CG नगर पालिका परिषद CMO के निलंबन आदेश पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक, पढ़िए हाई कोर्ट ने अपने आदेश में क्या है
Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट बेमेतरा नगर पालिका परिषद के सीएमओ के निलंबन आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।

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बिलासपुर। 13 मार्च 2026|छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट बेमेतरा नगर पालिका परिषद के सीएमओ के निलंबन आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। राज्य शासन द्वारा जारी आदेश पर रोक लगाने के साथ ही आधा दर्जन अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता नरेश कुमार वर्मा की ओर से अधिवक्ता संदीप दुबे व मानस वाजपेयी ने पैरवी की।
याचिकाकर्ता नरेश कुमार वर्मा की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता संदीप दुबे व मानस वाजपेयी ने कहा, याचिकाकर्ता नगर पालिका परिषद बेमेतरा का सीएमओ है। उसे प्रारंभ में सीएमओ डोंगरगढ़ के पद पर नियुक्त किया गया था। बाद में उसे नगर पालिका परिषद कर्वधा और फिर बेमेतरा में स्थानांतरित कर दिया गया है। अधिवक्ता दुबे ने तर्क पेश करते हुए कहा, निलंबन का आदेश छत्तीसगढ़ राज्य नगर पालिका (कार्यकारी/इंजीनियरिंग/स्वास्थ्य) सेवा, भर्ती और सेवा शर्तें नियम 2017 के नियम 33 के प्रावधानों का हवाला देते हुए पारित किया गया है, जो कार्यकारी, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों से संबंधित है। याचिकाकर्ता का मूल पद लेखाकार का है और इसलिए छत्तीसगढ़ नगर निगम (कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्तें) नियम 1968 लागू होंगे। अधिवक्ता संदीप दुबे ने यह भी तर्क दिया कि 1968 के नियमों के अनुसार निलंबन केवल अनुशासनात्मक प्राधिकारी द्वारा पारित किया जा सकता है, न कि किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा। वर्तमान मामले में निलंबन का आदेश राज्य सरकार द्वारा पारित किया गया है, जो न तो नियुक्ति प्राधिकारी है और न ही अनुशासनात्मक प्राधिकारी।
राज्य सरकार के अधिवक्ता ने ये दिया तर्क
राज्य शासन की ओर से पैरवी करते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता गैरी मुखोपाध्याय ने कहा, याचिकाकर्ता मुख्य नगर पालिका अधिकारी के कार्यवाहक पद पर हैं, जो कि 2017 के नियमों के तहत एक कार्यकारी पद है। इसलिए 2017 के नियमों के नियम 3 के अनुसार, याचिकाकर्ता 2017 के नियमों के अंतर्गत आएंगे, क्योंकि वे मुख्य नगर अधिकारी के कार्यवाहक पद पर हैं।
निलंबन आदेश पर हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई तक लगाई रोक
याचिका की सुनवाई जस्टिस पीपी साहू के सिंगल बेंच में हुई। जस्टिस साहू ने अपने फैसले में कहा है, 1968 के नियमों तथा 2017 के नियमों के प्रावधानों पर विचार करते हुए, जिनमें नगरपालिका के कर्मचारी को निलंबित करने के लिए सक्षम प्राधिकारी नियुक्ति एवं अनुशासनात्मक प्राधिकारी है, तथा याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के अनुसार, राज्य सरकार न तो नियुक्ति एवं अनुशासनात्मक प्राधिकारी है, बल्कि केवल नगर पालिका परिषद द्वारा भेजे जाने वाले प्रस्ताव पर नियुक्ति के लिए अंतरिम उपाय के रूप में अनुमोदन प्रदान करती है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने राज्य शासन द्वारा 24 फरवरी 2026 को जारी निलंबन आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने याचिका को 11 मई 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
निलंबन आदेश में ये है आरोप
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के उप सचिव ने जारी निलंबन आदेश में लिखा है, नरेश कुमार वर्मा, तत्का. प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी नगर पालिका परिषद कवर्धा एवं तत्कालीन सचिव, नोडल कबीरधाम जिला अरबन पब्लिक सर्विस सोसायटी के पद पर पदस्थापना के दौरान मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत कार्य संचालन सेवा प्रदाता कंपनी पर अधिरोपित अर्थदण्ड की राशि रू. 25,91,500.00 की वसूली नहीं करने के लिए उत्तरदायी पाये गये हैं।
अतएव, राज्य शासन, एतद्वारा, नरेश कुमार वर्मा (मूलपद लेखापाल) तत्कालीन प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी नगर पालिका परिषद कवर्धा एवं तत्का. सचिव/नोडल कबीरधाम जिला अरबन पब्लिक सर्विस सोसायटी (वर्तमान में प्रभारी मुनअ. नपाप. बेमेतरा) को छत्तीसगढ़ राज्य नगर पालिका (कार्यपालन/यांत्रिकी/स्वास्थ्य) सेवा, भर्ती तथा सेवा शर्ते नियम 2017 के नियम 33 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित करता है, निलंबन अवधि में वर्मा का मुख्यालय संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास, क्षेत्रीय कार्यालय दुर्ग रहेगा, तथा उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।
