CG पहले CM की कहानी: विद्या, श्यामा, वोरा, महंत और शर्मा को पीछे छोड़ जोगी बन गए थे छत्तीसगढ़ के 'महंत', और फटा CM का कुर्ता

छत्तीसगढ़ में पांचवीं बार विधानसभा चुनाव होने जा रहा है. ऐसे समय में पढ़ें पहले मुख्यमंत्री के चयन और एक सीएम का कुर्ता फटने का किस्सा...

Update: 2023-10-05 12:25 GMT

Chhattisgarh Assembly Election 2023

रायपुर. 14 जनवरी 1998... यह वह तारीख थी, जब तत्कालीन पीएम भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने पृथक छत्तीसगढ़ राज्य बनाने का ऐलान किया था. 25 जुलाई 2000, वह तारीख जब लोकसभा में पृथक छत्तीसगढ़ राज्य के लिए विधेयक प्रस्तुत हुआ. 31 जुलाई 2000 को लोकसभा में विधेयक पारित हो गया. इसके बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में जो सबसे बड़ी तारीख है, वह 31 अक्टूबर 2000 है. वैसे छत्तीसगढ़ के लिए एक नवंबर 2000 ही सबसे यादगार तारीख है, जब छत्तीसगढ़ राज्य अस्तित्व में आया. आज बात 31 अक्टूबर 2000 की. यह वह तारीख थी, जब सीएम के रूप में अजीत जोगी के नाम का ऐलान हुआ था. इसी तारीख को मध्यप्रदेश के तत्कालीन सीएम दिग्विजय सिंह के साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के निवास राधेश्याम भवन में बदसलूकी हुई थी. उनकी जेब फट गई थी.


यही वह तारीख है, जिसमें पृथक छत्तीसगढ़ राज्य गठन के लिए लड़ाई लड़ने वाले विद्याचरण शुक्ल, सीएम बनने से चूक गए थे. शुक्ल जिन्हें उनके समर्थक विद्या भैया के नाम से पुकारते थे, उन्हें ही सीएम का प्रबल दावेदार माना जा रहा था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. वैसे दावेदारों में विद्याचरण के बड़े भाई श्यामाचरण शुक्ल और मोतीलाल वोरा भी थे. दोनों मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके थे, इसलिए विद्याचरण की दावेदारी सबसे मजबूत थी. इसके अलावा दो नाम और महत्वपूर्ण हैं. एक डॉ. चरणदास महंत और दूसरे सत्यनारायण शर्मा. अविभाजित मध्यप्रदेश में कोई भी मुख्यमंत्री हो, छत्तीसगढ़ के लिए ये बड़े नाम थे. दिग्विजय सिंह की सरकार में डॉ. महंत गृह व आबकारी मंत्री थे तो सत्यनारायण शर्मा, शिक्षा, सहकारिता मंत्री रहे. हालांकि कांग्रेस ने आदिवासी बहुल छत्तीसगढ़ में आदिवासी मुख्यमंत्री के रूप में पूर्व ब्यूरोक्रेट जोगी का नाम आगे किया. उनके नाम का ऐलान करने के लिए गुलाम नबी आजाद, प्रभा राव और मध्यप्रदेश के तत्कालीन सीएम दिग्विजय सिंह छत्तीसगढ़ आए थे. जोगी के नाम का ऐलान करने के बाद जब उन्हें विद्याचरण की नाराजगी का पता चला तो वे उनसे मिलने के लिए उनके निवास गए थे, जहां उनके साथ बदसलूकी हुई थी.


छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट गोकुल सोनी सोशल मीडिया पर लिखते हैं, "पृथक छत्तीसगढ़ राज्य की मांग को लेकर विद्याचरण जी ने अपने हजारों-हजारों समर्थकों के साथ जेल भरो आंदोलन किया था. वे निश्चिंत थे कि वे ही छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बनेंगे. पहुना में गुलाम नबी आजाद सहित दिग्गज नेता बैठे थे, तभी अचानक हाईकमान के आदेश पर अजीत जोगी जी छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री बना दिए गए. सब कुछ होने के बाद जब दिग्विजय सिंह जी विद्याचरण जी से सौजन्य मुलाकात करने उनके निवास राधेश्याम भवन गए थे, जहां आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने दिग्विजय सिंह जी के साथ काफी दुर्व्यवहार किया. यहां तक कि उनका कुर्ता भी फट गया. पत्रकारों के पूछने पर दिग्विजय सिंह जी आखिरी तक नकारते रहे कि विद्याचरण जी के घर उनके साथ कुछ भी नहीं हुआ. जब उनसे कुर्ता फटने का कारण पूछा गया तो राजनीति के महारथी दिग्विजय सिंह जी पत्रकारों के सवाल में फंस गए और उनके मुंह से निकल गया कि जिनके घर में ये सब हुआ है, उन्हीं से पूछ लो. सभी को समझते देर नहीं लगी कि कुछ हुआ है.'


वरिष्ठ पत्रकार और दैनिक भास्कर के संपादक रहे दिवाकर मुक्तिबोध अपने लेखों के संग्रह पर प्रकाशित किताब इस राह से गुजरते हुए में लिखते हैं, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के फार्म हाउस में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के साथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा की गई ज्यादती शर्मनाक, खेदजनक एवं चिंताकारक है. यह घटना वर्तमान राजनीति में व्याप्त उन संकटों का भी प्रतिबिंब है, जिसने उसे हद दर्जे तक विद्रूप बना रखा है. यह घटना और भी दुखदायी इसलिए हो जाती है, क्योंकि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण की ऐतिहासिक एवं खुशनुमा बेला में एक राजकीय अतिथि के साथ राजनीति के कुछ सिरफिरे लोगों ने ऐसा सलूक किया. छत्तीसगढ़ की यह परंपरा कभी नहीं रही. मेहमानों को उसने हमेशा सिर आंखों पर बैैठाया है. (तस्वीरें साभार गोकुल सोनी)


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