हैंडपंप मैकेनिकों के 414 पद खाली, मंत्रियों के इलाके के भी सरकारी बोरवेल भगवान भरोसे
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग याने पीएचई के अधीन आने वाले सभी सरकारी बोरवेल भगवान भरोसे चल रहे हैं। यदि गर्मी के मौसम में बोरवेल खराब हो जाए तो उसके तत्काल सुधार की उम्मीद कम है, क्योंकि प्रदेशभर में स्वीकृत पदों में से करीब आधे 414 पद खाली हैं। मतलब जिस काम को प्रदेश में 876 हैंडपंप मैकेनिकों को संभालना चाहिए, उसे केवल 462 मैकेनिक ही संभाल रहे हैं।
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रायपुर। 2 अप्रैल 2026| गर्मी के मौसम में ग्रामीण इलाकों के तालाब और कुएं सूख जाने की वजह से बड़ी आबादी को हैंडपंप से काम चलाना पड़ता है। अब ग्राम पंचायतों में पानी टंकी बना कर बोरेवेल का भी निर्माण कर दिया गया है। इन सभी का संचालन और मरम्मत का काम पीएचई के सरकारी हैंडपंप मैकेनिकों के पास है। पेयजल को अत्यावश्यक सेवा की श्रेणी में रखा गया है, इसके बाद भी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अफसर हैंडपंप मैकेनिकों के रिक्त पदों को भरने में तत्परता नहीं दिखा रहे हैं। इसका दुष्परिणाम इस बार गर्मी के सीजन में देखने को मिल सकता है। गांवों में बिगड़े हैंडपंप या बोरवेल को बनाने के लिए ग्रामीणों को इंतजार करना पड़ सकता है, इससे भीषण जल संकट पैदा हो सकता है।
विभागीय आंकड़ों पर भरोसा करें तो पता चलता है कि प्रदेश के सभी 33 जिलों में जरुरत से आधे से कम हैंडपंप मैकेनिक काम कर रहे हैं। शुरुआत राजधानी से ही करें, यहां स्वीकृत पद तो 24 हैं, मगर अभी केवल 9 हैंडपंप मैकेनिक काम कर रहे हैं। इससे रायपुर जिले के सिस्टम की हालत समझी जा सकती है। जबकि महासमुंद में 30 पद के विरुद्ध 15 और धमतरी में 24 पद के विरुद्ध 14 ही हैंडपंप मैकेनिक पदस्थ हैं। गरियाबंद की हालत और खराब है, जहां 12 हैंडपंप मैकेनिक हैं, जबकि 18 पद इस वक्त खाली हैं। दुर्ग जैसे महत्वपूर्ण जिले में 10 हैंडपंप मैकेनिक काम कर रहे हैं और 8 पद रिक्त हैं। बालोद में 29 पद स्वीकृत हैं और जिले को मिले हैं केवल 12 हैंडपंप मैकेनिक। कोई ऐसा जिला नहीं दिख रहा है, जहां पर हैंड पंप मैकेनिक के 75 प्रतिशत पद भरे हों। ऐसे में बोरवेल की मरम्मत कैसे की जाती होगी, सहज ही समझा जा सकता है।
रायगढ़ की हालत चिंताजनक
राजनांदगांव, मोहला और खैरागढ़ में कहने को तो 18- 18 पद स्वीकृत हैं, मगर राजनांदगांव में 9 और बाकी दोनों जिलों में 11-11 मैकेनिक ही काम कर रहे हैं। बिलासपुर जिले में 26 पद दिए गए हैं, पर इसमें से 13 पद भरे हैं, मतलब 50 प्रतिशत खाली पद हैं। कोरबा जैसे बड़े जिले में 30 पद हैं, इसमें से 13 पदों पर हैंडपंप मैकेनिक नहीं हैं। इससे सटे जांजगीर चांपा में 29 पद के विरुद्ध केवल 16 हैंडपंप मैकेनिक काम कर रहे हैं। रायगढ़ की हालत अत्यधिक चिंतनीय है, यहां पर 42 में से 23 पद रिक्त पड़े हुए हैं। सूरजपुर और बलरामपुर में स्वीकृत पद 35-35 हैं, पर इसमें दोनों जिलों में क्रमश: 14 और 15 पद रिक्त हैं।
सीएम का जिला भी बदहाल
आदिवासी इलाका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के क्षेत्र जशपुर का ख्याल भी अधिकारी नहीं रख रहे हैं। वहां कहने को तो 48 पद हैं, मगर इसमें से हैंडपंप मैकेनिकों के 22 पद रिक्त हैं। दूसरे आदिवासी जिले बस्तर में भी 22 पद रिक्त हैं, यहां पर स्वीकृत पदों की संख्या 41 है। सरगुजा और बस्तर संभाग के बाकी जिलों की हालत भी ठीक नहीं है।