CG में लैंड जिहाद! पंडों आदिवासी की जमीन हड़पने का गोरखधंधा, दबंगई से थर्राते हैं लोग

CG News: छत्तीसगढ़ के उत्तर छत्तीसगढ़ का इलाका, जहां पहाड़ व घने जंगल है। प्राकृतिक संसाधनों से बेहद अमीर इस इलाके में सोची समझी साजिश के तहत लैंड जिहाद शुरू हो गया है। सबसे पहले लैंड जिहाद का शिकार राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र पंडो आदिवासी हो रहे हैं।

Update: 2026-03-05 09:54 GMT

सरगुजा। छत्तीसगढ़ के उत्तर छत्तीसगढ़ का इलाका, जहां पहाड़ व घने जंगल है। प्राकृतिक संसाधनों से बेहद अमीर इस इलाके में सोची समझी साजिश के तहत लैंड जिहाद शुरू हो गया है। सबसे पहले लैंड जिहाद का शिकार राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र पंडो आदिवासी हो रहे हैं। जहां कभी उनकी पूरी आबादी थी और पूरा गांव उनका था,आज इस गांव की डेमोग्रॉफी ही बदल गई है। सरकारी पट्टे की जमीन पर मुसलमानों ने कब्जा कर लिया है। इनकी दबंगई ऐसी कि पंडो आदिवासी इनके खिलाफ शिकायत करे और अपनी जमीन मांगने से थर्राते हैं। प्रशासन भी राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों को ना तो सुरक्षा दे पा रहा है और ना ही उनकी खोई जमीन वापस करा पा रहे हैं।

उत्तर छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के लखनपुर ब्लॉक में गांव है राजाकटेल, यहां राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र और अति संरक्षित जनजाति पंडो आदिवासियों की 20 परिवार वर्षों से निवासरत हैं। झारखंड, बिहार व पश्चिम बंगाल से मुसलमान आए। पहले पहले बकरी रखने की जगह पंडों से मांगी। सीधे और सरल प्रवृति के आदिवासियों ने जमीन का कुछ हिस्सा जीविकोपार्जन के लिए इनको दे दिया। पहले बकरों के लिए जमीन मांगी फिर धीरे-धीरे लैंड जिहाद की शुरू कर दी। आदिवासियों के सीधे और सहजता का बेजा फायदा उठाया और उनकी जमीने हड़पना शुरू कर दिया। लैंड जिहाद के शुरुआती दौर में आदिवासियों को रुपये उधार में दिए। शराब की लत लगाई और कोरे कागजों पर हस्ताक्षर कराते गए।

आदिवासियों की जमीन हड़पने के साथ ही रिश्तेदारों और जान पहचान वालों को बुलाकर बसाना शुरू किया। राजाकटेल की आज डेमोग्रॉफी पूरी तरह बदल गई है। जहां राजाकटेल पंडो आदिवासियों की बस्ती थी और ये ही नजर आते थे। आज स्थिति एकदम उलट है। आदिवासियों से ज्यादा बाहर से आए मुसलमानों की बस्ती बस गई है।

दबंगाई ऐसा कि अपने ही गांव में पंडो आदिवासी बेगाने बनकर रह गए हैं। जहां खुली हवा में सांस लेते थे और जीभर कर जिंदगी जीते थे,आज ना तो खुली हवा में सांस ले पा रहे हैं और ना ही अपनी जमीन पर चैन की नींद सो पा रहे हैं। कारण भी साफ है,चौबीस घंटे डर सताते रहता है कि पता नहीं कब कौन मुसलमान घर के दरवाजे पर खड़ा हो जाए और कागज दिखाकर घर और जमीन से बेदखल कर दे।

ऐसे शुरू हुआ जमीन हड़पने का खेल

राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पंडो आदिवासियों को रहवास के लिए राज्य शासन द्वारा जमीन का पट्टा दिया गया है। आज से तकरीबन 35 साल पहले झारखंड, बिहार, बंगाल से आए मुसलमानों ने पंडो आदिवासियों से बकरा रखने के लिए जगह मांगी। बकरा रखने के बहाने जमीन पर धीरे-धीरे कब्जा करने लगे। पहले तीन परिवार आया, धीरे-धीरे परिवार के लोगों और परिचितों को झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल से लाकर बसाने लगे। अब तो राजाकटेल की भौगोलिक परिस्थितियां ही एकदम से बदल गई है। पंडो आदिवासियों के गांव में मुसलमानों की बढ़ती आबादी देखकर हैरान रह जाएंगे, आखिरकार ये कहां से आए और जमीनों पर कब्जा कैसे कर लिए। आलम ये कि पीढ़ी दर पीढ़ी राजाकटेल में रहने वाले पंडो आदिवासी अब अपने ही गांव में अनजान हो गए हैं। जिन जमीनों पर वे अपना जीवन यापन करते थे, अब उसके हाथ से वह भी छूट गया है।

पंडों आदिवासियों की जमीन बचाने पार्षद आलोक दुबे ने की पहल, कमिश्नर से की थी शिकायत

ग्राम पंचायत माजा का ही एक टोला है जो राजाकटेल नाम से ग्राम है। इसमें 12 पंडों जनजाति के लोगों के जमीन पर जो कई पीढ़ियों से राजा कटेल ग्राम में निवास करते आ रहें हैं। इनकी सरगुजा सेटलमेंट एवं सरकार से शासकीय पट्टे पर मिली जमीन पर झारखण्ड / बिहार एवं बंगाल से आकर मुसलमान जो बकरी, ताबीज एवं चूड़ी मनिहारी बेचने के नाम पर इस गांव में आये और जबरन ये बाहरी मुसलमान इन भोले-भाले पंडों का, जो 12 परिवार है। जिनको सरगुजा सेटलमेंट शासन से प्राप्त पट्टे जिनके पास थी। उनको ये बाहरी मुसलमान डरा धमकाकर शराब पीलाकर पंडो के अधिकांश जमीनों को स्टाम्प पर 50 साल 30 साल के लीज पर पंडो की जमीन को लिखवा लिये है।

पंडों की जमीन वापस दिलाने के लिए पार्षद आलोक दुबे ने पहल की और कमिश्नर को पत्र लिखकर मामले की जांच की मांग की। पार्षद दुबे ने अपने पत्र में लिखा है, पंडो जनजाति जो राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाते हैं। इनकी संख्या लगातार पूरे देश एवं प्रदेश में कम होती जा रही है, इनके अस्तित्व को बचाये रखना जरुरी है। इन भाले-भाले पंडो आदिवासियों के जमीनों को इन बाहरी मुसलमानों ने छलपूर्वक 50-100 रुपये के स्टाम्प पर, जो पंडो लोगों के शासकीय भूमि स्वामी पट्टा मिला था। उनको जबरन अपने नाम लिखवा लिये हैं।

राजाकटेल ग्राम के पंडो जिनकी जमीन पर है कब्जा

(1) रतियारा पति अर्जुन 1 एकड़ कबीर खान (झारखंड)

(2) हीरामती पति भोलू पंडो-1 एकड़ खुर्शीद खान (झारखंड़)

(3) बेचन पंडो पिता कवरु- 1 एकड़ सद्दाम खान

(4) लालगुलाब पिता धीरसाय-3 एकड़ पीर मो०, गुलबहार, जमील, शमीम (बिहार)

(5) रतन पंडो पिता दीपन पंडो 2 एकड़ खुर्शीद, नेसार, जहुर, महताब, सुलतान

(6) फुलसुन्दरी पति नोहरसाय - 1.5 एकड जमील खान

(7) मुन्ना पंडो पिता कालीचरण 4 एकड़ - रज्जाक खान एवं अन्य

(8) शिवनारायण पंडो पिता गेंन्दुराम 2 एकड़ कुर्बान एवं रज्जाक खान

(9) बोधन पंडो पिता परशुराम 2 एकड़ हुसैन, सहाजेन खान, बलजीत

(10) मझवार पंडो पिता रुपसाय 1.5 एकड़ हुसैन

(11) लोकनाथ पंडो पिता बिपन 5 एकड़ कबीर, असलम, सद्दाम

3 एकड़ जैनूल, शमीम (12) सालन पंडो पिता रोन्हा

कमिश्नर ने कलेक्टर को जांच का दिया निर्देश

पार्षद दुबे की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सरगुजा संभाग के कमिश्नर ने अंबिकापुर कलेक्टर को पत्र लिखकर मामले की जांच कराने और आगे की कार्रवाई का निर्देश दिया था। कमिश्नर के निर्देश पर कलेक्टर ने एसडीएम, तहसीलदार व राजस्व अमले की टीम बनाकर जांच का निर्देश दिया। जांच टीम मौके पर पहुंची और पड़ताल की। जांच दल ने शिकायत की पुने हुए पंडो आदिवासियों की जमीन पर बाहरी राज्यों सजाए मुसलमानों द्वारा कब्जा करने की जानकारी दी है।

एसडीएम ने कब्जाधारी मुसलमानों को जारी किया नोटिस

जांच रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम उदयपुर बनसिंह नेताम ने डों को मिले सरकारी पट्टे पर घर व दुकान बनाकर कब्जा करने वाले 14 मुस्लिमों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। नोटिस का जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की बात कही जा रही है।

भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के पदाधिकारी पहुंचे गांव

एपीजी की खबर के बाद भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के पदाधिकारियों का प्रतिनिधि राजाकटेल गांव पहुंचकर पंडो आदिवासियों से मुलाकात की व पूर मामले की शिकायत करने कहा। मोर्चा पदाधिकारियों ने आदिवासियों को आश्वस्त किया है कि उनकी जमीन हर हाल में उनको वापस दिलाई जाएगी।

जानिये कौन हैं आलोक दुबे, जो मामले को लगातार उठा रहे

पंडित रविशंकर यूनिवर्सिटी के दौर के छात्र नेता रहे हैं। इस समय अंबिकापुर नगर निगम मेें बीजेपी के पार्षद हैं। राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पंडो आदिवासियों की जमीन को बचाने के लिए लगातार आवाज उठा रहे हैं।

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