छुट्टी के दिन चीफ जस्टिस ने की जनहित के दो महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई, निगम कमिश्नर को जाारी किया नोटिस, एक सप्ताह के भीतर पाइप लाइन को दुरुस्त कराने के निर्देश
Bilaspur High Court: शनिवार और रविवार को छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में अवकाश रहता है। अवकाश के दिन शनिवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने कोर्ट खुलवाकर जनहित से जुड़े दो महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर नगर निगम के एक वार्ड में जल आपूर्ति के लिए बिछाए जा रहे पाइप लाइन का काम अधूरा है, इससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मीडिया में प्रकाशित इस रिपोर्ट को संज्ञान में लेते हुए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई प्रांरभ की।

इमेज सोर्स- गूगल, एडिट बाय- NPG News
बिलासपुर। शनिवार और रविवार को छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में अवकाश रहता है। अवकाश के दिन शनिवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने कोर्ट खुलवाकर जनहित से जुड़े दो महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर नगर निगम के एक वार्ड में जल आपूर्ति के लिए बिछाए जा रहे पाइप लाइन का काम अधूरा है, इससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मीडिया में प्रकाशित इस रिपोर्ट को संज्ञान में लेते हुए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई प्रांरभ की।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने बिलासपुर नगर निगम के कमिश्नर को नोटिस जारी कर अधूरे पडे काम को पूरा करने का निर्देश दिया है। काम के लिए डेड लाइन तय करते हुए चीफ जस्टिस ने एक सप्ताह का समय दिया है। तय समय सीमा में काम पूरा करने की बात कही है। डिवीजन बेंच ने कमिश्नर से कहा,इसे संज्ञान लें और बिना किसी देरी के आवश्यक सुधारात्मक उपाय सुनिश्चित करें। वे यह सुनिश्चित करेंगे कि वार्ड संख्या 12 (बन्नक इलाका) में जल निकासी व्यवस्था का निर्माण कार्य शीघ्रता से पूरा हो। काम को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने व क्षतिग्रस्त पाइप लाइन को एक सप्ताह के भीतर मरम्मत कराने और जल आपूर्ति व्यवस्था बहाल कराने का निर्देश दिया।
दोषी ठेकेदार व निगम के अधिकारी की तय करें जिम्मेदारी और करे कार्रवाई
डिवीजन बेंच ने कहा, संचित अपशिष्ट जल को साफ करने और प्रभावित क्षेत्र को स्वच्छ करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं ताकि बीमारियों का प्रकोप न फैले। आयुक्त यह भी सुनिश्चित करेंगे कि इस चूक के लिए दोषी ठेकेदार और अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया जाए और उनके खिलाफ कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए।
निगम आयुक्त से शपथ पत्र में मांगा जवाब
मामले की सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच ने कहा, आयुक्त, नगर निगम, बिलासपुर द्वारा अगली सुनवाई की तारीख से पहले एक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल किया जाएगा, जिसमें उठाए गए कदमों और कार्य की वर्तमान स्थिति का उल्लेख होगा और साथ ही एनआईटी की तारीख और जारी किए गए कार्य आदेश को भी रिकॉर्ड पर रखा जाएगा, जिसमें नाली के निर्माण के लिए प्रस्तावित समय अवधि का उल्लेख होगा। इस निर्देश के साथ ही डिवीजन बेंच ने भरोसा जताया है,पीआईएल की सुनवाई के दौरान दिए गए निर्देशों का तय समय सीमा में पालन होगा। जनहित याचिका की अगली सुनवाई के लिए डिवीजन बेंच ने 9 अप्रैल की तिथि तय कर दी है।
पढ़िए क्या है मामला, जिसे चीफ जस्टिस ने लिया स्वत:संज्ञान
सिरगिट्टी के वार्ड नंबर 12 (बन्नक इलाका) में रहने वालों को जल निकासी व्यवस्था के अधूरे निर्माण के कारण गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ब रहा है। लगभग डेढ़ महीने पहले, एक निर्माण के लिए खुदाई का काम शुरू हुआ था। अजय यादव के आवास से दत्तु मिश्रा के आवास तक नाले का निर्माण कार्य किया गया। इस दौरान लगभग 10 फीट गहरी खाई खोदी गई। हालांकि, तब से खुदाई का काम अधूरा ही पड़ा है। इसके अलावा, खुदाई के दौरान सड़क के किनारे बिछी पाइपलाइन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। इसके बावजूद, न तो ठेकेदार ने नाले का निर्माण कार्य शुरू किया है और न ही क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की मरम्मत या उसे दोबारा जोड़ने का कोई प्रयास किया गया है। परिणामस्वरूप, निवासियों को पानी की आपूर्ति बुरी तरह से बाधित हो गई है।
ठेकेदार की निष्क्रियता और लापरवाही के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों द्वारा काम की ठीक से निगरानी और पर्यवेक्षण करने में विफलता के कारण क्षेत्र के निवासियों को अत्यधिक असुविधा और कठिनाई का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा, अपूर्ण जल निकासी व्यवस्था के कारण, घरों से निकलने वाला अपशिष्ट जल खुली नाली में जमा हो रहा है, जिससे अस्वच्छ और खतरनाक वातावरण बन रहा है।
हालात बेहद खराब है। निवासियों को पीने का पानी लाने के लिए भारी जोखिम उठाना पड़ता है, क्योंकि उन्हें गंदे और रुके हुए पानी से होकर गुजरना पड़ता है। रुके हुए पानी के जमाव से मच्छरों की संख्या में भी वृद्धि हुई है, जिससे डेंगू और अन्य जलजनित बीमारियों का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भी, संबंधित अधिकारी तत्काल और प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहे हैं।
ये हैं प्रमुख पक्षकार
मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन, सचिव नगरीय प्रशासन विभाग,सचिव लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकी विभाग, कलेक्टर बिलासपुर व आयुक्त बिलासपुर नगर निगम।
