती में हो रही है देरी

स्वास्थ्य सचिव द्वारा पेश शपथ पत्र में कोर्ट को भर्ती प्रक्रिया में आने वाली चुनौतियों के संबंध में जानकारी देते हुए बताया है, PG की सीमित सीटों के कारण योग्य मनोचिकित्सकों की कमी तो बनी हुई है। इसके अलावा कड़े नियम और प्रशिक्षण संबंधी अनिवार्य शर्त को भी शामिल किया गया है। स्वास्थ्य सचिव ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि इन बाधाओं के बावजूद, सरकार राज्य भर में रिक्त पदों को भरने और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं मे के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

न्याय मित्र ने ये कहा

न्याय-मित्र ने कोर्ट को बताया, एमडी मनोचिकित्सकों के पदों के लिए पहले विज्ञापन जारी किया गया, राज्य सरकार ने एक बार फिर वित्तीय मंजूरी प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू की है। सरकार के इस निर्णय ने भर्ती प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबा खींच दिया। इसके चलते अनावश्यक देरी होगी। न्याय मित्र की बातों को सुनने के बाद डिवीजन बेंच ने कहा, एमडी साइकियाट्रिस्ट के छह पदों पर भर्ती का प्रस्ताव 05 मार्च 2026 को ही आगे बढ़ा दिया गया और वर्तमान में यह वित्त विभाग के अनुमोदन के लिए लंबित है। जब पहले ही वित्तीय अनुमोदन प्रदान किया जा चुका था तो ऐसे अनुमोदन को फिर से मांगना केवल एक औपचारिकता प्रतीत होता है। इसके कारण अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। इसलिए इस प्रक्रिया को उचित शीघ्रता के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

डिवीजन बेंच ने हेल्थ सिकरेट्री के जवाब पर भरोसा जताया और ये कहा

राज्य सरकार के जवाब और न्याय मित्र के तर्कों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा, अदालत अपेक्षा करता है और उसे विश्वास है, राज्य सरकार एमडी साइकियाट्रिस्ट के पद पर भर्ती की प्रक्रिया को जल्द-से-जल्द पूरा करने के लिए पूरी निष्ठा से प्रयास करेगी और किसी भी प्रकार के अनावश्यक विलंब से बचेगी।

अपडेट स्टेटस के साथ देनी होगी जानकारी

डिवीजन बेंच ने साफ कहा, ऐसे विशिष्ट पदों पर भर्ती का लंबे समय तक लंबित रहना, विशेषकर मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में आम जनता के लिए गंभीर रूप से अहितकर सिद्ध होता है। डिवीजन बेंच ने स्वास्थ्य सचिव को निर्देश देते हुए कहा, कोर्ट के पूर्व निर्देशों और भर्ती प्रक्रिया की अपडेट स्टेटस के साथ शपथ पत्र के साथ जानकारी दे। जनहित याचिका की अगली सुनवाई के लिए डिवीजन बेंच ने 28 अप्रैल, 2026 की तिथि तय कर दी है।

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