जग्गी हत्याकांड: हाई कोर्ट ने अमित जोगी को समय देने से किया इंकार, कल भी होगी मामले की सुनवाई

Bilaspur High Court: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एनसीपी नेता स्व रामअवतार जग्गी हत्याकांड की फाइल छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने रिओपन कर सुनवाई प्रारंभ कर दी है।

Update: 2026-04-01 06:56 GMT

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बिलासपुर। 1 अप्रैल 2026| छत्तीसगढ़ रायपुर निवासी व एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी हत्याकांड एक बार फिर रिओपन हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सोमवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। कोर्ट ने प्रांरभिक सुनवाई के दौरान हत्याकांड के प्रमुख आरोपी अमित जोगी और एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी को नोटिस जारी कर सुनवाई के दौरान कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया था। कोर्ट के निर्देश पर अमित व सतीश जग्गी अपने अधिवक्ताओं के साथ उपस्थित हुए। सुनवाई के दौरान अमित जोगी की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने समय की मांग की। डिवीजन बेंच ने समय देने से इंकार कर दिया है। डिवीजन बेंच में कल भी मामले की सुनवाई होगी।

बता दें, सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई और स्व जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अलग-अलग याचिका दायर कर हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करने के लिए छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट को निर्देशित किया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जग्गी हत्याकांड की फाइल रिओपन कर सुनवाई की जा रही है।

पढ़िए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जब पहले दिन हुई थी सुनवाई

याचिकाकर्ता सतीश जग्गी के अधिवक्ता बीपी. शर्मा ने डिवीजन बेंच को बताया, सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पुनर्विचार के लिए वापस छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट भेज दिया है। सीबीआई की ओर से उपस्थित अधिवक्ता वैभव ए. गोवर्धन और राज्य की ओर से उपस्थित उप महाधिवक्ता डॉ. सौरभ पांडे ने संयुक्त रूप से निवेदन किया कि राज्य ने 31 मई 2007 को आवेदन पेश कर निचली अदालत द्वारा पारित बरी करने के फैसले के खिलाफ अपील करने की अनुमति मांगी थी। उक्त आवेदन को इस न्यायालय की समन्वय पीठ ने 18 अगस्त 2011 को इस आधार पर खारिज कर दिया था, सीबीआई द्वारा जांच किए जा रहे मामले में राज्य द्वारा दायर अपील की अनुमति के लिए आवेदन स्वीकार्य नहीं है।

सीबीआई की याचिका को हाई कोर्ट ने कर दिया था खारिज

सीबीआई ने याचिका दायर कर 31 मई 2007 के फैसले और आदेश को चुनौती दी थी। हालांकि, इस न्यायालय की समन्वय पीठ ने 12 सितंबर 2011 के आदेश द्वारा विलंब के आधार पर इसे खारिज कर दिया था। इसके अतिरिक्त, अमित ऐश्वर्या जोगी की बरी होने को चुनौती देने के लिए पुनरीक्षण याचिका को आपराधिक अपील में परिवर्तित करने की मांग करते हुए शिकायतकर्ता सतीश जग्गी द्वारा दायर याचिका को भी 19 सितंबर 2011 के आदेश द्वारा खारिज कर दिया गया था।

सतीश जग्गी व सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी याचिका

18 अगस्त 2011, 12 सितंबर .2011 और 19 सितंबर 2011 के हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ,सतीश जग्गी व सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 06 नवंबर 2025 के आदेश के परिप्रेक्ष्य में याचिका दायर करने में हुई देरी को क्षमा कर दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से कहा, सतीश जग्गी और राज्य सरकार को बनाए पक्षकार

याचिका को सीबीआई द्वारा दायर अपील की अनुमति के आवेदन पर गुण-दोष के आधार पर पुनर्विचार के लिए छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट को वापस भेज दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है, सीबीआई उक्त कार्यवाही में वास्तविक शिकायतकर्ता और राज्य को आवश्यक पक्षकार बनाए। सीबीआई के वकील वैभव ए गोवर्धन ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा 06 नवंबर 2025 को पारित आदेश की एक प्रति हाई कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की है, जिसे रिकॉर्ड में ले लिया गया है।

सतीश जग्गी व अमित जोगी को कोर्ट में उपस्थिति के लिए डिवीजन बेंच ने जारी किया था नोटिस

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। डिवीजन बेंच ने जग्गी हत्याकांड के आरोपी अमित जोगी और याचिकाकर्ता सतीश जग्गी को नोटिस जारी कर अपने अधिवक्ता के साथ कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया था।

रायपुर एसपी के जरिए नोटिस तामिली का आदेश, तामिल के बाद देना होगा शपथ पत्र

डिवीजन बेंच ने रायपुर के पुलिस अधीक्षक के माध्यम से नोटिस की तामिली कराने का निर्देश दिया था। नोटिस तामिल करने के साथ ही एसपी रायपुर को शपथ पत्र पेश करने का निर्देश दिया था। राज्य शासन की ओर से पैरवी के लिए उपस्थित अधिवक्ता को निर्देश के परिपालन के संबंध में नोटिस की कॉपी रायपुर एसपी को भेजने की बात कही थी।

23 साल पहले रामअवतार जग्गी की गोली मारकर कर दी थी हत्या

4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने 31 लोगों को आरोपी बनाया था। बाद में बलटू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 लोगों को दोषी करार दिया गया था। हालांकि बाद में अमित जोगी को बरी कर दिया गया था। अमित जोगी को बरी किए जाने के खिलाफ रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। जिस पर अमित के पक्ष में स्टे ऑर्डर है।

कौन थे रामअवतार जग्गी ?

कारोबारी बैकग्राउंड वाले रामअवतार जग्गी देश के बड़े नेताओं में शुमार पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी थे। जब शुक्ल कांग्रेस छोड़कर NCP में शामिल हुए तो जग्गी भी उनके साथ-साथ एनसीपी आ गए। स्व विद्याचरण ने जग्गी को छत्तीसगढ़ में NCP का कोषाध्यक्ष बना दिया था।

हत्याकांड में ये हैं दोषी

जग्गी हत्याकांड में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत और विश्वनाथ राजभर दोषी हैं।

अमित जाेगी के वकील ने हाई कोर्ट को ये बताया

अमित जोगी की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता को हाई कोर्ट को बताया, हमें 31 मार्च को नोटिस तामिल हुआ है। सीबीआई ने 11 हजार पन्ने का चार्जशीट पेश किया है। लिहाजा इसके अध्ययन के लिए हमें समय चाहिए। अधिवक्ता ने इसके लिए चार सप्ताह का समय मांगा। इसके अलावा अमित जोगी के अधिवक्ता ने डिवीजन बेंच को यह भी बताया, सुप्रीम कोर्ट द्वारा केस को रिओपन करने के आदेश को हमने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। अमित जोगी के अधिवक्ता द्वारा सीबीआई द्वारा पेश किए गए चार्जशीट के अध्ययन के लिए मांगी गई चार सप्ताह की मोहलत को खारिज करते हुए समय देने से इंकार कर दिया है। डिवीजन बेंच ने कल भी सुनवाई का निर्देश दिया है।

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