Tamnar Mob Lynching Case : मानवता शर्मसार : आदिवासी महिला पुलिसकर्मी को निर्वस्त्र कर सरेराह पीटा

Tamnar Mob Lynching Case : छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार से एक ऐसी खबर आई है जिसने मानवता और मानवाधिकारों को तार-तार कर दिया है।

Update: 2026-01-03 05:01 GMT

Tamnar Mob Lynching Case : मानवता शर्मसार : आदिवासी महिला पुलिसकर्मी को निर्वस्त्र कर सरेराह पीटा

Tamnar Mob Lynching Case : रायगढ़ : छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार से एक ऐसी खबर आई है जिसने मानवता और मानवाधिकारों को तार-तार कर दिया है। यहाँ एक आदिवासी महिला पुलिसकर्मी को भीड़ ने न केवल अपनी बर्बरता का निशाना बनाया, बल्कि उसके कपड़े फाड़कर उसे सरेराह निर्वस्त्र कर लात-जूतों से बुरी तरह पीटा। यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि उस छत्तीसगढ़ी अस्मिता पर गहरा प्रहार है जो 'महतारी' के सम्मान की दुहाई देती है।

Tamnar Mob Lynching Case : चुप्पी का दोहरा मापदंड और सामाजिक उदासीनता इस वीभत्स घटना पर सबसे अधिक विचलित करने वाली बात समाज और सोशल मीडिया इन्फ्लूएंजर्स की अजीब चुप्पी है। मानवाधिकारों की बात करने वाले संगठन और हर मुद्दे पर सक्रिय रहने वाले कार्यकर्ता इस मामले में मौन साधे हुए हैं। क्या इस चुप्पी का कारण यह है कि पीड़ित महिला एक पुलिसकर्मी थी? या फिर इसलिए कि हमलावर एक विशेष सामाजिक समीकरण से ताल्लुक रखते हैं? यदि अपराध करने वालों की पृष्ठभूमि कुछ और होती, तो शायद अब तक यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार उल्लंघन का बड़ा मुद्दा बन चुका होता।

राजनीतिक शुचिता या संवेदनाओं की हत्या? आज हर कोई खुद को सामाजिक और राजनीतिक रूप से 'करेक्ट' दिखाने की कोशिश में जुटा है, लेकिन इस ज्वलंत मुद्दे पर बोलने से कतरा रहा है। एक महिला के साथ हुई इस दरिंदगी को प्रशासनिक चश्मे से देखना बंद करना होगा। यह हमला एक सरकारी कर्मचारी पर नहीं, बल्कि एक बहन की गरिमा पर हुआ है। मौन रहकर तमाशा देखने वाला समाज यह भूल रहा है कि अन्याय पर चुप्पी साधना अपराधी का साथ देने के बराबर है।

एक कड़वा सवाल हर छत्तीसगढ़िया के नाम आज यह सवाल हर उस परिवार से है जिसकी बेटियां पुलिस विभाग या अन्य सेवाओं में बाहर काम कर रही हैं। क्या उनकी सुरक्षा की गारंटी सिर्फ तब तक है जब तक भीड़ बेकाबू नहीं होती? अगर हम आज अपनी इस बहन के लिए खड़े नहीं हो सकते, तो याद रखिएगा कि इतिहास गवाह है—अपराध पर मौन रहने वालों के दुख में आंसू पोंछने वाला भी कोई नहीं मिलता।

छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर एक महिला को घेरकर निर्वस्त्र किया जाना और हमारा हाथ पर हाथ धरे बैठे रहना, हमारी सामूहिक विफलता है। यदि हम उस पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए एकजुट नहीं हो सकते, तो हमें खुद को सभ्य समाज कहने का कोई अधिकार नहीं है।

Tags:    

Similar News