धान तिहार: रिकॉर्ड 105 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी करेगी भूपेश सरकार, दिसंबर महीने की पहली तारीख से शुरू होगी धान की खरीदी

Update: 2021-12-03 06:55 GMT

रायपुर 30 नवम्बर 2021 छत्तीसगढ़ में दिसंबर महीने की पहली तारीख से धान की खरीदी शुरू होने जा रही है। बीते साल के मुकाबले इस साल अब तक करीब दो लाख नए किसानों ने धान बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। साथ ही धान का रकबा में लगभग सवा दो लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में बड़े स्तर में धान खरीदी को लेकर तैयारी की जा रही है। धान खरीदी की व्यवस्था और इसमें किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसे लेकर सीधे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल नजर रखे हुए हैं। खाद्य मंत्री अमरजीत भगत लगातार विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर रहे हैं। चीफ सेक्रेट्री से लेकर डीजीपी तक इस बात की तैयारियों में जुटे हैं कि कहीं कोई गड़बड़ी न हो। खाद्य मंत्री ने धान खरीदी केंद्रों की देखरेख के लिए नियुक्त नोडल अधिकारीयों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। किसी भी तरह की गड़बड़ी या लापरवाही पर नोडल अधिकारियों की जवाबदेही होगी। खाद्य मंत्री ने कहा है कि पहले से पंजीकृत किसानों के पंजीयन को कैरी फॉरवर्ड कर नए किसानों और रकबा की संख्या सुनिश्चित हो, जिससे किसानों की संख्या और रकबा के अनुरूप आगामी धान की खरीदी की तैयारी की जा सके। इसके अलावा प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में अन्य राज्यों से अवैध धान परिवहन की शिकायतें मिलती हैं. एसे में पड़ोसी राज्यों की सीमाओं पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

रिकॉर्ड 105 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य

छत्तीसगढ़ में इस साल रिकार्ड धान खरीदी का लक्ष्य रखा गया है। किसानों से 105 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा गया है। खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने बारदाने की नियमित आपूर्ति के लिए जूट कमिश्नर से समन्वय बनाए रखने, राइस मिलरों से बारदानों की व्यवस्था और प्रदेश के उचित मूल्य की दुकानों से मिलने वाले बारदाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है। इसके अलावा बारदाने की कमी होने की स्थिति में ओपन टेंडर के माध्यम से एचडीपी बारदानों की भी व्यवस्था सुनिश्चित कर लिया जाए. इस बार धान खरीदी केंद्रों में धान बेचने आने वाले किसानों के लिए पानी, बिजली व बैठने की व्यवस्था की जाएगी। फर्स्ट एड बॉक्स का भी इंतजाम किया जाएगा. इसके अलावा कंप्यूटर ऑपरेटर, इंटरनेट और कर्मचारियों की पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी।

किसान न्याय योजना का भी पंजीयन

राज्य के किसानों की सहूलियत और पंजीयन की प्रक्रिया को आसान करने के लिए सरकार ने एकीकृत किसान पोर्टल शुरू किया है। इसके जरिए राजीव गांधी किसान न्याय योजना, समर्थन मूल्य पर धान खरीदी, मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना, कोदो-कुटकी-रागी उपार्जन योजना तथा उद्यानिकी फसलों के उत्पादक किसानों को लाभ लेने के लिए एक बार पंजीयन कराना होगा।

धान खरीदी के पहले ही दिन से किसानों के खाते में पहुंचेगा पैसा

राज्य सरकार ने इस बार 105 लाख टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा है। राज्य के इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा लक्ष्य है, इसलिए तैयारियों पर उच्च स्तर से नजर रखी जा रही है। मुख्य सचिव अमिताभ जैन के मुताबिक धान खरीदी शुरू होने के पहले ही दिन से किसानों के खाते में पैसा पहुंचने लगेगा। किसानों को भुगतान करने के लिए 21 हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था कर ली गई है। इसी तरह बारदाने की पर्याप्त इंतजाम किए जा रहे हैं। खाद्य विभाग के सचिव टीके वर्मा ने बताया कि इस साल धान खरीदी के लिए 5.25 लाख गठान बारदाने की जरूरत होगी। जूट कमिश्नर ने 2.14 लाख गठान बारदाना देने की स्वीकृति दी है। इसमें से 67237 गठान बरदाने मिल गए हैं। राज्य स्तर पर भी बारदाने की व्यवस्था की जा रही है। पीडीएस से 50 हजार गठान बारदाने की व्यवस्था हुई है। मिलर्स से 40 हजार गठान बारदाने उपलब्ध होंगे। 1.13 लाख गठान प्लास्टिक बारदाने खरीदी जा रही है। वहीं, मुख्य सचिव जैन ने अधिकारियों को हर हाल में 28 नवंबर तक धान खरीदी की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

केंद्र की जिद से संकट में 416 उसना राइस मिलर

केंद्रीय पूल में केवल अरवा चावल लेने की जिद ने राज्य सरकार और यहां के 416 उसना राइस मिलरों और कर्मचारियों को संकट में डाल दिया है। संकट का समाधान तलाशने राज्य के खाद्य मंत्री अमरजीत भगत अफसरों के साथ दिल्ली तक गए, लेकिन केंद्र सरकार उसना चावल लेने को राजी नहीं हुई। भगत ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से मिलने के लिए समय भी मांगा था, मगर समय नहीं दिया। टेलीफोन पर हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि केंद्र के स्टाक में उसना चावल इतना ज्यादा है कि नया नहीं ले सकते। केंद्र के इस फैसले पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कड़ी आपत्ति की है। उन्होंने कहा कि हम इस मामले में प्रधानमंत्री से आग्रह करेंगे। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि पहले केंद्र सरकार अब तक अरवा के साथ उसना चावल भी लेती रही है। केंद्र ने ही उसना राइस मिलों को बढ़ावा दिया। अब मिल लग गए हैं तो कह रहे हैं उसना चावल नहीं लेंगे। बघेल ने कहा कि केंद्र सरकार यह बात पहले बता देती तो हम किसानों से कहत देते कि उसना क्वालिटी के धान की खेती न करें।

बकाया चार हजार करोड़ रुपए और बारदानें पर बनी बात

केंद्रीय पूल में जमा किए गए का बकाया चार हजार करोड़ रुपये राज्य को देने के लिए केंद्र सरकार राजी हो गई है। दिल्ली में राज्य व केंद्र सरकार के अफसरों के बीच हुई बैठक में इस पर सहमति बनी है। केंद्र के अफसरों ने राज्य को जूट बारदानों की आपूर्ति बढ़ाने का भी भरोसा दिलाया है। बारदानें की कमी दूर करने के लिए राज्य को प्लास्टिक बारदाने की खरीदी की अनुमति देने के लिए भी केंद्र सरकार राजी हो गई है, लेकिन उसना चावल को लेकर अब भी पेंच फंसा हुआ है। राज्य के खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने बताया कि राज्य व केंद्र सरकार के अफसरों की बैठक में कई मुद्दों सहमति बन गई है, लेकिन केंद्रीय पूल में अरवा के साथ ही उसना चावल जमा करने की अनुमति अभी नहीं मिली है।

5.93 लाख टन मासिक उत्पादन क्षमता

छत्तीसगढ़ में 416 उसना राइस मिल हैं। इनकी मासिक उत्पादन क्षमता 5.93 लाख टन है। यदि केंद्र सरकार उसना चावल नहीं लेगी तो धान का समय पर निराकरण नहीं हो पाएगा। एक समस्या यह भी है कि केंद्र सरकार ने इस बार अरवा की क्वालिटी को लेकर भी सख्ती कर दी है। केंद्र सरकार ने इस बार राज्य के 61.65 लाख टन चावल केंद्रीय पूल में लेने का फैसला किया है। खाद्य मंत्री भगत के अनुसार इस वर्ष समर्थन मूल्य पर किसानों से 105 लाख टन धान खरीदी का लक्ष्य तय किया गया है। इससे 71 लाख टन चावल तैयार होगा। राज्य में पीडीएस में 24 लाख टन चावल की आवश्यकता होगी। भारतीय खाद्य निगम में 24 लाख टन अरवा चावल जमा किया जाना है। इसके अतिरिक्त 23 लाख टन उसना चावल भी हम केंद्रीय पूल में लिए जाने का आग्रह कर रहे हैं। प्रदेश राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष कैलाश रुंगटा का कहना है कि दोनों प्लांटों की तकनीकी में बहुत अंतर है। उसना राइस मिल की लागत अरवा की तुलना में अधिक है, उसे अरवा में प्लांट में तब्दील करने में खर्च और बढ़ जाएगा। इसके बाद भी मिल की लागत नहीं निकल पाएगी।

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