बिलासपुर हाईकोर्ट: विश्वविद्यालय सेवा से जुड़े अधिकारी का स्थानांतरण एक विश्वविद्यालय से दूसरे विश्वविद्यालय में ही किया जा सकता है, अन्य संस्थान में नहीं
Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है, विश्वविद्यालय सेवा से जुड़े अधिकारी का स्थानांतरण एक विश्वविद्यालय से दूसरे विश्वविद्यालय में ही किया जा सकता है, किसी अन्य संस्थान में नहीं.

फोटो सोर्स- NPG News
बिलासपुर. 8 मार्च 2026|छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है, विश्वविद्यालय सेवा से जुड़े अधिकारी का स्थानांतरण एक विश्वविद्यालय से दूसरे विश्वविद्यालय में ही किया जा सकता है, किसी अन्य संस्थान में नहीं. हाई कोर्ट ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को विश्वविद्यालय से बाहर किसी अन्य कार्यालय में अटैच करने के आदेश को अवैध ठहराते हुए निरस्त कर दिया है।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, विश्वविद्यालय सेवा से जुड़े अधिकारी का स्थानांतरण सिर्फ एक विश्वविद्यालय से दूसरे विश्वविद्यालय में ही किया जा सकता है, किसी अन्य संस्थान में नहीं। जस्टिस पीपी के सिंगल बेंच ने विनोद कुमार एक्का की याचिका पर या फैसला सुनाया है।
पढ़िए क्या है मामला
याचिकाकर्ता विनोद कुमार एक्का को वर्ष 2016 में प्रमोशन देकर संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा में रजिस्ट्रार के पद पर पदस्थ किय था। कुछ समय बाद राज्य सरकार ने 15 मार्च 2024 को आदेश जारी कर उन्हें उच्च शिक्षा आयुक्त कार्यालय, रायपुर में अटैच कर दिया था। विनोद एक्का ने राज्य शासन के इस आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
याचिका में यह मुद्दा उठाया
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में बताया, रजिस्ट्रार का पद विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 और विश्वविद्यालय सेवा नियम 1983 के तहत एक वैधानिक पद है। नियमों के अनुसार इस पद पर कार्यरत अधिकारी का स्थानांतरण केवल एक विश्वविद्यालय से दूसरे विश्वविद्यालय में ही किया जा सकता है।
वैधानिक प्रावधानों के विपरीत है शासन का आदेश
मामले की सुनवाई जस्टिस पीपी साहू के सिंगल बेंच में हुई. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अधिनियम और नियमों का परीक्षण करते हुए पाया कि विश्वविद्यालय सेवा से जुड़े अधिकारी को किसी गैर-विश्वविद्यालय कार्यालय में पदस्थ करने का प्रावधान नहीं है। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा जारी किया गया आदेश वैधानिक प्रावधानों के विपरीत है, इसलिए इसे कानूनन टिकाऊ नहीं माना जा सकता।
अटैचमेंट आदेश किया निरस्त
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, याचिकाकर्ता को विश्वविद्यालय के बाहर उच्च शिक्षा आयुक्त कार्यालय में अटैच करना नियमों के विरुद्ध है। लिहाजा 15 मार्च 2024 का आदेश निरस्त किया जाता है।
