इनसाइड स्टोरी एयर इंडियाः कराची से मुंबई तक सिंगल इंजन हवाई जहाज उड़ाकर जेआरडी ने की थी टाटा एयरलाइंस की स्थापना; ऐसा लगाव की खिड़कियों के पर्दे भी खुद चुनते थे
नई दिल्ली, 2 अक्टूबर 2021। 68 साल बाद देश की नामी टाटा कंपनी फिर से एअर इंडिया का संचालन करेगी। हालांकि, सरकार ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है मगर मीडिया रिपोर्ट में ऐसी खबरें आ रही है कि एअर इंडिया के लिए टाटा ने सबसे बड़ी बोली लगाई है। टाटा के बाद स्पाइस जेट की बोली थी, लेकिन टाटा ने बाजी मार ली। केंद्र सरकार ने टाटा की बोली मंजूर कर ली है।
1953 में केंद्र सरकार ने 9 कंपनियों का राष्ट्रीयकरण किया था, जिसमें टाटा एयरलाइंस भी शामिल थी। आइए जानते हैं कि उन रोचक किस्सों के बारे में, जिसमें टाटा एयरलाइंस की स्थापना हुई और बाद में एअर इंडिया के रूप में विलय हुआ…
जेआरडी टाटा ने 1932 में टाटा एयरलाइंस की स्थापना की थी। उन्होंने खुद एक सिंगल इंजन हवाई जहाज के जरिए डाक सेवा को कराची से मुंबई तक उड़ाकर टाटा एयरलाइन की शुरुआत की थी। सरकार ने जब 9 एयरलाइंस कंपनियों का राष्ट्रीयकरण किया, तब टाटा को बड़ा धक्का लगा था। हालांकि उन्हें एअर इंडिया का अध्यक्ष बनाया गया था। हरीश भाट की किताब टाटा लोग (ज्ंजं स्व्ळ) के मुताबिक जेआरडी के नेहरू परिवार के काफी नजदीकी रिश्ते थे, लेकिन जेआरडी को उनके समाजवादी आर्थिक मॉडल से आपत्ति थी। एयर इंडिया की कामयाबी के लिए जेआरडी ने दिन-रात मेहनत की थी। एयर इंडिया को अलग पहचान दिलाने के लिए जेआरडी की कामकाज में इतनी दिलचस्पी होती थी कि वे एयरलाइन की खिड़कियों के परदे चुनने के लिए भी खुद जाते थे। ’द टाटाजः हाउ ए फैमिली बिल्ट ए बिजनेस एंड नेशन’ किताब के मुताबिक एक बार जेआरडी ने एअर इंडिया के प्रबंध निदेशक केसी बाखले को पत्र लिखा था। इस पत्र में लिखा था कि अगर आप खाने में अधिक अल्कोहल वाली बीयर परोसते हैं तो पेट भारी हो जाता है। इसलिए हल्की बीयर परोसिए। मैंने नोट किया है कि हमारे जहाजों की कुर्सियां ढंग से पीछे नहीं मुड़ती है। कृपया उन्हें ठीक करवाइए। ये भी सुनिश्चित करिए कि जब भोजन परोसा जाए तो विमान की सभी लाइट्स ऑन रहें ताकि हमारी कटलरी उनकी रोशन में चमक उठे।
समय की ऐसी पाबंदी कि लोग घड़ी देखने के बजाय एअर इंडिया की फ्लाइट देखकर समय बताते थे
जेआरडी के बारे में कई किस्से मशहूर हैं। द टाटाजः हाउ ए फैमिली बिल्ट ए बिजनेस एंड नेशन किताब के लेखक गिरीश कुबेर लिखते हैं कि जेआरडी को पता था कि वे पैसा खर्च करने के मामले में विदेशी एयरलाइंस का मुकाबले नहीं कर सकते, इसलिए उनका जोर हमेशा सर्विस और समय की पाबंदी पर रहता था। इस बारे में एक दिलचस्प किस्सा यूरोप में एयर इंडिया के रीजनल डायरेक्टर रहे नारी दस्तूर सुनाया करते थे। उस जमाने में दिन में ग्यारह बजे एयर इंडिया की फ्लाइट जिनेवा में लैंड करती थी। एक बार उन्होंने एक स्विस व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति से समय पूछते सुना। उस शख्स ने खिड़की के बाहर जवाब दिया, ग्यारह बज चुके हैं। पहले व्यक्ति ने पूछा तुम्हें कैसे पता? तुमने घड़ी की तरफ तो देखा ही नहीं। जवाब आया एयर इंडिया के विमान ने अभी अभी लैंड किया है।
इंदिरा से बढ़ी तल्खी, लेकिन बने रहे एअर इंडिया में, मोरारजी देसाई ने निकाला था बाहर
नेहरू परिवार से करीबी संबंध होने के कारण शुरुआत में इंदिरा गांधी और जेआरडी के संबंध काफी अच्छे थे। जैसे-जैसे इंदिरा का झुकाव समाजवाद की तरफ होने लगा, उनके और जेआरडी के संबंधों में दूरी आ गई। उन पर लिखी गई किताबों के मुताबिक जब जेआरडी मिलने के लिए जाते तो इंदिरा गांधी या तो खिड़की के बाहर देखने लगती या अपनी डाक खोलने लग जातीं। हालांकि इंदिरा का जेआरडी से भले ही वैचारिक विरोध रहा हो, लेकिन उन्हें हमेशा एअर इंडिया से जुड़ा रहने दिया। इंदिरा गांधी के बाद प्रधानमंत्री बने मोरारजी देसाई ने जेआरडी को एअर इंडिया से निकाला था। जेआरडी को एयर इंडिया से निकाले जाने की भी कोई सूचना नहीं दी। जेआरडी को एयर इंडिया से निकाले जाने की खबर पीसी लाल ने दी जिन्हें एयर इंडिया का अध्यक्ष बनाया गया था।