दाह संस्कार और धर्मांतरण मामला छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा सुलगा, आधा छत्तीसगढ़ विवाद के साये में
CG News: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में प्रलोभन से धर्मांतरण को अपराध बनाने के लिए धर्म स्वातंत्र्य विधेयक पारित कर दिया गया है। उम्मीद की जा रही है कि इससे प्रदेश में जबरिया या प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने पर नियंत्रण पाया जा सकेगा। इस विधेयक के आने से पहले के विवादित मामलों या प्रकरणों के आंकड़ों की बात करें तो छत्तीसगढ़ गंभीर संकट में दिख रहा था। धर्मांतरण या दाह संस्कार पर विवाद के मामले आधे छत्तीसगढ़ को अपने चपेट में ले चुके थे।
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रायपुर 26 मार्च 2026, छत्तीसगढ़ में, विशेष कर आदिवासी इलाकों में जबरिया धर्मांतरण या प्रलोभन देने के आरोप लगते रहे हैं। इसके कारण कई बाद जातीय संघर्ष की स्थिति भी बनी है। बस्तर में आगजनी तक की वारदात इसी कारण हो चुकी है। इसके अलावा धर्मांतरित लोगों की मौत के बाद दाह संस्कार की परंपरा को लेकर भी बवाल होता रहा है। कुछ मामले हाईकोर्ट तक गए और कब्र से शव उखाड़ कर दोबारा क्रियाकर्म करने की नौबत आ चुकी है। गृह विभाग के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2022 से ही धर्मांतरण या दाह संस्कार पर विवाद का दौर शुरू हो चुका था। 2022 में पांच जिलों में प्रकरण सामने आए थे। कांकेर, बलरामपुर-रामानुजंगज, नारायणपुर, जशपुर, जगदलपुर में कुल सात शिकायतें मिलीं थीं। इनमें से एक में प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई, वहीं बाकी छह में अपराध दर्ज किया गया था।
दर्ज आंकड़ों के अनुसार इसके अगले साल 2023 में छह प्रकरण केवल तीन जिलों में सामने आए। दुर्ग, जांजगीर चांपा और जगदलपुर में दो- दो शिकायतें की गईं थीं। जांच में दुर्ग और जांजगीर चांपा की शिकायत प्रमाणित नहीं हो सकी, जबकि जगदलपुर के दोनों मामलों में अपराध दर्ज कर लिया गया है। वर्ष 2024 में धर्मांतरण और दाह संस्कार के विवादों ने अचानक बड़ा रूप लेना शुरू कर दिया। इस साल 11 जिलों में 55 शिकायतें सामने आ गईं। खास बात यह है कि अकेले धमतरी जिले में 29 शिकायतें की गईं, जिसमें से 21 प्रमाणित नहीं हो सकी। सात प्रकरणों में प्रतिबंधात्मक कार्रवाई कर एक प्रकरण में अपराध दर्ज किया गया। जबकि बलरामपुर- रामानुजगंज जिले में मिली सभी 9 शिकायतों पर जांच के बाद अपराध कायम कर लिया गया। इसके अलावा जांजगीर चांपा में पांच, कोरिया, बिलासपुर, सूरजपुर, बालोद और जगदलपुर में एक- एक शिकायतें आयीं। नारायणपुर में मिली तीनों शिकायत प्रमाणित नहीं हुई। दंतेवाड़ा में दो शिकायतों पर अपराध दर्ज हो गया, राजनांदगांव के दो मामलों को जांच के बाद खारिज कर दिया गया।
2025 में बिलासपुर आगे-
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2025 में शिकायतों और अपराध दर्ज करने के केस में जबरदस्त बढ़ोतरी हो गई। इस वर्ष 17 जिलों तक शिकायत का दायरा फैल गया, मतलब आधे छत्तीसगढ़ से शिकायतें आनी लगीं। खास बात यह है कि सर्वाधिक 30 शिकायतें बिलासपुर से मिलीं और इनमें से 28 में जांच के बाद अपराध दर्ज किया गया है, जबकि दो प्रकरणों में प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई है। इसके बाद रायपुर से 9 शिकायतें आयीं और सभी में जांच के बाद अपराध कायम किया गया। इसके अलावा कांकेर से पांच, दुर्ग में चार, बलरामपुर व सूरजपुर से तीन-तीन, जशपुर व सरगुजा से दो- दो शिकायतें आयीं और सभी में अपराध दर्ज होने की जानकारी दी गई है। नारायणपुर में चार शिकायतें मिलीं, जो जांच के बाद खारिज कर दी गई। इसी तरह जांजगीर चांपा में मिली आठ में से पांच शिकायत अप्रमाणित रही, जबकि तीन में अपराध दर्ज किया गया। शिकायत आने वाले अन्य जिलों में गौरेला पेंड्रा मरवाही, मुंगेली, बालोद, गरियाबंद, धमतरी और कबीरधाम जिले शामिल हैं।
2026 में भी खुला खाता-
वर्ष 2026 प्रारंभ होते ही धर्मांतरण और दाह संस्कार से संबंधित प्रकरण सामने आने लगे हैं। अब तक सात जिलों में 11 प्रकरण सामने आ चुके हैं। राजनांदगांव में सबसे अधिक चार शिकायतें आयी हैं, इनमें से एक की जांच जारी है। जबकि एक खारिज कर दी गई है और एक में अपराध दर्ज किया गया है। एक में प्रतिबंधात्मक कार्रवाई हुई है। रायपुर में एक और बिलासपुर में मिली दो शिकायतों पर जांच के बाद अपराध कायम किया गया है। नारायणपुर और बालोद में की गई एक- एक शिकायत अप्रमाणित निकली है। सरगुजा और जशपुर में एक- एक केस दर्ज कर लिए गए हैं।