Social Media KYC: अब बिना ID के नहीं चलेगा अकाउंट? संसदीय समिति ने सोशल मीडिया और गेमिंग ऐप्स के लिए की बड़ी सिफारिश

Social Media KYC Verification: संसदीय समिति ने सोशल मीडिया, गेमिंग और डेटिंग ऐप्स के लिए KYC अनिवार्य करने की सिफारिश की है। फर्जी आईडी, साइबर अपराध और महिलाओं के खिलाफ ऑनलाइन उत्पीड़न रोकने के लिए यह कदम अहम माना जा रहा है, लेकिन प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।

Update: 2026-03-24 14:48 GMT

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Social Media KYC Verification: डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ते साइबर अपराध और महिलाओं के खिलाफ ऑनलाइन उत्पीड़न के मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार नए नियम ला सकती है। संसद की स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और डेटिंग ऐप्स के सभी यूजर्स के लिए KYC (Know Your Customer) अनिवार्य करने की सिफारिश की है। समिति का कहना है कि फर्जी आईडी से होने वाले अपराध रोकने के लिए यह जरूरी कदम है।

फेक प्रोफाइल पर रोक लगाने की कोशिश

रिपोर्ट में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर फर्जी और गुमनाम अकाउंट से गाली-गलौज, धोखाधड़ी और उत्पीड़न के मामले सामने आते हैं। ऐसे मामलों में आरोपी की पहचान करना मुश्किल होता है। समिति के अनुसार, KYC लागू होने पर यूजर्स की पहचान तय होगी और जरूरत पड़ने पर उन्हें ट्रेस करना आसान होगा। इससे प्लेटफॉर्म की जवाबदेही (एकाउंटेबिलिटी) भी तय होगी।

AI से बढ़ते खतरे, सख्ती की सिफारिश

समिति ने कहा है कि जेनरेटिव AI के बढ़ते इस्तेमाल से ऑनलाइन जोखिम बढ़ा है। साइबर स्टॉकिंग, बुलिंग और बिना अनुमति कंटेंट शेयर करने की घटनाएं सामने आ रही हैं। इनका असर महिलाओं और नाबालिगों पर ज्यादा पड़ता है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि टेक कंपनियां ऐसे सिस्टम लागू करें, जिससे नियम तोड़ने वाले यूजर्स की पहचान कर उन्हें ब्लॉक किया जा सके। शिकायतों के सेटलमेंट के लिए तेज सिस्टम बनाने की भी बात कही गई है।

गेमिंग और डेटिंग ऐप्स पर भी नजर

रिपोर्ट में ऑनलाइन गेमिंग और डेटिंग प्लेटफॉर्म के लिए लाइसेंसिंग और आयु सत्यापन अनिवार्य करने का सुझाव दिया गया है। समिति का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर नाबालिगों को अनुचित कंटेंट मिल सकता है। नियमों का पालन नहीं करने वाले प्लेटफॉर्म पर जुर्माना लगाने की भी सिफारिश की गई है। साथ ही निगरानी तंत्र मजबूत करने की जरूरत बताई गई है।

प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा पर सवाल

KYC अनिवार्य करने के प्रस्ताव पर प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि कंपनियों के पास यूजर्स का सरकारी डेटा रहने से डेटा लीक का खतरा बढ़ सकता है। जिन लोगों के पास पहचान पत्र नहीं है, उनके लिए प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल मुश्किल हो सकता है। फिलहाल यह सिफारिश है। सरकार इन सुझावों पर आगे फैसला लेगी।

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