CG School Education News: VIDEO: सीजी बोर्ड बनाम सीबीएसई, छत्तीसगढ़ में CBSE के नाम पर हो रहे गोरखधंधे का लोकसभा में CG के इस सांसद ने उठाया मुद्दा

CG School Education News: सीजी बोर्ड की मान्यता लेकर सीबीएसई पाठ्यक्रम चलाने का छत्तीसगढ़ में चल रहे गोरखधंधे का मामला लोकसभा में उठा। छत्तीसगढ़ कोरबा की सांसद ज्योत्सना महंत ने फर्जी मान्यता के जरिए पालकों के साथ प्राइवेट स्कूल प्रबंधन द्वारा की जा रही लूटखसाेट के अलावा शिक्षा के अधिकार कानून का प्राइवेट स्कूल प्रबंधन द्वारा उड़ाए जा रहे माखौल का मुद्दा उठाते हुए इस पर गंभीरता के साथ जांच की मांग की।

Update: 2026-04-02 06:25 GMT
इमेज- इंटरनेट 

CG School Education News: रायपुर। सीजी बोर्ड की मान्यता लेकर सीबीएसई पाठ्यक्रम चलाने का छत्तीसगढ़ में चल रहे गोरखधंधे का मामला लोकसभा में उठा। छत्तीसगढ़ कोरबा की सांसद ज्योत्सना महंत ने फर्जी मान्यता के जरिए पालकों के साथ प्राइवेट स्कूल प्रबंधन द्वारा की जा रही लूटखसाेट के अलावा शिक्षा के अधिकार कानून का प्राइवेट स्कूल प्रबंधन द्वारा उड़ाए जा रहे माखौल का मुद्दा उठाते हुए इस पर गंभीरता के साथ जांच की मांग की।

वीडियो

शिक्षा के अधिकार कानून के तहत छत्तीसगढ़ में तीन हजार सीटें कम कर दी गई है। इसे लेकर छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में जनहित याचिका में सुनवाई चल रही है। हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। बुधवार को कोरबा की सांसद ज्योत्सना महंत ने लोकसभा में आरटीई की सीटों को कम करने व सीजी बोर्ड का मान्यता लेकर फर्जी तरीके से सीबीएसई मान्यता के नाम पर छत्तीसगढ़ में प्राइवेट स्कूलों के गोरखधंधा का मुद्दा उठाया। सीबीएसई के नाम पर पालकों से मोटी फीस वसूलने के अलावा मनमाने ढंग से निजी प्रकाशकों की किताबें चलाने का आरोप लगाया। सांसद ने यह भी सवाल उठाया, जब सीजी बाेर्ड से मान्यता है तब प्राइवेट स्कूलें पालकों व बच्चों के साथ धोखेबाजी क्यों कर रहे हैं। इस तरह के फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात भी कही।

पढ़िए क्या है मामला

शिक्षा के अधिकार कानून का छत्तीसगढ़ के प्राइवेट स्कूलों में नियमानुसार पालन ना होने की शिकायत करते हुए भिलाई निवासी सीवी भगवंत राव ने अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर के माध्यम से छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिका की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जानकारी मांगी है। पीआईएल की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने सीजी बोर्ड की मान्यता लेकर सीबीएसई की पढ़ाई कराने वाले प्राइवेट स्कूलों का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद इसे स्वत: संज्ञान में लेकर स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव से जवाब मांगा है।

बता दें, जनहित याचिका में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने डिवीजन बेंच के समक्ष प्रमुख मुद्दा उठाते हुए बताया, छत्तीसगढ़ में ऐसे भी प्राइवेट स्कूल का संचालन किया जा रहा है, जिनके पास खुद का भवन नहीं है। लीज में लेकर स्कूल का संचालन किया जा रहा है। संबंद्धता में सरकारी एजेंसी से मिलकर घालमेल किया जा रहा है। याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने छत्तीसगढ़ में संचालित हो रहे सभी प्राइवेट स्कूलों के संबंध में पूरी जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को दिया है। सचिव को शपथ पत्र के साथ पूरी जानकारी देनी होगी।

मान्यता का ये है प्रमुख शर्तें

किसी स्कूल के लिए भवन का होना सबसे बड़ी अनिवार्य शर्त है। स्कूल में बच्चों की संख्या के आधार पर कमरों में बैठक व्यवस्था और बिजली, पानी, शौचालय की उपलब्धता आदि मूलभूत आवश्यकताओं का परीक्षण करने के बाद ही किसी विद्यालय को मान्यता दी जाती है। प्राइवेट स्कूलों में मान्यता निरीक्षण के दौरान भवन की सुविधा के अभाव में, किराया नामा लगवा कर मान्यता प्रदान करने से ही गली-गली में प्राइवेट स्कूल बिना मानदंडों के संचालित हो रहे है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा हाई कोर्ट में पेश की जाने वाली जानकारी के बाद स्कूल शिक्षा विभाग के अफसरों और प्राइवेट स्कूल प्रबंधन के बीच गुपचुप तरीके से चल रहे इस फर्जीवाड़े का खुलासा होगा।

हाई कोर्ट की नोटिस के बाद DPI ने डीईओ को लिखी चिट्टी

उच्च न्यायालय में दायर याचिका में 24 मार्च 2026 को पारित आदेश का हवाला देते हुए डीपीआई ने प्रदेशभर के जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी पत्र में लिखा है, हाई कोर्ट ने प्रदेशभर में संचालित प्राइवेट स्कूल

जिसमें राज्य के भवन विहीन अशासकीय विद्यालयों के कागजों में मान्यता दिये जाने की शिकायत का उल्लेख है। डीपीआई ने प्रदेशभर के डीईओ को लिखे पत्र में कहा है, आपको निर्देशित किया जाता है कि उच्च न्यायालय में दायर याचिका कमांक डब्ल्यू.पी.आई.एल. 22/2016 पर पारित आदेश 24 मार्च 026 के परिपालन में जानकारी, 2 अप्रैल 2026 के पूर्व अनिवार्य रूप से साफ्ट कॉपी एवं हार्ड कॉपी में उपलब्ध कराया जाना है।

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