Exclusive: छत्तीसगढ़ की ई-रजिस्ट्री में सेंध….रजिस्ट्रार के आईडी, पासवर्ड पर हाथ साफ कर प्रायवेट कंपनी के कंप्यूटर ऑपरेटर ने जमीनों की कई फर्जी रजिस्ट्री कर डाली, कलेक्टर ने की जांच टीम गठित, आईजी बोलीं…कार्रवाई होगी

Update: 2021-08-13 08:57 GMT

Θ छत्तीसगढ़ की रजिस्ट्री की सुरक्षा और विश्वसनीयता दांव पर, झारखंड की कंपनी को झारखंड सरकार ने ठेका निरस्त कर दिया, छत्तीसगढ़ में फिर एक्सटेंशन मिल गया

Θ इतनी बड़ी धोखाधड़ी के बाद भी पंजीयन विभाग ने 17 दिन बाद कोई कार्रवाई नहीं की

 

छत्तीसगढ़ में प्रायवेट कंपनी के हाथों में जमीनों की रजिस्ट्री का ठेका देने के पीछे जो आशंका थी, वह सही निकली। कंपनी के आपरेटर ने बड़ा खेल करते हुए मनेंद्रगढ़ में कई फर्जी रजिस्ट्री कर डाली। मनेंद्रगढ़ की घटना तो एक बानगी है, छत्तीसगढ़ में अगर जांच हो जाए, तो फर्जी रजिस्ट्री के ऐसे सैकड़ों मामले निकल सकते हैं। इस कांड से रजिस्ट्री की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है।

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रायपुर/मनेंद्रगढ़, 13 अगस्त 2021। छत्तीसगढ़ की ई-रजिस्ट्री में ऐसा सेंध लगा है, जो देश में कहीं नहीं हुआ….मनेद्रगढ़ में जमीनों की रजिस्ट्री करने वाली प्रायवेट कंपनी के कंप्यूटर ऑपरेटर ने रजिस्ट्रार के पासवर्ड और आईडी से कई फर्जी रजिस्ट्री कर डाला। मामले का भंडाफोड़ तब हुआ, जब प्रभारी रजिस्ट्री अधिकारी और डिप्टी कलेक्टर उत्तम रजक को किसी ने इसकी शिकायत की। उन्होंने जांच कराई तो आवाक रह गए….पता चला सिर्फ जून में सात रजिस्ट्री बिना उनके हस्ताक्षर के हो गए। उन्होंने मनेंद्रगढ़़ के डिप्टी रजिस्ट्रार को पत्र लिख इस मामले में कार्रवाई करने कहा है। इस मामले में कोरिया कलेक्टर श्याम धावड़े ने जांच के लिए टीम गठित कर दी है। वहीं, आईजी पंजीयन इफ्फत आरा ने एनपीजी न्यूज से बात करते हुए हैरानी जताई कि ऐसा हो कैसे गया…अगर ऐसा हुआ होगा तो कार्रवाई होगी…मैं तुरंत डिप्टी रजिस्ट्रार से बात करती हूं। वहीं, पंजीयन विभाग के सिकरेट्री निरंजन दास से बात करने की कोशिश की गई मगर उनका मोबाइल कनेक्ट नहीं हो पाया।
डिप्टी कलेक्टर उत्तम रजक ने सातों फर्जी रजिस्ट्री का टोकन नम्बर, तारीख और टाईम के साथ पूरा डिटेल भेजकर कहा है कि परीक्षण से स्पष्ट है कि मेरे पासवर्ड, आईडी और हस्ताक्षर का अनाधिकृत उपयोग कर जमीनों की रजिस्ट्री की गई है। लिहाजा आवश्यक कार्यवाही की जाए। उत्तम जून में कोरिया में पोस्टेड थे। रजिस्ट्रार का उनके पास अतिरिक्त प्रभार था। उसी समय इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया। उत्तम का अभी सूरजपुर ट्रांसफर हो गया है। अफसरों का कहना है, कि ये तो सिर्फ जून महीने का परीक्षण किया गया है, अगर छत्तीसगढ़ के रजिस्ट्री आफिसों की जांच की जाए तो बड़ी धोखाधड़ी का खुलासा होगा।

लीपापोती क्यों

डिप्टी कलेक्टर के 27 जुलाई के पत्र के बाद पंजीयन विभाग को फौरन हरकत में आते हुए सबसे पहले कंपनी के आपरेटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराना था। लेकिन, 17 दिन बाद भी पंजीयन विभाग ने अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है। पता चला है कंपनी को बचाने इस मामले पर पर्दा डालने की कोशिशें शुरू हो गई है।

फर्जीवाड़ा कैसे हुआ?

दरअसल, छत्तीसगढ़ के समूचे रजिस्ट्री आफिस ठेका में है। ठेका कंपनी सभी आफिसों में अपने कंप्यूटर आपरेटर तैनात किए हैं। ऑपरेटरों द्वारा ही रजिस्ट्री के लिए टोकन जारी किए जाते हैं। उनके पास रजिस्ट्री अधिकारियों के पासवर्ड और आईडी होते हैं। साथ में डिजिटल सिगनेचर भी। सूत्रों को कहना है, रजिस्ट्रारों को आईटी का उतना ज्ञान होता नहीं, सो आईडी, पासवर्ड वे कंप्यूटर ऑपरेटरों को दे देते हैं। इसी का फायदा उठाकर ठेका कंपनी के कंप्यूटर ऑपरेटर फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहे हैं।

रांची की आईटी कंपनी

2106 में जब रांची की आईटी सौल्यूशन कंपनी को जब छत्तीसगढ़ के रजिस्ट्री आफिसों का कंप्यूटरीकरण और नेटवर्किंग का काम सौंपा गया था, तो इसका काफी विरोध हुआ था। लेकिन, तब बिना किसी सुनवाई के कंपनी के हाथों में रजिस्ट्री सिस्टम सौंप दिया गया। इस कंपनी को झारखंड में भी रजिस्ट्री का काम मिला था। मगर बाद में सरकार ने उसे निरस्त कर दिया। लेकिन, छत्तीसगढ़ में इस कंपनी पर इतनी मेहरबानी बरती जा रही कि फिर से उसका एक्सटेंशन कर दिया गया है।

सीएजी ने उठाए गंभीर सवाल

रजिस्ट्री की ठेका कंपनी के खिलाफ सीएजी ने गंभीर सवाल उठाते हुए अपनी रिपोर्ट में कहा है सुरक्षा और विश्वसनीयता को लेकर कंपनी का नेटवर्किंग काफी खराब है। एकाउंट जनरल दिनेश रायभानजी पाटील ने विधानसभा में पेश अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि कंपनी के पास कोई प्रभावी सिस्टम नहीं है। कंपनी ने आज तक सिस्टम डिजाइन दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया हे।

लोगों से वसूली

करार के अनुसार कंपनी को प्रति पेज 45.50 रुपए लेना था। लेकिन कंपनी यहां जीएसटी मिलाकर प्रति पेज 60 रुपए वसूल रही। उसमें कायदे से स्टाम्प पेपर की गिनती नहीं होनी चाहिए। क्योंकि उसे आम आदमी खरीदती है। उसमें ठेका कंपनी का कोई रोल नहीं होता। लेकिन, कंपनी स्टांप को भी गिनकर चार्ज कर रही।

मोटा कमीशन?

सवाल उठता है, छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य बनने के बाद 20 साल में अपना रजिस्ट्री सिस्टम क्यों नहीं डेवलप कर पाया। जब आईएएस आलोक शुक्ला हफ्ते भर में पीडीएस का नेटवर्क तैयार करवा दिए तो रजिस्ट्री विभाग के अधिकारी ऐसा क्यों नहीं करते। जवाब मिलेगा जब मोटा कमीशन मिलेगा तो अपना साफ्टवेयर क्यों बनाया जाए।

बीओटी पर काम तो….

सरकार ने आईटी सौल्यूशन को बीओटी पर रजिस्ट्री पर काम दिया था। ताकि, काम हो जाने के बाद अपना सेटअप रजिस्ट्री विभाग के हवाले कर देगा। अब जब फिर से उसे एक्सटेंशन दे दिया गया है तो पुराना रेट क्यों। बीओटी के तहत कंपनी का पूरा सिस्टम अब रजिस्ट्री का हो गया है। कंपनी अगर उसका इस्तेमाल कर रही है तो रजिस्ट्री विभाग को कायदे से रजिस्ट्री का रेट कम कर छत्तीसगढ़ के लोगों को इसका लाभ दिलाना था। लेकिन, अफसरों ने ऐसा किया नहीं। पुराने रेट पर ही कंपनी को एक्सटेंशन दे दिया। याने जितना लूट सको छत्तीसगढ़ को लूट लो और हमें भी हिस्सा दो।

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