Chhattisgarh News: आरक्षण की गेंद अब राज्यपाल के पाले मेंः सरकार ने राज्यपाल द्वारा विभागों से मांगी गई जानकारी राजभवन भेजी, राज्यपाल दौरे पर, सीएम भूपेश बोले, अब....

Update: 2022-12-25 09:02 GMT

CM Bhupesh Baghel,

रायपुर। छत्तीसगढ़ में आरक्षण की गेंद सरकार ने फिर से राज्यपाल के पाले में डाल दी है। राज्यपाल ने आरक्षण विधेयक को हरी झंडी देने से पहले सरकार से दस विंदुओं पर जानकारी मंगाई थी। हालांकि, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा था कि राज्यपाल को सीधे विभागों से जानकारी मांगने का अधिकार नही है। मगर अब सरकार ने राज्यपाल द्वारा मंगाई गई जानकारी राजभवन भेज दिया है। मुख्यमंत्री ने आज मीडिया से बात करते हुए कहा कि राज्यपाल ने जो जानकारी मांगी थी, उसे भेज दिया गया है। अब उन्हें अविलंब हस्ताक्षर कर देना चाहिए।

जाहिर है, आरक्षण को लेकर सरकार और राजभवन के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। कभी राजभवन सरकार के पाले में गेंद डालता है तो कभी सरकार राजभवन के पाले में। हालांकि, बिलासपुर हाई कोर्ट द्वारा आरक्षण पर स्टे समाप्त करने के बाद राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख अविलंब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर आरक्षण विधेयक पास करने कहा था। उन्होंने लिखा था कि आरक्षण कम होने से आदिवासियों का बड़ नुकसान हो रहा है। इसके बाद सरकार ने विशेष सत्र बुलाकर आरक्षण पास कर दिया। लेकिन, उसमें आदिवासियों को आरक्षण बढ़ाने के साथ ही ओबीसी का आरक्षण बड़ाकर 27 फीसदी हो गया। विधानसभा में पारित विधेयक जब हस्ताक्षर के लिए राजभवन गया तो राज्यपाल ने दस्तखत करने से पहले उन्होंने कुछ विंदुओ पर सरकार से जानकारी मंगा ली।

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राज्यपाल का बयान भी आया कि उन्होंने आदिवासियों का आरक्षण बढ़ाने कहा था, सरकार ने ओबीसी का आरक्षण भी बढ़ा दिया। अब सरकार ने राजभवन को जानकरी भेज दी है। राज्यपाल आज बिलासपुर के दौरे पर हैं। एनपीजी को राज्यपाल के विशेष सहायक ने बताया कि मैडम बिलासपुर के दौरे पर हैं। सरकार से क्या जानकारी आई है, इसके बारे में अभी कुछ पता नहीं है। उधर, मुख्यमंत्री के इस बयान पर कि जानकारी भेज दी गई है, राज्यपाल अविलंब इस पर हस्ताक्षर कर देंं, पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि सरकार को इसका भी जवाब देनी चाहिए कि राज्यपाल ने किन विंदुओं पर क्या जानकारी मंगाई है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल अपने विवेक से इस पर निर्णय लेंगी।

छत्तीसगढ़ में आरक्षण को लेकर बनी असमंजस की स्थिति को लेकर अब आदिवासी समाज में दो फाड़ की स्थिति बन गई है। समाज का एक धड़ा राज्यपाल के पक्ष में है। सर्व आदिवासी समाज के इस धड़े ने राज्य सरकार से आदिवासी आरक्षण के संबंध में नए सिरे से अध्यादेश या विधेयक लाने की मांग की है, जबकि दूसरे धड़े ने 27 दिसंबर को राजभवन घेराव का ऐलान किया है। दोनों ने ही धड़ों ने एक-दूसरे को गलत ठहराया है।

आरक्षण के संबंध में हाईकोर्ट के फैसले के बाद फिलहाल राज्य में आरक्षण का नया रोस्टर लागू नहीं है। सामान्य प्रशासन विभाग ने भी सूचना का अधिकार के तहत दिए गए एक जवाब में इसे स्वीकार किया है। अब आदिवासी सहित अन्य समाज के लोगों की नजर राज्यपाल की ओर है। राज्यपाल अनुसुइया उइके जब संशोधन विधेयक में दस्तखत करेंगी तो आरक्षण लागू हो पाएगा। फिलहाल राज्यपाल ने राज्य सरकार से दस बिंदुओं पर जवाब मांगा है।

इधर, छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के युवा प्रभाग के प्रदेश अध्यक्ष कुंदन सिंह ठाकुर के नाम से एक पत्र जारी हुआ है। इस पत्र में 27 दिसंबर को राजभवन के घेराव का आह्वान किया गया है। पत्र में लिखा है, "जैसा कि हम सब आदिवासी समाज जानते हैं कि महामहिम रजायपाल ने आश्वस्त किया था कि 32 प्रतिशत आरक्षण विधेयक जैसे ही विधानसभा में पास होगा, वैसे ही वे तुरंत हस्ताक्षर कर देंगी। आज 22 दिन बाद भी राज्यपाल ने हस्ताक्षर नहीं किया है। इससे समाज आहत और उद्वेलित है। आदिवासी समाज इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। राज्यपाल के हस्ताक्षर की मांग को लेकर 27 दिसंबर को सुबह 11 बजे से राजभवन घेराव का कार्यक्रम आयोजित है।"

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