Supreme Court News: जमानत याचिका में अब देनी होगी ये जानकारी, सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के हाई कोर्ट को जारी किया निर्देश, इन शर्तों को किया अनिवार्य
Supreme Court News: एक जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के हाई कोर्ट को निर्देश जारी करते हुए जमानत याचिका में इन जरुरी बातों का उल्लेख करने को अनिवार्य किया है।
सोर्स- इंटरनेट, एडिट- npg.news
Supreme Court News: दिल्ली। एक जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के हाई कोर्ट को निर्देश जारी करते हुए जमानत याचिका में इन जरुरी बातों का उल्लेख करने को अनिवार्य किया है। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के हाई कोर्ट से कहा है, अपने नियम बनाने की शक्ति के तहत उपयुक्त प्रशासनिक निर्देश जारी करें या अपने नियमों में आवश्यक प्रावधान जोड़ें, ताकि जमानत आदेशों में इन जानकारियों का स्पष्ट उल्लेख हो।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की डिवीजन बेंच ने यह निर्देश उस मामले में दिए, जिसमें एक व्यक्ति को फर्जी एलएलबी डिग्री हासिल करने और जाली डिग्रियों का रैकेट चलाने के आरोपी को हाई कोर्ट ने जमानत दे दी थी, हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है।
जमानत याचिका में ये जानकारी देना अनिवार्य
FIR नंबर और तारीख, संबंधित थाना, जांच एजेंसी द्वारा लगाई गई धाराएं, आरोपित अपराधों की अधिकतम सजा, गिरफ्तारी की तारीख और अब तक की हिरासत की अवधि, मुकदमे की वर्तमान स्थिति, प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं के पालन का विवरण, आरोपी का आपराधिक इतिहास (यदि कोई हो), पहले दायर की गई जमानत अर्ज़ियों का विवरण व उनकी स्थिति।
क्या है मामला
इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा मजहर खान नामक व्यक्ति को दी गई जमानत से जुड़ा है। आरोप है कि उसने सर्वोदय ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन से फर्जी एलएलबी डिग्री हासिल की। एलएलबी, एलएलएम व पीएचडी जैसी डिग्रियों का उल्लेख करते हुए विज़िटिंग कार्ड छपवाए। FIR में यह भी आरोप लगाया गया है, वह जाली डिग्रियां उपलब्ध कराने का नेटवर्क चला रहा था।
हाई कोर्ट में आरोपी ने दावा किया कि उसकी डिग्री असली है और वैध रूप से जारी की गई। उसने यह भी कहा कि उसके खिलाफ लगाए गए आरोप झूठे हैं और यह मामला संपत्ति विवाद के कारण उसकी भाभी द्वारा दर्ज कराया गया। राज्य सरकार और शिकायतकर्ता ने जमानत का विरोध किया।
मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने यह कहते हुए जमानत दे दी थी, साक्ष्यों से छेड़छाड़ की संभावना का कोई ठोस आधार नहीं है। हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर जमानत आदेश को रद्द करने की मांग की थी। मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए जमानत याचिका के साथ जरुरी बातों का उल्लेख करने का निर्देश जारी कर दिया