कोरोना की तीसरी लहर: इन देशों में बच्चों में बढ़ा संक्रमण, बीमार पड़ रहे हैं बच्चे…. हमारे लिए खतरे का संकेत, जानें लक्षण

Update: 2021-08-11 01:41 GMT

नईदिल्ली 11 अगस्त 2021. भारत में कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों को अधिक नुकसान होने का अनुमान है। वहीं, अमेरिका व ब्रिटेन में बच्चों में संक्रमण के मामले पहले की दो लहर की तुलना में बढ़ गए हैं, जो हमारे लिए खतरे का संकेत हो सकता है। अलबामा, अरकंसास, लुसियाना व फ्लोरिडा में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में संक्रमण के मामले बढ़ने लगे हैं। अरकंसास के चिल्ड्रेन अस्पताल में संक्रमण से भर्ती होने वाले बच्चों की दर में 50 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। सात नवजात आईसीयू में तो दो वेंटिलेटर पर जिंदगी से जंग लड़ रहे हैं।

तीसरी लहर में सबसे ज्यादा असर बच्चों पर होगा, इसके संकेत भी नजर आने लगे हैं. कई देशों में संक्रमण के मामले सामने आने लगे हैं. बच्चे को कई दिन तक तेज बुखार, पेट में दर्द, डायरिया, उल्टी, त्वचा पर चकत्ते लाल आंखें व हाथ-पैर का ठंडा होने जैसे लक्षण दिखायी देते हैं. अमेरिका व ब्रिटेन में बच्चों में संक्रमण के बढ़ते मामलों ने भारत के लिए चिंता बढ़ा दी है. इन दोनों देशों में कई जगहों पर मामलों की संख्या में वृद्धि हो रही है. कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने देश में सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है. यहां कोरोना संक्रमण के दूसरी लहर की तुलना में बच्चों के संक्रमण का मामला काफी ज्यादा बढ़ गया है.

संक्रमण के जो मामले बढ़े हैं उसमें सबसे ज्यादा लुसियाना में जुलाई के आखिरी सप्ताह में सर्वाधिक 4232 बच्चों में संक्रमण मिला है. ब्रिटेन में हर दिन औसतन 40 बच्चे अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं. वहीं फ्लोरिडा के स्वास्थ्य विभाग ने बताया है कि 12 वर्ष से कम उम्र के 10,785 मामले सामने आए थे. भारत में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर को सबसे खतनाक इसलिए बताया जा रहा है क्योंकि दुनिया भर में जो ट्रेंड सामने आ रहे हैं वह बच्चों के संक्रमण के बढ़ते मामलों की तरफ इशारा कर रहे हैं.

चिंता की बात ये भी है कि अमेरिका में हर रोज आने वाले नए मामलों में करीब 15 फीसद मामले बच्‍चों के अंदर पाए जा रहे हैं। इसका खुलासा अमेरिकन अकादमी आफ पीडियाट्रिक्‍स (AAP) की रिसर्च में हुआ है। हालांकि इस दौरान कोविड-19 की वजह से बच्‍चों की मौतों के मामले बेहद कम ही सामने आए हैं। आंकड़ों के मुताबिक करीब दो फीसद से भी कम बच्‍चे कोविड-19 की वजह से अस्‍पताल में भर्ती हुए। यहां पर पिछले एक सप्‍ताह के दोरान 94 हजार बच्‍चों का इलाज किया गया है। ये आंकड़े अपने आप में बेहद चौंकाने वाले हैं।

AAP के उपलब्‍ध आंकड़ों के मुताबिक देश में कोरोना की वजह से करीब .03 तक रही है। महामारी की शुरुआत से पांच अगस्‍त 2021 तक देश में करीब 43 लाख बच्‍चे कोविड-19 से पाजीटिव पाए गए। आप की रिपोर्ट में कहा गया है कि जुलाई के बाद से बच्‍चों में इसके मामले तेजी से बढ़े हैं। मौजूदा समय में 12 वर्ष के करीब 60 फीसद बच्‍चों को पूरी तरह से वैक्‍सीनेट कर दिया गया है वहीं करीब 70 फीसद बच्‍चों को कम से कम वैक्‍सीन की एक खुराक दे दी गई है।

हालांकि देश में फिलहाल 12 वर्ष से कम उम्र के बच्‍चों को कोरोना वैक्‍सीन नहीं दी जा रही है। आपको बता दें कि अमेरिका में फाइजर कंपनी की कोरोना वैक्‍सीन को 12 वर्ष और इससे अधिक की उम्र वाले लोगों पर इस्‍तेमाल की मंजूरी दी जा चुकी है। इसके माडर्ना और जेनसेन वैक्‍सीन को 18 वर्ष और इससे अधिक के लिए मंजूरी दी जा चुकी है।

माना जा रहा है कि अमेरिका में 12 वर्ष से कम उम्र के बच्‍चों पर इस्‍तेमाल के लिए फाइजर की कोरोना वैक्‍सीन को इस वर्ष अक्‍टूबर तक मंजूरी मिल सकती है। आपको बता दें कि अमेरिका में स्‍कूलों को खोला जा चुका है। इसको देखते हुए बच्‍चों के बढ़ते मामले चिंता का सबब बने हुए हैं। सेंटर फार डिजीज कंट्रोल के ताजा आंकड़े बताते हैं कि 5-15 वर्ष की आयु वाले बच्‍चे इसकी चपेट में अधिक आ रहे हैं।

इंपीरियल कॉलेज लंदन की पीडियाट्रिक इंफेक्सियश डिसीज विशेषज्ञ डॉ. एलिजाबेथ व्हिटकर का कहना है कि अमेरिका व ब्रिटेन में 12 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों में संक्रमण दर बढ़ी है। इनमें अधिकतर बच्चे ऐसे हैं जिन्हें टीका नहीं लगा है। ऐसे में बच्चों को हर हाल में टीका लगाना होगा।

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