Bilaspur High Court News: 300 से अधिक शिक्षक एलबी की याचिका पर हाई कोर्ट का आया ऐसा फैसला: सेवा गणना और वरिष्ठता को लेकर जारी किया कुछ इस तरह का आदेश

Bilaspur High Court News: शिक्षाकर्मी से शिक्षक एलबी के रूप में संविलियन के बाद शिक्षाकर्मियों की सेवागणना को लेकर विवाद अब भी जारी है। 300 से अधिक शिक्षकों ने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सेवा गणना के निर्धारण की मांग की थी। हाई कोर्ट ने कुछ इस तरह का फैसला सुनाया है।

Update: 2026-01-24 04:29 GMT
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Shikshak LB Ki Yachika Par Faisla: बिलासपुर। शिक्षाकर्मी से शिक्षक एलबी के रूप में संविलियन के बाद शिक्षाकर्मियों की सेवागणना को लेकर विवाद अब भी जारी है। 300 से अधिक शिक्षकों ने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सेवा गणना के निर्धारण की मांग की थी।

छत्तीसगढ़ के शिक्षक एलबी संवर्ग के हजारों शिक्षकों की पेंशन और पुरानी सेवा गणना को लेकर शिक्षक एलबी और स्कूल शिक्षा विभाग के बीच अब भी गतिरोध जारी है। छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में कार्यरत शिक्षक एलबी ने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका दायर करने वालों में परमेश्वर प्रसाद जायसवाल, श्यामलाल पटेल, कन्हैया लाल राठिया, वेदलाल भगत सहित 300 से अधिक शिक्षकों की याचिका पर जस्टिस एके प्रसाद के सिंगल बेंच में एकसाथ सुनवाई हुई।

याचिकाकर्ता शिक्षकों का कहना है कि वे वर्ष 1998-99 से शिक्षाकर्मी के रूप में निरंतर सेवाएं दे रहे हैं। राज्य सरकार ने पुरानी पेंशन योजना बहाल कर दी है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पेंशन के लिए उनकी सेवा की गणना प्रारंभिक नियुक्ति, नियमितीकरण या वर्ष 2018 में हुए संविलियन में से किस तिथि से की जाएगी। याचिकाकर्ता शिक्षक एलबी ने हाई कोर्ट से मांग की थी इस संबंध में राज्य शासन को स्पष्ट दिशा निर्देश जारी करने सहित अन्य मांगाें पर निर्देश का निवेदन किया था।

नियुक्ति पंचायत विभाग से, पंचायत व शिक्षा विभाग की सेवाएं अलग-अलग

राज्य शासन की ओर से पैरवी कर रहे महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारी ने कोर्ट को बताया कि पूर्व में शिक्षाकर्मियों की नियुक्ति पंचायत विभाग के जरिए की गई थी। लिहाजा पंचायत संवर्ग और शिक्षा विभाग की सेवाएं अलग-अलग हैं, इसलिए पेंशन का लाभ नहीं दिया जा सकता।

हाई कोर्ट ने सरकार से कहा: तर्कसंगत और स्पष्ट नीति बनाएं

मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस एके प्रसाद ने अपने फैसले में लिखा है,जब किसी कर्मचारी की सेवा एक से अधिक चरणों (जैसे—अस्थायी/शिक्षाकर्मी → नियमित/समायोजित) में रही हो, तो उसकी पेंशन पात्रता तब तक तय नहीं की जा सकती, जब तक कि राज्य सरकार द्वारा: स्पष्ट,अंतिम (final) और सभी पर समान रूप से लागू (uniform) ऐसी नीति न बनाई जाए, जिसमें यह साफ-साफ बताया गया हो कि पेंशन लागू करने के लिए “नियुक्ति की निर्णायक तिथि (date of appointment)” कौन-सी मानी जाएगी।

इस प्रकार की नीति बनाना: कार्यपालिका (सरकार) का क्षेत्र है,न कि न्यायालय का। लेकिन सरकार द्वारा लिया गया कोई भी निर्णय:

तर्कसंगत (reasoned) होना चाहिए, स्पष्ट और निश्चित (categorical) होना चाहिए, और मनमानेपन से मुक्त (non-arbitrary) होना चाहिए, ताकि वह: संविधान के अनुच्छेद 14 और 16, समानता और न्याय के सिद्धांत की कसौटी पर खरा उतर सके।

छत्तीसगढ़ में डेढ़ लाख से अधिक शिक्षक एलबी

छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 1.60 लाख शिक्षक एलबी हैं। राज्य सरकार ने शिक्षाकर्मियों की संविलियन की प्रक्रिया 1 जुलाई 2018 से शुरू की थी। संविलियन के लिए राज्य सरकार ने जो मापदंड तय किया था उसमें आठ वर्ष की सेवा पूर्ण करने वाले शिक्षाकर्मियों का पहले संविलियन किया गया। इसके बाद सेवा शर्तों को आठ साल से घटाकर दो साल कर दिया। राज्य सरकार के इस निर्णय से बड़ी संख्या में शिक्षाकर्मियों का शिक्षक एलबी के पद पर स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन हो गया। स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन के बाद आजतलक वरिष्ठता और सेवा गणना को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है।




 


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