हैरतअंगेज मामला :- प्राचार्य ने DPI के आदेश को कर दिया खारिज, 2018 में संविलियन हुए शिक्षक को पूरे 1 साल बाद 2019 से दिया संविलियन का लाभ…. शासन द्वारा जारी संविलियन आदेश को मानने से किया इनकार….कहा- मेरे हिसाब से नहीं हुआ है तुम्हारा संविलियन…. मामले की अब DPI से हुई शिकायत

Update: 2021-03-25 09:30 GMT

रायपुर 25 मार्च 2021। विभाग के सर्वोच्च अधिकारी के आदेश का पालन करने से यदि स्कूल में बैठा एक प्राचार्य इंकार कर दे तो सवाल खड़ा होता है कि क्या वाकई में स्कूल शिक्षा विभाग की व्यवस्था इतनी लचर हो गई है कि निचले स्तर के अधिकारी कर्मचारियों को अब किसी प्रकार की कार्यवाही का कोई डर ही नही है । बस्तर के बकावंड ब्लाक के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय करीतगांव से जो मामला निकल कर सामने आया है उससे तो कुछ ऐसा ही लगता है जहां पर स्कूल के प्राचार्य ने लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक द्वारा 2018 में जारी किए गए संविलियन आदेश को मानने से ही इंकार कर दिया और सीधे तौर पर आदेश की अवहेलना करते हुए शिक्षकों का संविलियन प्रोसेस ही नहीं किया विद्यालय में पदस्थ व्याख्याता राजेंद्र कलिहारी और रितेश देवांगन दोनों के ही मामले में ऐसा हुआ है कि विभाग द्वारा उनका संविलियन 2018 में किया गया किंतु प्राचार्य ने उनका संविलियन 2019 में किया है यही नहीं एक अन्य शिक्षिका चारु लता दीक्षित को भी उनके मिलने वाले एरियर्स राशि से वंचित कर दिया गया है । दरअसल निम्न से उच्च वर्ग में पदस्थापना का लाभ देते हुए विभाग द्वारा उपरोक्त टीचरों का संविलियन आदेश जारी किया गया था किंतु प्राचार्य द्वारा सीधे तौर पर इससे इनकार कर दिया गया और संविलियन आदेश जारी होने के बाद भी उन्होंने उनका संविलियन करने से इंकार कर दिया फल स्वरूप शिक्षकों को 1 साल तक पंचायत विभाग का ही वेतन मिलता रहा और अगले वर्ष जुलाई 2019 में उनका संविलियन प्राचार्य द्वारा किया गया ।

प्राचार्य के साथ बीईओ और जिला पंचायत सीईओ की भी भूमिका संदिग्ध !

इस मामले में जितना दोषी उस स्कूल के डीडीओ यानी प्राचार्य हैं उतने ही दोषी बीईओ और जिला पंचायत सीईओ भी हैं क्योंकि सभी शिक्षकों के संविलियन हेतु दस्तावेज और सूची उन्हीं के द्वारा भेजा जाता है और राज्य कार्यालय से संविलियन आदेश जारी होने के बाद उनका नाम पंचायत विभाग से हट जाना था लेकिन इसके बाद भी उन्हें पंचायत विभाग से वेतन भुगतान होता रहा और बीईओ और जिला पंचायत सीईओ ने इस पर ध्यान ही नहीं दिया यदि उन्होंने मामले पर ध्यान दिया होता तो उपरोक्त कर्मचारियों को पंचायत विभाग से वेतन भुगतान होता ही नहीं और उनकी आईडी विलोपित हो जाती लेकिन खुद ही जानकारी भेज कर दोनों यह भूल गए कि अब इन शिक्षकों को किसी भी स्थिति में पंचायत विभाग से वेतन भुगतान नहीं किया जा सकता ऐसे में बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि क्या दोषी केवल प्राचार्य है या फिर बीईओ और जिला पंचायत सीईओ भी ।

राज्य कार्यालय के संज्ञान में लाया है मामला – विवेक दुबे

इस पूरे मुद्दे पर सर्व शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विवेक दुबे का कहना है कि

“यह मामला हमारे संज्ञान में आया है और तीनों शिक्षकों को इसके फलस्वरूप आर्थिक और मानसिक रूप से समस्या का सामना करना पड़ा है, मामला अत्यंत गंभीर है क्योंकि यह सीधे तौर पर उच्च कार्यालय के आदेश की अवमानना है , प्राचार्य द्वारा अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए जानबूझकर शिक्षकों को परेशान किया गया है साथ ही बीईओ और जिला पंचायत सीईओ को भी शिक्षकों ने मामले की जानकारी दी थी इसके बावजूद उन्होंने अपनी तरफ से कोई पहल नहीं की और नियम विरुद्ध पंचायत विभाग से शिक्षकों को वेतन भुगतान करते रहे जबकि संविलियन के लिए सूची उपरोक्त दोनों कार्यालय द्वारा ही भेजी गई थी जब राज्य कार्यालय द्वारा संविलियन आदेश जारी हो गया था तो ऐसे में निम्न कार्यालय को लाभ से वंचित करने का अधिकार है ही नहीं । “

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