मूक-बधिर रेप पीड़िता ने प्लास्टिक की गुड़िया के सहारे दी गवाही, हाई कोर्ट ने आरोपी को सुनाई आजीवन कारावास की सजा, अपील को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को ठहराया सही
Bilaspur High Court News: मूक-बधिर दुष्कर्म पीड़िता जो बोल और सुन नहीं सकती,अपने साथ घटी घटना के लिए ट्रायल कोर्ट में प्लास्टिक की गुड़िया के सहारे घटना की जानकारी दी और आपबीती बताई। ट्रायल कोर्ट ने सुनवाई के दौरान दुभाषिए की भी सेवा ली। पीड़िता की गवाही के बाद ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए अभियुक्त ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। डिवीजन बेंच ने अपनी खारिज करते हुए आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है।
बिलासपुर 26 मार्च 2026, मूक-बधिर दुष्कर्म पीड़िता जो बोल और सुन नहीं सकती,अपने साथ घटी घटना के लिए ट्रायल कोर्ट में प्लास्टिक की गुड़िया के सहारे घटना की जानकारी दी और आपबीती बताई। ट्रायल कोर्ट ने सुनवाई के दौरान दुभाषिए की भी सेवा ली। पीड़िता की गवाही के बाद ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए अभियुक्त ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। डिवीजन बेंच ने अपनी खारिज करते हुए आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है।
ट्रायल कोर्ट में गवाही के दौरान मूक-बधिर दुष्कर्म पीड़िता की गवाही के लिए ट्रायल कोर्ट ने प्लास्टिक की गुड़िया मंगाई और दुभाषिए की मदद ली। पीड़िता ने प्लास्टिक की गुड़िया के सहारे अपने साथ घटित घटना की सिलसिलेवार गवाही कोर्ट को दी। पीड़िता की गवाही और दुभाषिए की पुष्टि के साथ ही मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर दुष्कर्म के आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। आरोपी ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। अपील की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है, कोई गवाह, जो बोल और सुन नहीं सकता, वह कोर्ट में इशारों या प्रदर्शन के तरीकों से गवाही दे सकता है। ऐसी गवाही को ठोस मौखिक सबूत माना जाएगा।
पढ़िए क्या है मामला?
दुष्कर्म पीड़िता युवती जो जन्म से ही मूक-बधिर है, के साथ उसके एक रिश्तेदार ने जब पीड़िता घर में अकेली थी, तब सुनेपन का फायदा उठाते हुए रेप किया। घटना के बाद जब पीड़िता के माता-पिता घर लौटे तो उसने इशारों ही इशारों में घटना के बारे में बताया और आरोपी की तरफ इशारा करते हुए दुष्कर्म करने की बात कही। मां की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज कर उसे जेल भेज दिया।
ट्रायल कोर्ट ने गवाही के लिए यह सब किया
मामले की सुनवाई के दौरान, पीड़िता जब कुछ सवालों को ठीक से समझ नहीं पा रही थी, तब ट्रायल कोर्ट ने बातचीत को आसान बनाने के लिए एक प्लास्टिक की गुड़िया मंगवाकर प्रदर्शन का तरीका अपनाया। प्लास्टिक की गुड़िया के ज़रिए, पीड़िता ने इशारों से बताया, आरोपी ने उसके साथ ज़बरदस्ती यौन संबंध बनाया। पीड़िता ने इशारों से यह भी बताया, वह पहले भी कोर्ट के सामने पेश हो चुकी है और मजिस्ट्रेट ने उसका बयान रिकॉर्ड किया। पीड़िता के बयान के आधार पर ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को IPC की धारा 450 (घर में घुसना) और धारा 376 (रेप) के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई।
ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में दी चुनौती
ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए अभियुक्त ने पीड़िता की गवाही की वैधता पर सवाल उठाया। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा, सिर्फ़ इसलिए कि कोई गवाह मूक-बधिर है, उसकी गवाही को खारिज नहीं किया जा सकता; बल्कि, किसी सक्षम दुभाषिए की मदद से इशारों या संकेतों के ज़रिए दी गई गवाही को भी सज़ा का आधार बनाया जा सकता है, बशर्ते वह विश्वसनीय हो। डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है, कानून यह मानता है, जो गवाह बोल नहीं सकता, वह खुली कोर्ट में इशारों या हाव-भाव से गवाही दे सकता है। ऐसी गवाही को ठोस मौखिक गवाही माना जाएगा। इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने एक प्रशिक्षित दुभाषिए की मौजूदगी सुनिश्चित करके और पीड़िता की समझने और जवाब देने की क्षमता के बारे में अपनी संतुष्टि दर्ज करके पर्याप्त सावधानियां बरतीं।
पढ़िए हाई कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा है
डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है, पीड़िता जन्म से ही सुनने और बोलने में अक्षम है, यह बात स्वीकार की गई। उसकी गवाही कोर्ट में एक प्रशिक्षित मूक-बधिर शिक्षक की सहायता से दर्ज की गई, जिसने दुभाषिए के रूप में काम किया। ट्रायल कोर्ट ने उसका बयान दर्ज करने से पहले, सवालों को समझने और इशारों और संकेतों के माध्यम से अपने जवाब बताने की उसकी क्षमता के बारे में खुद को संतुष्ट कर लिया था।
कोर्ट ने फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की रिपोर्ट को उचित महत्व दिया, जिसने इस बात की पुष्टि की कि पीड़िता के साथ यौन संबंध बनाए गए। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, ट्रायल कोर्ट ने यह बात नोट की, हालांकि पीड़िता सुन और बोल नहीं सकती, लेकिन ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे यह लगे कि उसे कोई मानसिक विकार है, जो उसे घटना को समझने या उसके बारे में बताने से रोकता हो। इशारों के ज़रिए ज़रूरी बातें बताने की उसकी क्षमता, आरोपी की पहचान करना और आरोपी पर लगाए गए आरोप से जुड़ी घटना को करके दिखाना, ये सभी बातें साफतौर पर यह दर्शाती हैं, वह गवाही देने में पूरी तरह सक्षम थी। इसलिए उसकी गवाही को एक ठोस सबूत माना जाएगा। इस टिप्पणी के साथ ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए याचिका को खारिज कर दिया है।