हंसपुर हत्याकांड: आदिवासी किसान की हत्या, नेता प्रतिपक्ष डॉ महंत ने मानवाधिकार आयोग को लिखा पत्र, जांच की मांग
CG News: बलरामपुर के हंसपुर में SDM व गुर्गों की पिटाई से आदिवासी किसान के मौत मामले में नेता प्रतिपक्ष डॉ चरण दास महंत ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखकर जांच की मांग की है।
सरगुजा 19 फरवरी 2026, बलरामपुर के हंसपुर में SDM व गुर्गों की पिटाई से आदिवासी किसान के मौत मामले में नेता प्रतिपक्ष डॉ चरण दास महंत ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखकर जांच की मांग की है। पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने कहा, न्याय में देरी अन्याय के बराबर है। मामले में SDM एवं अन्य साथियों के खिलाफ हत्या का अपराध दर्ज कर जेल भेज दिया है। राज्य शासन ने एसडीएम को सस्पेंड कर दिया है।
क्या है मामला?
रविवार को हंसपुर में बाक्साइट के अवैध उत्खनन के विवाद पर कुसमी एसडीएम करूण डहरिया एवं गुर्गों ने तीन किसानों की पिटाई कर दी थी। इनमें एक आदिवासी किसान राम नरेश उरांव (60 वर्ष) की मौत हो गई थी। दो अन्य घायलों का इलाज कुसमी हॉस्पिटल में किया जा रहा है। हत्याकांड की जांच के लिए छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने जांच कमेटी भी बनाई है।
डॉ महंत ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को लिखा पत्र
छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने हत्याकांड की उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को पत्र लिखा है। डॉ महंत ने इस घटना को मानवता पर कलंक बताते हुए आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
डॉ महंत के पत्र में यह सब
डॉ. चरणदास महंत ने अपने पत्र में लिखा है कि हंसपुर गांव में एसडीएम स्तर के अधिकारी द्वारा की गई प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान कथित रूप से अत्यधिक बल प्रयोग किया गया, जिसके परिणामस्वरूप एक निर्दोष बुजुर्ग आदिवासी की मौत हो गई। यह घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और गंभीर है, जिससे पूरे क्षेत्र में आक्रोश की लहर है।
हंसपुर में बाक्साइट के अवैध उत्खनन के मिले सबूत
हंसपुर में बड़े पैमाने पर बाक्साइट के अवैध उत्खनन के सबूत मिले हैं। यहां मशीनें लगाकर जंगल में अवैध माइनिंग की जा रही थी। अवैध उत्खनन का ग्रामीण विरोध कर रहे थे, जो घटना की वजह बना।
चेन्नई से लौटने में देरी, अंतिम संस्कार में नहीं हो सके शामिल
हंसपुर में मारे गए ग्रामीण राम नरेश उरांव के शव का मंगलवार शाम अंतिम संस्कार कर दिया गया। उसके दो बेटे किशुन राम एवं संजय बुधवार रात वापस गांव पहुंचे। वे दोनों पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके। दोनों छह माह से काम करने चेन्नई गए थे। पिता की हत्या की सूचना पर दोनों वापस लौटे हैं।