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Bilaspur High Court: मेडिकल पीजी इंट्रेस की काउंसिलिंग पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक: प्रवेश की प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप

Bilaspur High Court: मेडिकल पीजी इंट्रेस एग्जाम के बाद प्रवेश प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा का आरोप लगाते हुए डॉ.यशवंत राव और डॉ पी राजशेखर ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। मामले की सुनवाई छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने काउंसिलिंग की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।

Bilaspur High Court: जो कुछ हो रहा है उसे इग्नोर भी तो नहीं किया जा सकता
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Bilaspur High Court

By Radhakishan Sharma

Bilaspur High Court: बिलासपुर। मेडिकल पीजी इंट्रेस एग्जाम पास करने के प्रवेश प्रक्रिया के लिए मापदंड तय किया गया है। सेवारत श्रेणी के लिए अलग से मापदंड बनाए गए हैं। इस कैटेगरी में प्रवेश के नाम पर किए जा रहे फर्जीवाड़ा को लेकर दो चिकित्सकों ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। दायर याचिका की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने प्रवेश को लेकर जारी काउंसिलिंग पर रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 फरवरी की तिथि तय कर दी है।

पीजी मेडिकल पाठ्यक्रम प्रवेश प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए डॉ.यशवंत राव और डॉ पी राजशेखर ने हाई कोर्ट में ने याचिका दायर की है। दायर याचिका में चिकित्सक ने कहा है कि वे सेवारत डॉक्टर हैं। 2024 की इंट्रेंस एग्जाम में अच्छी रैंक हासिल की है। प्रवेश के नियमों का हवाला देते हुए बताया है कि सेवारत श्रेणी के तहत प्रवेश की पात्रता के लिए 31 जनवरी 2024 तक तीन साल की सेवा पूरी करना अनिवार्य है। याचिका के अनुसार काउंसलिंग के दौरान इस बात की जानकारी मिली कि अनक्वाइफाइड उम्मीदवारों को गलत तरीके से सेवारत श्रेणी के बहाने बैकडोर एंट्री दी जा रही है। मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने काउंसिलिंग की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।

याचिकाकर्ता चिकित्सकों ने अपनी याचिका में बताया है कि मेडिकल पीजी में प्रवेश के लिए होने वाली काउंसिलिंग के दौरान जानकारी मिली कि कई अपात्र उम्मीदवारों को गलत तरीके से सेवारत श्रेणी का लाभ दिया गया। अधिकारियों ने सेवा अवधि की गणना कटऑफ तारीख से आगे बढ़ा दी है। यह सब अपनों को उपकृत करने के लिए किया गया है। याचिकाकर्ता चिकित्सकों ने कहा कि विभाग में इस तरह की गड़बड़ी की शिकायत करने व जांच की मांग करने के बाद भी अब तक कुछ नहीं हो पाया है। याचिकाकर्ताओं ने इस बात की आशंका भी जताई है कि प्रवेश के लिए किए जा रहे फर्जीवाड़े से योग्य चिकित्सकों को नुकसान होगा और उनकी सुविधा के लिए बनाए गए नियमों की गलत व्याख्या और कटआफ डेट बढ़ा देने से उन लोगों को लाभ होगा जिस कैटेगरी में आते ही नहीं है। कटआफ डेट आगे बढ़ाक अयोग्य उम्मीदवारों को भी पात्र मान कर प्रवेश दे दिया है और आगे की उनकी कोशिशें जारी रहेंगी।

याचिका में इस बात की भी शिकायत की है कि जिम्मेदार अफसरों ने एक निजी उम्मीदवार को सेवारत श्रेणी में प्रमाणित किया है। जांच में सामने आया कि सेवा अवधि की गणना 31 जनवरी 2024 के बाद तक बढ़ा दी गई। यदि कटऑफ तारीख का पालन किया जाता, तो वह उम्मीदवार पात्र नहीं होता। कटआफ डेट बढ़ाने के पीछे अफसरों की मंशा साफ समझी जा सकती है।

एडवोकेट जनरल ने कहा: याचिकाकर्ता चिकित्सकों की शिकायत सही है

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता प्रफुल्ल भारत ने माना है कि याचिकाकर्ता चिकित्सकों की शिकायत प्रथम दृष्या सही प्रतीत हो रही है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने भी इस बात को गंभीरता से लिया है कि निजी उम्मीदवार को कटआफ तारीख के बाद सीट एलाट किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए डिवीजन बेंच ने एडमिशन के लिए होने वाली काउंसिलिंग पर रोक लगा दी है।

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