CG Congress Politics: बघेल के उत्तर छत्तीसगढ़ दौर से कांग्रेस में मची खलबली, असहज हो रहे सिंहदेव समर्थक, वाट्सएप ग्रुप में दिखने लगी तल्खी

CG Congress Politics: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री व अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव भूपेश बघेल के हाल के दिनों में उत्तर छत्तीसगढ़ के राजनीतिक प्रवास ने सरगुजा के गुटीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव समर्थक असहज होने लगे हैं। वाट्सएप ग्रुप में चल रहे कमेंट्स और तल्खी से तो यही लगता है कि पूर्व सीएम के दौरे ने उत्तर छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।

Update: 2026-01-03 08:13 GMT

CG Congress Politics: सरगुजा। उत्तर छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों पूर्व सीएम व एआईसीसी के महासचिव भूपेश बघेल सुर्खियों में बने हुए हैं। प्रवास से वे लौट गए हैं, चर्चा अब भी हो रही है। पूर्व सीएम के सियासी प्रवास से सबसे ज्यादा असहज टीएस सिंहदेव समर्थकों में देखी जा रही है। जिस दिन बघेल अंबिकापुर पहुंचे थे,उसी दिन गुटीय राजनीति की बड़ी तस्वीर सामने आई थी। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष से लेकर पदाधिकारी व सिंहदेव से जुड़े नामचीन चेहरे नदारद रहे। बघेल एआईसीसी के महासचिव की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। राष्ट्रीय पदाधिकारी के प्रवास के दौरान राजनीतिक शिष्टाचार ही सही,गुटीय राजनीति से परे हटकर सिंहदेव समर्थकों को अपनी उपस्थिति दर्ज करानी थी। पर यह भी नहीं हो पाया। गुटीय राजनीति से परे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को सिंहदेव समर्थकों की यह दूरी अब भी खटक रही है।


समर्थकों से मेल मुलाकात, सूरजपुर में नवनियुक्त जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष के शपथ ग्रहण समारोह के बहाने पूर्व सीएम व एआईसीसी के महासचिव भूपेश बघेल ने उत्तर छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल मचाने के साथ ही सेंध भी लगा दिया है। पूर्व खाद्य मंत्री अमरजीत भगत की राजनीतिक प्रतिबद्धता पूर्व सीएम के साथ ही है। कांग्रेस शासनकाल में उत्तर छत्तीसगढ़ की राजनीति में भगत के सियासी वर्चस्व की चर्चा तब भी हुआ करती थी और आज भी समर्थक इस बात की चर्चा करते ही हैं। भगत और टीएस सिंहदेव समर्थकों के बीच छत्तीस का आंकड़ा है। सरगुजा कांग्रेस की सियासत में भगत और सिंहदेव दो विपरीत ध्रुव माने जाते हैं। जाहिर सी बात है, समर्थकों की टीम के साथ ही प्रतिबद्ध कार्यकर्ताओं की अच्छी खासी संख्या भी है। इसका असर बघेल के सरगुजा दौरे के दौरान नजर भी आया। अंबिकापुर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सहित पदाधिकारियों व सिंहदेव समर्थकों की दूरी के बाद भी अंबिकापुर में बघेल का आतिशी स्वागत सत्कार किया गया। सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर स्वागत सत्कार का फोटो वीडियो अब भी वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर बने माहौल से अब सिंहदेव समर्थकों की तल्खी बढ़ने लगी है। यही तल्खी अब वाट्सएप ग्रुप के जरिए बाहर आने लगी है।



सरगुजा में दो वाट्सएप ग्रुप, जानिए क्या चल रहा

सरगुजा में कांग्रेस की राजनीति का संचालन वाट्सएप ग्रुुप के जरिए होता है। एक सरगुजा कांग्रेस और दूसरा महाराज की कांग्रेस। महाराज की कांग्रेस में उनके समर्थकों के अलावा जिला व शहर कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों की मौजूदगी। बघेल के सरगुजा दौरे के बाद महाराज की कांग्रेस वाट्सएप ग्रुप में हलचल के साथ ही समर्थकों की सक्रियता कुछ ज्यादा ही देखी जा रही है। वाट्सएप ग्रुप की बातें अब पब्लिक डोमेन में तो आ ही रही है, स्क्रीनशॉट के जरिए अलग-अलग वाट्सएप ग्रुपों में भी शेयर हाेने लगी है।


वाट्सएप ग्रुप से निकाल बाहर करने होने लगी चर्चा

पूर्व सीएम के दौरे के दौरान जिन लोगों ने स्वागत सत्कार में बढ़चढ़कर हिस्सा लिया वे सीधेतौर पर सिंहदेव समर्थकों के टारगेट पर हैं। सोशल मीडिया में चल रहे वीडियो फोटो में जो लोग दिख रहे हैं और महाराज की कांग्रेस ग्रुप से जुड़े हुए हैं,उनको अब ग्रुप से बाहर करने की बात होने लगी है। ग्रुप से जुड़े समर्थक खुलकर नाराजगी भी जता रहे हें।



अंबिकापुर में तब बढ़ी थी सियासी हलचल

पूर्व सीएम भूपेश बघेल अंबिकापुर प्रवास के दौरान यूथ कांग्रेस के नितिश ताम्रकार, पूर्व खाद्य मंत्री अमरजीत भगत, शफी अहमद, खाद्य आयोग के पूर्व अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह बावरा के घर गए थे। शफी अहमद की बेटी की शादी में वे शामिल नहीं हो पाए थे, उनके घर गए व भोजन किया। शफी अहमद भटगांव विधानसभा से टिकट के दावेदार थे। टिकट ना मिलने के कारण वे नाराज चल रहे थे। पूर्व सीएम उनके घर पहुंचकर उनकी नाराजगी दूर करने में भी काफी हद तक सफल रहे। अंबिकापुर में उनकी सियासी सक्रियता ने सिंहदेव समर्थकों को अहसज कर दिया है। अंबिकापुर में रात्रि विश्राम के बाद दूसरे सूरजपुर पहुंचे। पूर्व मंत्री तुलेश्वर सिंह की बेटी शशि सिंह को जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है। पूर्व सीएम उनके शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। वहां से मनेंद्रगढ़ रवाना हो गए थे। अमरकंटक होते हुए वापस लौटे।

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