छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के द्वारा ‘‘छत्तीसगढ़ राज्य में स्थापित निजी विश्वविद्यालयों की विवेचना एवं अनुसंधान-अनुशीलन‘‘ विषय पर एक दिवसीय ऑनलाईन संगोष्ठी का आयोजन….

Update: 2020-12-17 08:39 GMT

रायपुर 17 दिसंबर 2020. छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के द्वारा सम्माननीय राज्यपाल एवं कुलाध्यक्ष अनसुईया उइके के मुख्य आतिथ्य में 17 दिसम्बर 2020 को ‘‘छत्तीसगढ़ राज्य में स्थापित निजी विश्वविद्यालयों की विवेचना एवं अनुसंधान-अनुशीलन‘‘ विषय पर एक दिवसीय आॅनलाईन संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें निजी विश्वविद्यालयों के द्वारा कोरोना काल में संपन्न कार्य और आगामी योजनाओं के संबंध में चर्चा की गयी। उक्त संगोष्ठी में छत्तीसगढ़ राज्य के समस्त निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव और देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविद उपस्थित थे।
नवां रायपुर में स्थित कलिंगा विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित वेबीनार का शुभारंभ मंगलाचरण से हुआ। उसके पश्चात छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग की प्रशासनिक सदस्य रेणु देशमुख ने इस आयोजन के उद्देश्य से परिचित कराते हुए बतलाया कि कोरोना काल में छत्तीसगढ़ के निजी विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों को अध्ययन-अध्यापन के लिए प्रदत्त सुविधा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं अनुसंधान कार्याे की जानकारी, नियमित नियुक्ति एवं आगामी योजनाओं के बारे में चर्चा करना है।
उक्त संगोष्ठी में कलिंगा विश्वविद्यालय, डाँ.सी.वी.रमन विश्वविद्यालय, मैट्स विश्वविद्यालय, आईसीएफएआई विश्वविद्यालय, आईटीएम विश्वविद्यालय, एमिटी विश्वविद्यालय, ओपी जिंदल विश्वविद्यालय, आईएसबीएम विश्वविद्यालय, एएएफटी यूनिवर्सिटी आॅफ मीडिया एण्ड आर्ट्स, रावतपुरा सरकार विश्वविद्यालय, महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट ऑफ टेक्नोलाॅजी, केके मोदी यूनिवर्सिटी, देव संस्कृति विश्वविद्यालय, शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के कुलपति एवं कुलसचिवों ने कोरोना काल में विद्यार्थियों के अध्ययन-अध्यापन की सुविधाओं की उपलब्धता, विद्यार्थियों की परीक्षा के साथ ही आगामी शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थियों के प्रवेश तथा अध्ययन-अध्यापन हेतु किए गए प्रयासों की जानकारी दी। इसके साथ ही निजी विश्वविद्यालयों में अध्यापन, शोध एवं उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने हेतु विश्वविद्यालयों द्वारा दिए गये प्रयासों की जानकारी को उपलब्ध कराया।
इसी क्रम में आयोग के अध्यक्ष डाँ. शिववरण शुक्ल ने राज्य सरकार के द्वारा जारी अकादमिक कैलेण्डर का परिपालन करने के साथ ही निजी विश्वविद्यालयों को उनके द्वारा पाठ्यक्रम संचालित करने के पूर्व अध्यादेश को राजपत्र में प्रकाशन को सुनिश्चित करने का एवं कुलपति, कुलसचिव एवं शिक्षण कार्य हेतु शिक्षकों को नियमित नियुक्ति की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में भी विद्यार्थियों को उच्च स्तर की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाए एवं उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़े।
कार्यक्रम के अगले चरण में म.प्र. निजी विश्वविद्यालय विनिमायक आयोग के अध्यक्ष डाँ. भरत शरण सिंह ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि- नयी शिक्षा नीति को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय में अध्ययनरत् विद्यार्थियों के लिए व्यक्तित्व विकास, चरित्र निर्माण, नैतिक शिक्षा आदि पाठ्येत्तर गतिविधियां आवश्यक हैं। जिसमें विद्यार्थियों का बहुमुखी विकास हो सके और वह स्वामी विवेकानंद और ए. पी. जे अब्दुल कलाम जैसे व्यक्तित्व और उनके विचारों से प्रेरित हो सके।
इसी क्रम में विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलपति और म.प्र. निजी विश्वविद्यालय विनिमायक आयोग के भूतपूर्व अध्यक्ष प्रो. अखिलेश कुमार पाण्डेय ने शिक्षा के साथ-साथ शोध की आवश्यकता पर बल प्रदान करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि हमें आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए विद्यार्थियों में संस्कार और दक्षता प्रदान करना है। छत्तीसगढ़ में धान से चावल के अतिरिक्त बची हुए सामग्री से तेल निर्माण और खनिज संपदा के क्षेत्र में रोजगार की असीम सम्भावनाएं है। आज शोध एवं अनुसंधानपरक शिक्षा के साथ-साथ रोजगारमूलक शिक्षा की आवश्यकता है।
भारतीय विश्वविद्यालय संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रो पीबी शर्मा ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि- आज के परिवेश में उच्च शिक्षा के साथ-साथ उत्तम शोध कार्य करना भी जरूरी है। हमें विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के साथ-साथ उनमें मानवीय मूल्य विकसित करना है। जिससे समाज, देश एवं विश्व में मानव कल्याण हो सके। हमें ऐसे संस्कारी युवाओं को तैयार करना है।
कार्यक्रम के अंत में छत्तीसगढ़ शासन की माननीय राज्यपाल अनसुईया उइके ने कहा कि- कोरोना काल में पहली बार निजी विश्वविद्यालयों के कार्यो की समीक्षा की जा रही है। इसके लिए आयोग बधाई का पात्र हैं। वर्तमान परिवेश में हम विद्यार्थियों को ऐसी शिक्षा दंे कि उनमें नैतिक मूल्य जागृत हो। समाज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकासित हो सके और वह राष्ट्र निर्माण में सक्रिय रहें। हमें ऐसा कार्य करना चाहिए की छत्तीसगढ़ सेे ही नहीं बल्कि विदेश के विद्यार्थी भी यहा अध्ययन करने आएँ।
सम्मानीय राज्यपाल एवं कुलाध्यक्ष की उपस्थिति में आयोजित उक्त संगोष्ठी को गोल्डन बुक आॅफ रिकार्ड में दर्ज किया गया एवं गोल्डन बुक आॅफ रिकार्ड प्रभारी अधिकारी (भारत) मनीष विश्नोई के द्वारा यह जानकारी दी गयी। छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग को दो दिनो मंे यह प्रमाण -पत्र प्रदान किया जायेगा।
उक्त संगोष्ठी का संचालन छ.ग. निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के प्रभारी सचिव डाँ. राम जी द्विवेदी ने किया। छ.ग. निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष डाँ. शिववरण शुक्ल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

 

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