छत्तीसगढ़िया मॉडल... देश में कम बेरोजगारी वाले राज्यों में छत्तीसगढ़ चौथे नंबर पर, राज्य में बेरोजगारी दर मात्र 2.1%, जबकि देश में 7.91%
रायपुर 31 जनवरी 2022। छत्तीसगढ़ के विकास का मॉडल एक बार फिर पूरे देश में चर्चा में है। क्योंकि सेंटर फार मेजरिंग इंडियन इकानामी संगठन की ओर से जारी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि छत्तीसगढ़ देश में सबसे कम बेरोजगारी वाले राज्यों में चौथे नंबर पर है। छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर मात्र 2.1 प्रतिशत, जबकि देश में ये सिर्फ 7.91 प्रतिशत है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि अब गुजरात मॉडल फेल हो गया है, सिर्फ छत्तीसगढ़िया म़ॉडल ही देश में चलेगा।
सेंटर फार मेजरिंग इंडियन इकानामी संगठन द्वारा हाल ही में जारी किए गए बेरोजगारी के आंकड़ों ने एक बार फिर विकास के छत्तीसगढ़ माडल की सफलता का परचम बुलंद कर दिया है। आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ 2.1 प्रतिशत के साथ देश में सबसे कम बेरोजगारी वाले राज्यों में चौथे क्रम पर है। दिसंबर 2021 की स्थिति के अध्ययन के बाद सीएमआईई द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार देश की बेरोजगारी दर दिसंबर महीने में 7.91 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह 4 माह का उच्च्तम स्तर है। शहरों में बेरोजगारी दर 9.30 प्रतिशत जबकि ग्रामीण इलाकों में 7.28 प्रतिशत रही है। सीएमआईई के आंकड़ों के अनुसार देश में सबसे कम बेरोजगारी दर कर्नाटक में 1.4 प्रतिशत और सर्वाधिक बेरोजगारी दर हरियाणा में 34.1 प्रतिशत बताई गई है। गौरतलब है कि समावेशी विकास का लक्ष्य निर्धारित करते हुए तीन साल पहले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ राज्य में महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज्य की परिकल्पना के अनुरूप नया मॉडल अपनाया गया है, जिसके तहत गांवों और शहरों के बीच आर्थिक परस्परता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसी माडल के अंतर्गत गांवों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सुराजी गांव योजना, नरवा-गरवा-घुरवा-बारी कार्यक्रम, गोधन न्याय योजना, राजीव गांधी किसान न्याय योजना, राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना, रूरल इंडस्ट्रीयल पार्कों की स्थापना, लघु वनोपजों के संग्रहण एवं वैल्यू एडीशन, उद्यमिता विकास जैसी अनेक अभिनव योजनाओं और कार्यक्रमों का क्रियान्वयन किया जा रहा है। कोरोना की पहली और दूसरी लहर के दौरान भी देशव्यापी आर्थिक मंदी से छत्तीसगढ़ राज्य की अर्थव्यवस्था अछूती रही। तब भी छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर पूरी तरह नियंत्रित रही। अब नये आंकड़ों के मुताबिक जहां देश में बेरोजगारी दर लगातार चिंताजनक उछाल पर है, वहीं छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर केवल 2.1 प्रतिशत है। नये आंकड़ों के मुताबिक मध्यप्रदेश में 3.4 प्रतिशत, उत्तरप्रदेश में 4.9 प्रतिशत, असम में 5.8 प्रतिशत, झारखंड में 17.3 और बिहार में 16 प्रतिशत बेरोजगारी की दर रही है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल जनवरी 2021 की स्थिति में देश में बेरोजगारी दर 6.52 फीसदी थी जिसमें शहरी बेरोजगारी 8.1 प्रतिशत और ग्रामीण बेरोजगारी 5.81 प्रतिशत थी, वहीं दिसंबर 2021 की स्थिति में देश में बेरोजगारी की दर 7.91 प्रतिशत रही जिसमें शहरी बेरोजगारी 9.3 प्रतिशत और ग्रामीण बेरोजगारी 7.28 प्रतिशत रही। सेंटर फार मेजरिंग इंडियन इकॉनॉमी संगठन 45 वर्षों से भारतीय अर्थव्यवस्था विदेशी मुद्रा, कृषि, उद्योग आदि क्षेत्रों में सतत अध्ययन करके डेटाबेस का निर्माण करता आया है और इसके द्वारा जारी आंकड़ों को प्रामाणिक माना जाता है।
क्या है सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी
सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी एक थिंक टैंक है। यह संगठन पिछले 45 सालों से भारतीय अर्थव्यवस्था विदेशी मुद्रा, कृषि, उद्योग आदि क्षेत्रों में सतत अध्ययन करके डेटा बेस का निर्माण करता आया है। अर्थव्यवस्था पर इसकी ओर से जारी आंकड़ों को प्रमाणिक माना जाता है।
इसलिए छत्तीसगढ़ में कंट्रोल में रही बेरोजगारी दर
छत्तीसगढ़ ने पिछले तीन साल पहले महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज्य की परिकल्पना के अनुरूप नया मॉडल अपनाया था। इसके तहत गांवों और शहरों के बीच आर्थिक परस्परता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसी मॉडल के अंतर्गत गांवों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सुराजी गांव योजना, नरवा-गरवा-घुरवा-बारी कार्यक्रम, गोधन न्याय योजना, राजीव गांधी किसान न्याय योजना, रुलर इंडस्ट्रियल पार्कों की स्थापना, लघु वनोपजों के संग्रहण एवं वैल्यू एडीशन, उद्यमिता विकास जैसी योजनाओं और कार्यक्रमों का क्रियान्वयन किया जा रहा है। कोरोना की पहली और दूसरी लहर के दौरान भी देशव्यापी आर्थिक मंदी से छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था अछूती रही। तब भी छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर पूरी तरह नियंत्रित रही।
5 नए जिले में बड़े पैमाने पर रोजगार के मौके
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार आने के बाद पांच नये जिले बनाए गए हैं। जिसमें से अभी तो एक अस्तित्व में आया है। चार जिले, चार अनुभाग, 72 तहसीलें बन रही हैं। इसमें भी बहुत बड़े पैमाने पर भर्ती होना बाकी है। 171 स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल खुले हैं। हिन्दी वाला भी खुलेगा। इन सब में भी बड़े पैमाने पर शिक्षकों की भर्ती, आज नहीं तो कल होनी ही है। आदिवासी अंचलों में कनिष्ठ सेवा चयन बोर्ड का गठन किया गया है और इसके माध्यम से भी भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मंत्रियों ने कृषि, उद्यानिकी, लघु वनोपज, गोठान आधारित काम, स्व-सहायता समूह, धान खरीदी, मनरेगा, रियल एस्टेट, कारोबार आदि सेक्टर में भी रोजगार के अवसर जोड़े। संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने भाजपा पर सवाल उठाते हुए कहते हैं कि भाजपा सरकार ने अपने कार्यकाल के 15 वर्षों में रोजगार के सारे अवसरों को रोककर रखा था। जिसे मौजूदा सरकार ने पूरी तरह से खोल दिया है। इसी का नतीजा है कि छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरियों का बूम आया है। मंत्रियों ने कहा, भाजपा के नेता किस मुंह से बेरोजगारी का सवाल उठा रहे हैं। 15 साल छत्तीसगढ़ में राज करते समय आपको कभी नहीं सूझा कि युवाओं को सरकारी नौकरी, बेहतर आमदनी, किसानों को स्वावलंबन और महिलाओं को स्वाभिमान कैसे दिया जाता है। तब तो आप पंचायत के पैसे से मोबाइल टावर लगा रहे थे और डीएमएफ के पैसे से स्वीमिंग पूल बनवा रहे थे। वहीं केंद्र की सत्ता में बैठी भाजपा सरकार सरकारी संस्थानों को बेच रही है।
युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करें : भूपेश बघेल
छत्तीसगढ़ रोजगार मिशन की पहली बैठक में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि उद्योगों और बाजार की मांग के अनुसार युवाओं को रोजगार के लिए तैयार किया जाए, उन्हें प्रशिक्षण देकर विभिन्न ट्रेडों में दक्ष बनाया जाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित रूरल इंडस्ट्रियल पार्क में बाजार की मांग के अनुसार उत्पादन किया जाए। इन उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाने और सर्टिफिकेशन के लिए छत्तीसगढ़ में स्थित उच्च तकनीकी संस्थानों का सहयोग लिया जाए। उन्होंने कहा कि नए स्टार्टअप के लिए बेहतर इको-सिस्टम तैयार किया जाए, जिससे युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सके। मुख्यमंत्री बघेल की अध्यक्षता में हुई बैठक में रोजगार मिशन के स्वरूप, कार्यप्रणाली के संबंध में विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने रोजगार के नए अवसरों के सृजन की दिशा में तेजी से काम करने और नियमित रूप से रोजगार मिशन के कार्यों की समीक्षा के निर्देश दिए। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में आगामी पांच वर्षों में रोजगार के 12 से 15 लाख नये अवसरों का सृजन करने के उद्देश्य से राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ रोजगार मिशन का गठन किया है। मुख्यमंत्री ने आई.आई.टी., आई.आई.एम., ट्रिपल आई.आई.टी. और एन.आई.टी. के डायरेक्टरों से भी रोजगार सृजन के संबंध में सुझाव लिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों के उत्पादों के सर्टिफिकेशन और मानकीकरण के लिए उच्च शैक्षणिक संस्थान आगे आए। उन्होंने इन संस्थानों से नए स्टार्टअप के साथ ही देश की प्रतिष्ठित कम्पनियों को छत्तीसगढ़ लाने में सहयोग का आग्रह किया। इन कम्पनियों के आने से छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षित युवाओं के लिए राज्य में ही अच्छे अवसर निर्मित होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय उद्योगों की जरूरतों के अनुसार युवाओं को विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण देकर उनका कौशल उन्नयन किया जाए।
इससे युवाओं को उद्योगों में आसानी से नियोजित किया जा सकता है। इस मौके पर उच्च शिक्षा, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री एवं छत्तीसगढ़ रोजगार मिशन के कार्यकारी अध्यक्ष उमेश पटेल, मुख्य सचिव एवं छत्तीसगढ़ रोजगार मिशन के उपाध्यक्ष अमिताभ जैन सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, वित्त सचिव अलरमेलमंगई डी.,मुख्यमंत्री के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, डॉ एस. भारती दासन, संचालक उद्योग अनिल टुटेजा, आई.आई.एम. रायपुर के डायरेक्टर भारत भास्कर, आई.आई.टी. भिलाई के डायरेक्टर रजत मूना, ट्रिपल आई.आई.टी. नवा रायपुर के डायरेक्टर प्रदीप कुमार सिन्हा, एन.आई.टी. रायपुर के प्रोफेसर मनोज कुमार, मुख्यमंत्री की उप सचिव सौम्या चौरसिया भी उपस्थित थी।