Vastu Tips For Married Women:महिलाओं को इस दिन भी नहीं धोना चाहिए बाल, रूठ जाते हैं देवी-देवता
Vastu Tips For Married Women: शास्त्रों के अनुसार, कुछ दिन ऐसे होते हैं जब महिलाओं को बाल धोने से बचना चाहिए. विशेष रूप से मंगलवार, गुरुवार और शनिवार के दिन बाल धोने से परिवार में नकारात्मकता का प्रभाव बढ़ सकता है. आइये जानते हैं क्या हैं बाल धोने को लेकर महिलाओं के लिए वास्तु टिप्स (Vastu Tips For Married Women)

Vastu Tips For Married Women: हिंदू धर्म में सप्ताह के हर दिन का विशेष महत्व है और इस दिन के अनुसार कई धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाता है. खासकर विवाहित महिलाएं(Vastu Tips For Married Women) कई प्रकार के नियमों और रिवाजों का पालन करती हैं, जो उनके जीवन की सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली से जुड़े होते हैं. इनमें से एक महत्वपूर्ण रिवाज बाल धोने से जुड़ा हुआ है.शास्त्रों के अनुसार, कुछ दिन ऐसे होते हैं जब महिलाओं को बाल धोने से बचना चाहिए. विशेष रूप से मंगलवार, गुरुवार और शनिवार के दिन बाल धोने से परिवार में नकारात्मकता का प्रभाव बढ़ सकता है. आइये जानते हैं क्या हैं बाल धोने को लेकर महिलाओं के लिए वास्तु टिप्स (Vastu Tips For Married Women)
1. मंगलवार – घर में सुख-समृद्धि की कमी
मंगलवार को बाल नहीं धोने की परंपरा कई परिवारों में सख्ती से निभाई जाती है. ज्योतिष के अनुसार, मंगलवार को बाल धोने से घर में सुख-समृद्धि कम हो सकती है. इस दिन बाल धोने से नकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है, जो परिवार के अंदर कलह और अशांति का कारण बन सकता है. विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए यह दिन बाल धोने के लिए अशुभ माना जाता है क्योंकि यह उनके पति की सेहत और परिवार की स्थिति पर नकारात्मक असर डाल सकता है.अगर किसी अविवाहित लड़की ने मंगलवार को बाल धो लिया तो इसका असर उसके भाई पर भी पड़ सकता है. माना जाता है कि इस दिन बाल धोने से घर में संघर्ष और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है.
2. गुरुवार – भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की नाराजगी
गुरुवार का दिन भगवान बृहस्पति और देवी लक्ष्मी से जुड़ा हुआ है. यह दिन खास तौर से धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. हिंदू धर्म में यह माना जाता है कि गुरुवार के दिन बाल धोने से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद चला जाता है, जिससे घर में दरिद्रता का वास होता है.गुरुवार को बाल धोने से आर्थिक तंगी और कर्ज का सामना भी करना पड़ सकता है. इसके अलावा, माना जाता है कि यह दिन घर में दुर्भाग्य और नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकता है. कई परिवारों में महिलाओं को गुरुवार को बाल धोने से सख्ती से मना किया जाता है, क्योंकि यह दिन शुभ नहीं माना जाता.
3. शनिवार – शनिदेव के नाराज होने का डर
शनिवार को बाल धोने को लेकर हिंदू धर्म में मिश्रित धारणाएं हैं. कुछ लोग मानते हैं कि इस दिन बाल धोना दुर्भाग्य का कारण बन सकता है. शनिदेव का दिन होने के कारण यह दिन विशेष रूप से सतर्क रहने का दिन होता है. शनिवार को बाल धोने से शनिदेव नाराज हो सकते हैं और परिवार में आर्थिक तंगी और कष्ट आ सकते हैं. यह मान्यता है कि शनिवार को बाल धोने से घर में बुरी किस्मत आ सकती है. हालांकि कुछ लोग मानते हैं कि इस दिन बाल धोने से साढ़े साती का प्रभाव कम हो सकता है, फिर भी ज्यादातर परिवार इस दिन बाल धोने से बचते हैं.
4. अमावस्या, पूर्णिमा और एकादशी – अशुभ फल
अमावस्या, पूर्णिमा और एकादशी के दिन भी महिलाओं को बाल धोने से बचना चाहिए. इन दिनों में बाल धोने से शास्त्रों के अनुसार अशुभ फल प्राप्त होते हैं. इन दिनों में शरीर से जुड़ी कोई भी क्रिया करना, जैसे बाल धोना, हानिकारक माना जाता है.
बाल धोने के लिए शुभ दिन
जहां कुछ दिन बाल धोने से बचने की सलाह दी जाती है, वहीं कुछ दिन ऐसे भी होते हैं जब बाल धोने से धन, समृद्धि और सौंदर्य में वृद्धि होती है.
1. बुधवार – धन की प्राप्ति और समृद्धि
बुधवार का दिन बाल धोने के लिए सबसे शुभ माना जाता है. इस दिन बाल धोने से घर में समृद्धि और धन की प्राप्ति होती है. महिलाएं इस दिन बाल धोने से उनके जीवन में स्थिरता और खुशहाली आती है. बुधवार का दिन धन और समृद्धि के लिए अनुकूल माना जाता है, और इस दिन बाल धोने से घर में शांति और सौभाग्य बना रहता है.
2. शुक्रवार – सौंदर्य और प्रेम में वृद्धि
शुक्रवार का दिन सौंदर्य और आकर्षण के लिए समर्पित माना जाता है. यह दिन विशेष रूप से महिलाओं के लिए बेहद शुभ है क्योंकि यह दिन प्रेम और समृद्धि का कारक है. अगर महिलाएं शुक्रवार को बाल धोती हैं तो उनकी सुंदरता बढ़ती है और उनके जीवन में धन और समृद्धि की वृद्धि होती है. यह दिन विशेष रूप से महिलाओं के लिए सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी का प्रिय दिन होता है.
ज्योतिष शास्त्र और परंपराएं
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि हिंदू धर्म में इन परंपराओं का पालन करने के पीछे वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों ही कारण होते हैं. सप्ताह के विभिन्न दिनों में विभिन्न ग्रहों का प्रभाव होता है, और इन ग्रहों के प्रभाव से बचने के लिए कुछ दिन विशेष रूप से धार्मिक दृष्टि से माने गए हैं.