Bilaspur High Court News: हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: पावर ऑफ अटार्नी के जरिए दर्ज करा सकते हैं शिकायत...

Bilaspur High Court News: चेक बाउंस मामले में जस्टिस एनके व्यास के सिंगल बेंच ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सिंगल बेंच का यह फैसला न्याय दृष्टांत AFR बन गया है।

Update: 2026-02-02 09:39 GMT

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2 February 2026|बिलासपुर। चेक बाउंस मामले में बिलासपुर हाई कोर्ट जस्टिस एनके व्यास के सिंगल बेंच ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सिंगल बेंच का यह फैसला न्याय दृष्टांत AFR बन गया है। सिंगल बेंच ने कहा कि अगर लेनदेन और समझौते की पूरी जानकारी पावर ऑफ अटार्नी को है तो इस प्रकरण में वह शिकायर्त दर्ज करा सकता है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में आरोपी को आदेश की प्रति प्राप्त होने की तिथि से दो माह के भीतर 8,75,000 रुपये (चेक राशि सहित 7,75,000 रुपये) और निचली अदालत द्वारा निर्देशित मुआवजे का भुगतान याचिकाकर्ता को करना होगा। भुगतान ना करने की स्थिति में एक महीने की सजा भुगतनी होगी।

रायगढ़ के 5वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के फैसले के अनुसार, रायगढ़ के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी द्वारा आपराधिक अपील में पारित निर्णय को रद्द कर दिया गया है। प्रकरण के आरोपी देवानंद पटेल को अधिनियम की धारा 138 के तहत लगाए गए आरोप से बरी करते हुए शिकायतकर्ता द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट के फैसले को चुनौती देते हुए रायगढ़ महालक्ष्मी ट्रैक्टर्स की संचालिका मोनालिसा अग्रवाल ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

क्या है मामला

याचिकाकर्ता मोनालिसा अग्रवाल, बृजमोहन अग्रवाल के माध्यम से महालक्ष्मी ट्रैक्टर्स के नाम से अपना व्यवसाय चला रही है। मोनालिसा ने अपने पावर ऑफ अटॉर्नी धारकबृजमोहन अग्रवाल के माध्यम से देवानंद पटेल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में लिखा है, आरोपी देवानंद पटेल ने 22 मई 2008 को 5,95,000/- रुपये मूल्य का एक ट्रैक्टर और उसके सहायक उपकरण, अर्थात् हाइड्रोलिक ट्रैक्टर ट्रॉली, उधार पर खरीदा था। उनके बीच यह समझौता हुआ था कि वाहन को उधार पर बेचा जाएगा जिस पर आरोपी 3% मासिक ब्याज का भुगतान करेगा। मोनालिसा का यह भी कहना है कि ट्रैक्टर उपलब्ध कराने के बाद, उसने छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक शाखा, पुसौर से ऋण प्राप्त करने के लिए सभी आवश्यक प्रयास किए, लेकिन देवानंद को कोई ऋण उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके बाद, देवानंद ने 26.दिसंबर 2009 को कर्नाटक बैंक, रायगढ़ शाखा में देय 10,40,000/- रुपये का चेक संख्या 416253 इस बहाने से दिया कि आरोपी की संपत्ति का कुछ हिस्सा बेचा जाएगा और राशि उक्त खाते में जमा कर दी जाएगी, जिससे चेक के भुगतान में कोई कठिनाई नहीं होगी, लेकिन राशि जमा नहीं हुई, जिसके कारण चेक बाउंस हो गया।

इसके बाद, मोनालिसा और देवानंद के बीच 22. मई 2008 को यह सहमति बनी कि देवानंद 22. मई 2008 से 21 फरवरी 2010 तक ट्रैक्टर के उपयोग के लिए 15,000 रुपये प्रति माह किराया देगा। तदनुसार, 29. जनवरी.2010 को कर्नाटक बैंक रायगढ़ में देय 4,00,000 रुपये का चेक दिया गया, जो बाउंस हो गया। इसलिए, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, रायगढ़ के समक्ष एक शिकायत दर्ज की गई, जो अभी भी लंबित है। देवानंद ने 28.जून 2010 को ट्रैक्टर, सहायक उपकरण और हाइड्रोलिक ट्रैक्टर ट्रॉली लौटा दी और 18.जुलाई 2011 को एक पंजीकृत समझौता किया गया। समझौते की शर्तों के अनुसार, देवानंद ने मोनालिसा को 7,75,000/- रुपये का चेक (चेक संख्या 366921, 18 जुलाई.2011) दिया, जो कर्नाटक बैंक, रायगढ़ में देय था। यह इस समझौते के साथ दिया गया था कि चेक 18.अक्टूबर 2011 तक भुना लिया जाएगा, अन्यथा इसे कानूनी सहायता लेकर वसूल किया जा सकता है।

याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि आरोपी देवानंद पटेल ने उसके पावर ऑफ अटॉर्नी धारक से अनुरोध किया था कि उसकी जमीन बेची नहीं गई है, बल्कि वह 11 नवंबर .2011 तक 7,75,000 रुपये का भुगतान कर देगा और शेष राशि का भुगतान उसके द्वारा रायगढ़ में ही किया जाएगा। उसके द्वारा दी गई समय सीमा के भीतर राशि का भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद, याचिकाकर्ता की ओर से 08 दिसंबर 2011 को लीगल नोटिस भेजा गया, जिसमें उसे भुगतान की तारीख से 15 दिनों के भीतर राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया गया। इसके बाद भी राशि का भुगतान नहीं किया।

हाई कोर्ट का फैसला

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा है, रायगढ़ के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा पारित विवादित आदेश को रद्द किया जाता है और रायगढ़ के प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की पुष्टि की जाती है। याचिकाकर्ता द्वारा दायर बरी करने की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए, रायगढ़ के न्यायिक मजिस्ट्रेट (श्रेणी) द्वारा 27 मार्च .2018 को पारित आदेश में आरोपी को दी गई कारावास की सजा में संशोधन और मुआवजे में वृद्धि की जाती है। कोर्ट ने कहा है, आरोपी को आदेश की प्रति प्राप्त होने की तिथि से दो माह के भीतर 8,75,000 रुपये (चेक राशि सहित 7,75,000 रुपये) और निचली अदालत द्वारा निर्देशित मुआवजे का भुगतान करने का निर्देश दिया जाता है। राशि का भुगतान ना करने की स्थिति में एक महीने की सजा सुनाई है।

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