CM Vishnudeo Sai: पुल-पुलिया और सड़क के माध्यम से रखी जा रही भविष्य की ठोस नींव, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बढ़ी विकास की नई गति
CM Vishnudeo Sai: मुख्यमंत्री स्वयं बस्तर के सौ से अधिक स्थानों का दौरा कर चुके हैं। ये दौरे औपचारिक नहीं, बल्कि जमीनी हालात समझने, विकास कार्यों की समीक्षा करने और सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाने का माध्यम बने हैं। बस्तर में बन रहे ये पुल आज केवल नदी या नाले पार करने का साधन नहीं हैं। वे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और भरोसे को जोड़ने वाले मजबूत सेतु बन चुके हैं
CM Vishnudeo Sai: रायपुर। पिछले 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ में सड़क और पुल निर्माण ने ग्रामीण जीवन की तस्वीर को व्यापक रूप से बदला है। अब तक 40 हजार किलोमीटर से अधिक सड़कों और 426 वृहद पुलों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में 12 हजार किलोमीटर से अधिक सड़कें बनाकर 3800 से अधिक बसाहटों को जोड़ा गया है। इससे रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा को नया आधार मिला है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार अब जनजातीय और विशेष पिछड़ी जनजाति बहुल गांवों में आठ हजार किलोमीटर से अधिक सड़कों के निर्माण की योजना पर कार्य कर रही है। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष योजना, प्रधानमंत्री जनमन योजना और आकांक्षी जिलों में बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री स्वयं बस्तर के सौ से अधिक स्थानों का दौरा कर चुके हैं। ये दौरे औपचारिक नहीं, बल्कि जमीनी हालात समझने, विकास कार्यों की समीक्षा करने और सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाने का माध्यम बने हैं।
बस्तर में बन रहे ये पुल आज केवल नदी या नाले पार करने का साधन नहीं हैं। वे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और भरोसे को जोड़ने वाले मजबूत सेतु बन चुके हैं। कभी दुर्गमता और भय का प्रतीक रहे रास्ते अब अवसर और उम्मीद की पहचान बन रहे हैं। यह बदलाव सरकार की स्पष्ट नीति, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्णायक नेतृत्व का परिणाम है। बस्तर के लिए यह विकास नक्सल उन्मूलन के साथ साथ स्थायी शांति और समृद्धि की सबसे मजबूत नींव बनता जा रहा है।
सीमावर्ती इलाकों तक पहुंच का विस्तार
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सेतु निर्माण किसी भी दृष्टि से आसान नहीं रहा है। सुरक्षा चुनौतियों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद सरकार ने दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ कार्य पूरे कराए। मिचगांव से कोड़ेकुर्से मार्ग पर कोटरी नदी पर नौ करोड़ 35 लाख रुपये और आतुरबेड़ा भैंसगांव निब्रा मार्ग पर मेंढ़की नदी पर नौ करोड़ 57 लाख रुपये की लागत से बने उच्च स्तरीय पुल इसका स्पष्ट उदाहरण हैं।
इन पुलों ने न केवल आम नागरिकों की आवाजाही आसान की है, बल्कि सुरक्षा बलों की त्वरित पहुंच को भी मजबूत किया है। वर्तमान में कांकेर जिले में 60 करोड़ रुपये की लागत से 12 वृहद पुल निर्माणाधीन हैं, जबकि 30 करोड़ रुपये के पांच पुल निविदा स्तर पर हैं। इनके पूरा होने के बाद 136 गांवों की 68 हजार से अधिक आबादी को सीधा लाभ मिलेगा।
छोटेबेठिया मरबेड़ा सितरम मार्ग और कोयलीबेड़ा दुता मार्ग पर बन रहे पुल माड़ क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएंगे। ये वही इलाके हैं, जो लंबे समय तक विकास से दूर रहे। नरहरपुर विकासखंड के अंतिम छोर को जोड़ने के लिए बांसपत्तर तिरियारपानी मार्ग पर स्वीकृत पांच वृहद पुलों में से एक पूरा हो चुका है, जबकि शेष मार्च 2026 तक पूरे होने की योजना है। लेंडारा ठेमा मार्ग पर बने पुलों से कोंडागांव जिले के विश्रामपुरी और बड़े राजपुर क्षेत्र से बारहमासी संपर्क स्थापित हो गया है। इससे सीमावर्ती और दूरस्थ गांवों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंच आसान हुई है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर अंचल में बन रहे पुल अब केवल आवागमन की सुविधा नहीं रह गए हैं। वे विकास, भरोसे और समृद्धि के मजबूत प्रतीक बनकर उभर रहे हैं। जिन इलाकों को लंबे समय तक नक्सल हिंसा, दुर्गम भौगोलिक हालात और प्रशासनिक दूरी के कारण मुख्यधारा से कटा हुआ माना जाता था, वहां अब सड़क और सेतु विकास की नई कहानी लिख रहे हैं। बस्तर, विशेषकर आकांक्षी जिला कांकेर में, सेतु निर्माण ने सामाजिक और आर्थिक बदलाव की रफ्तार को नई दिशा दी है। बस्तर वर्षों तक नक्सल हिंसा की छाया में रहा। ऐसे क्षेत्रों में सड़क और पुल का निर्माण केवल भौतिक संरचना नहीं होता, बल्कि यह राज्य की मजबूत उपस्थिति और भरोसे का संदेश देता है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार के कार्यकाल में यह स्पष्ट संकेत मिला है कि विकास अब अंतिम छोर तक पहुंचेगा। कांकेर जिले में पिछले तीन वर्षों के भीतर 101 करोड़ 16 लाख रुपये की लागत से 20 पुलों का निर्माण पूरा किया गया है। इन पुलों के माध्यम से लगभग 160 गांवों के 80 हजार से अधिक लोग पूरे वर्ष जिला, तहसील और विकासखंड मुख्यालयों से जुड़े रह पा रहे हैं। इन बुनियादी ढांचों का प्रभाव केवल यातायात तक सीमित नहीं है। जिन क्षेत्रों में लंबे समय तक डर और असुरक्षा का माहौल रहा, वहां सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन भी दोबारा सांस ले रहा है।
नक्सल हिंसा के कारण जिन पारंपरिक उत्सवों, लोक कलाओं और सांस्कृतिक गतिविधियों पर संकट आ गया था, वे अब फिर से जीवंत हो रही हैं। आधुनिक रिकॉर्डिंग स्टूडियो के माध्यम से पारंपरिक गीतों को संरक्षित किया जा रहा है। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी का अवसर मिलना इस बात का संकेत है कि बस्तर अब भय नहीं, बल्कि संभावनाओं और भविष्य का पर्याय बनता जा रहा है।
विष्णु देव साय ने अपने दो साल के संक्षिप्त कार्यकाल में छत्तीसगढ़ को सम्पूर्ण देश में एक नई ऊंचाई पर पहुंचाया है। बहुत कम समय में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश की जनता के बीच जाकर पूरे प्रदेश की जनता का विश्वास जीता है और न केवल विश्वास जीता है बल्कि उनके हित को ध्यान में रखकर उन्होंने ऐसी योजनाओं का क्रियान्वयन किया है जिससे छत्तीसगढ़ का समग्र विकास सम्भव हो पाया है। यह केवल और केवल विष्णुदेव साय जैसे एक संवेदनशील, कर्मठ तथा ऊर्जावान मुख्यमंत्री ही सम्भव कर सकते हैं। नक्सल हिंसा प्रभावित गांवों में नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार जैसी मूलभूत सुविधाएं दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच रही है। प्रदेश में अब तक कुल 69 सुरक्षा केंद्र स्थापित किए गए हैं।
अंदरूनी गांवों से मेडिकल कॉलेज तक का सफर
शासन की महत्वाकांक्षी “नियद नेल्लानार“ (आपका अच्छा गांव) योजना के तहत विशेष स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से कोंटा विकासखंड में स्थित दूरस्थ गांव मुकर्रम, पटेलपारा, सरपंचपारा और किस्टाराम जैसे पहुंचविहीन क्षेत्रों के मरीजों की पहचान की गई थी। इन चिन्हित 14 मरीजों को जिला प्रशासन द्वारा विशेष वाहन की व्यवस्था कर बेहतर उपचार हेतु जगदलपुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया, जहाँ उनका सफल ऑपरेशन संपन्न हुआ।
ऑपरेशन के पश्चात सभी मरीजों को आई असिस्टेंट की देखरेख में जगरगुंडा और किस्टाराम से सुरक्षित जिला अस्पताल सुकमा लाया गया है। डॉक्टरों के अनुसार, मरीजों की रिकवरी और बेहतर फॉलो-अप के लिए उन्हें अगले 4 दिनों तक जिला अस्पताल में विशेषज्ञों की निगरानी में रखा जाएगा। इस दौरान मरीजों के ठहरने और भोजन की निरूशुल्क व्यवस्था जिला प्रशासन के द्वारा की गई है।
स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन का यह प्रयास दर्शाता है कि नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से अब शासन की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सुदूर वनांचलों के अंतिम व्यक्ति तक सीधे पहुँच रही हैं। स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने वाले मरीजों ने इस संवेदनशील पहल के लिए मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया है।