Bilaspur High Court: गैंगरेप और हत्या के आरोपियों को काटनी पड़ेगी उम्र कैद की सजा, हाई कोर्ट ने कहा- DNA रिपोर्ट दोष साबित करने के लिए वैज्ञानिकतौर पर विश्वसनीय सबूत

Bilaspur High Court: गैंगरेप के तीन अभियुक्तों को उम्र कैद की सजा काटनी पड़ेगी। निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। पढ़िए डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में क्या कहा है।

Update: 2026-02-10 04:21 GMT
npg.news

Umar Qaid Ki Saza: बिलासपुर। गैंगरेप के तीन अभियुक्तों को उम्र कैद की सजा काटनी पड़ेगी। निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। घटना छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के गैंगरेप की है। दुष्कर्म और हत्या के आरोप में निचली अदालत ने तीन अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है, डीएनए रिपोर्ट दोषसिद्धी के लिए वैज्ञानिक साक्ष्य के रूप में विश्वसनीय सबूत है।

क्या है मामला

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के डौंडीलोहारा थाना क्षेत्र में 12 जून 2021 की सुबह एक महिला की घर के अंदर संदिग्ध अवस्था में लाश मिली थी। महिला के परिजनों ने पुलिस को बताया, घर का दरवाजा अंदर से बंद था। पीछे के रास्ते से बच्ची को घर के भीतर भेजकर कुंडी खुलवाई गई थी। अंदर महिला का शव बिस्तर पर पड़ा था। हाथ तौलियों से पीछे की ओर बंधा हुआ था, चेहरे पर चोट के गहरे जख्म थे। पीएम रिपोर्ट में हत्या से पहले दुष्कर्म की पुष्टि की गई थी। महिला की मौत दम घुटने से होना बताया गया था।

पुलिस जांच में इस तरह हुआ खुलासा

सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले में पुलिस की जांच में सामने आया, कमलनारायण साहू का मृतक महिला के घर आना जाना था। बीते एक दशक से दोनों के बीच संंबंध था। ग्रामीणों ने पुलिस को बताया, घटना रात को महिला के घर के आसपास कमलेश कुमार और उत्तम कुमार को संदिग्ध हालत में देखा गया था। ग्रामीणों की सूचना के आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू की। इस दौरान पुलिस ने फोरेसिंग जांच के साथ ही डीएनए टेस्ट कराया। डीएनए टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर तीनों आरोपियों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या का मामला दर्ज कर निचली अदालत में चार्जशीट पेश किया गया था।

\मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने तीनों आरोपियों को हत्या और सामूहिक दुष्कर्म के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। आरोपियों ने जेल में सजा काटते निचली अदालत के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा, डीएनए रिपोर्ट दोष साबित करने के लिए वैज्ञानिकतौर पर विश्वसनीय और शक्तिशाली सबूत है। रिपोर्ट की विश्वसनीयता को दरकिनार नहीं किया जा सकता, इस टिप्पणी के साथ डिवीजन बेंच ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए तीनों अभियुक्तों की अपील को खारिज कर दिया है।

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