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घर घुसकर महिला को गोली मारने वाले आरोपियों को माफी नहीं, ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ की थी अपील

Bilaspur Highcourt News: महिला को घर घुसकर गोली मारने वालों को ट्रायल कोर्ट ने 10 साल की सजा सुनाई थी। जिसके खिलाफ आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील की थी। अपील की सुनवाई में हाईकोर्ट ने सजा निरस्त करने से इनकार कर दिया पर सजा में आंशिक राहत देते हुए 10 साल की सजा को 7 साल कर दिया। हालांकि जुर्माना बढ़ाया गया है।

घर घुसकर महिला को गोली मारने वाले आरोपियों को माफी नहीं, ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ की थी अपील
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इमेज सोर्स- NPG News

By Radhakishan Sharma

बिलासपुर।13 मार्च 2026| छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वर्ष 2001 में हुए एक मामले में दिए गए फैसले में घर में घुसकर गोली मारने के आरोपियों की सजा में आंशिक संशोधन किया है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा दी गई 10 साल की कैद की सजा को घटाकर 7 साल कर दिया है , हालांकि दोषियों पर लगाए गए जुर्माने की राशि में बढ़ोतरी की गई है।

बिलासपुर के कश्यप कॉलोनी निवासी सुनीता तिवारी अपने घर में सुच्चा नंद वाधवानी के साथ चाय पी रही थीं। इसी दौरान आरोपी राम कृष्ण वैश्य अपने साथियों के साथ जबरन घर में घुस आया और मकान के कागजात को लेकर सुच्चा नंद के साथ विवाद करने लगा। विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने सुच्चा नंद को जान से मारने की धमकी दी। सुनीता ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो मुख्य आरोपी राम कृष्ण ने उन पर देसी कट्टे से गोली चला दी। गोली सुनीता के जांघ के ऊपरी हिस्से में लगी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गईं। आरोपियों ने दूसरी गोली भी चलाई जो सुनीता और सुच्चा नंद के बीच से होकर दीवार में जा धंसी। मामले में बिलासपुर के अपर सत्र न्यायाधीश ने 3 अगस्त 2005 को आरोपियों को दोषी करार देते हुए 10 साल की सजा सुनाई थी। इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

सजा कम की पर आरोपियों पर जुर्माना बढ़ाया

अपील पर दिए गए फैसले में जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने आईपीसी की धारा 307 यानी हत्या का प्रयास के तहत 10 साल की जेल को घटाकर 7 साल कर दिया है। वहीं, धारा 307 के तहत व्यक्तिगत जुर्माने को 25 हजार रुपए से बढ़ाकर 50 हजार रुपए कर दिया गया है। हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि बढ़ा हुआ जुर्माना पीड़ित सुनीता तिवारी को मुआवजे के रूप में दिया जाए। वहीं, अपील लंबित रहने के दौरान ही आरोपी झल्लू और मुन्ना वर्मा की मृत्यु हो जाने के कारण उनके खिलाफ मामला समाप्त कर दिया गया है।

घायल गवाह का बयान बेहद भरोसेमंद

हाईकोर्ट ने कहा कि घायल गवाह का बयान अत्यंत विश्वसनीय होता है और उसे आसानी से खारिज नहीं किया जा सकता। इस मामले में मेडिकल रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान से यह साबित हुआ कि आरोपियों का इरादा जानलेवा हमला करने का ही था। हाई कोर्ट ने दोषियों को 8 सप्ताह के भीतर संबंधित ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करने का निर्देश दिया है।

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

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