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हाई कोर्ट बोला- किसी वाहन चालक के पास दो ड्राइविंग लाइसेंस होना, बीमा पॉलिसी का उल्लंघन नहीं,..

Bilaspur High Court: मोटर दावा अधिकरण के फैसले को चुनौती देने वाली बीमा कंपनी की याचिका को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा है, किसी वाहन चालक के पास दो ड्राइविंग का होना, बीमा पॉलिसी का उल्लंघन नहीं है। अधिकरण द्वारा तय किए मुआवजा राशि में 16.53 लाख रुपए अतिरिक्त जोड़कर भुगतान करने का निर्देश दिया है।

Bilaspur High Court
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फोटो सोर्स- NPG News

By Radhakishan Sharma

बिलासपुर। 28 मार्च 2026|मोटर दावा अधिकरण के फैसले को चुनौती देने वाली बीमा कंपनी की याचिका को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा है, किसी वाहन चालक के पास दो ड्राइविंग का होना, बीमा पॉलिसी का उल्लंघन नहीं है। अधिकरण द्वारा तय किए मुआवजा राशि में 16.53 लाख रुपए अतिरिक्त जोड़कर भुगतान करने का निर्देश दिया है।

हाई कोर्ट ने मोटर दुर्घटना मुआवजा मामले की सुनवाई करते हुए अपने फैसले में कहा है, किसी वाहन चालक के पास दो ड्राइविंग लाइसेंस होना, बीमा पॉलिसी का उल्लंघन नहीं माना जाएगा। जस्टिस संजय के अग्रवाल के सिंगल बेंच ने सड़क हादसे में जान गंवाने वाली महिला सोनिया बाई के परिजनों को मिलने वाले मुआवजे में करीब 16.53 लाख रुपए की बढ़ोतरी करते हुए 6 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करने का निर्देश बीमा कंपनी को दिया है। कोर्ट के आदेश के बाद अब बीमा कंपनी को कुल 66.37 लाख रुपए का भुगतान मृतक के परिजनों को करना होगा।

पढ़िए क्या है मामला?

तखतपुर निवासी 41 वर्षीय सोनिया बाई की 2014 में सड़क हादसे में मृत्यु हो गई थी। उनके पति भोलाराम और चार बच्चों ने मुआवजे के लिए क्लेम किया था। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने फरवरी 2019 में 49.84 लाख रुपए मुआवजे का आदेश दिया था। अधिकरण के फैसले को चुनौती देते हुए यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी ने हाई कोर्ट में अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। बीमा कंपनी के अधिवक्ता ने कोर्ट के सामने तर्क पेश करते हुए कहा, चालक बंशीलाल के पास दो ड्राइविंग लाइसेंस थे, इसलिए मुआवजा देने के लिए कंपनी उत्तरदायी नहीं।

दो ड्राइविंग लाइसेंस का होना पॉलिसी का उल्लंघन नहीं

हाई कोर्ट ने कहा कि दो लाइसेंस होना धारा 6 के तहत प्रतिबंधित है और धारा 182 (1) के तहत सजा या जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन यह बीमा पॉलिसी का उल्लंघन नहीं है। चालक ने कहा, पहला लाइसेंस गुम हो जाने के कारण उसने दूसरा लाइसेंस बनवाया था। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने बीमा कंपनी के तर्क को खारिज करते हुए मुआवजा बढ़ाने का आदेश दिया।

कोर्ट ने मुआवजे में 16 लाख 53 हजार की बढ़ोतरी की

हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभित्र मामलों में दिए गए फैसलों और जारी किए गए गाइड लाइन को आधार मानते हुए मुआवजे की नए सिरे सेगणना की है। पुराना मुआवजा राशि 49 लाख 84 हजार 150 रुपए की जगह कोर्ट ने नए सिरे से मुआवजे का निर्धारण किया है। कोर्ट ने बीमा कंपनी को निर्देश जारी करते हुए मृतक के परिजन को बतौर क्षतिपूर्ति मुआवजा 66 लाख 37 हजार 702 रुपए की राशि का भुगतान करे। कोर्ट के आदेश के बाद बीमा कंपनी को 16 लाख 53 हजार 552 रुपए प्रभावित परिवार को अतिरिक्त देने होंगे।

6 प्रतिशत ब्याज के साथ इस तिथि से करना होगा भुगतान

हाई कोर्ट ने बीमा कंपनी को साफ कहा है, बढ़ी हुई राशि का भुगतान दावा पेश करने की पहली तिथि 18 जुलाई 2014 से 6 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करना होगा। इसके लिए कोर्ट ने बीमा कंपनी को 45 दिन की मोहलत दी है।

हाई कोर्ट ने कहा, बीमा पॉलिसी के शर्तों का नहीं है उल्लंघन

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, वाहन चालक के पास दो ड्राइविंग लाइसेंस का हाेना बीमा पाॅलिसी में दी गई शर्तों का उल्लंघन नहीं हैकोर्ट ने अगर वाहन चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं होता, फर्जी होता या उस श्रेणी का वाहन चलाने का लाइसेंस नहीं होता तब बीमा कंपनी मुआवजा देने से इंकार कर सकती थी।

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

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