शिक्षकों में गुस्सा…हॉस्टल में रेप और छेड़छाड़ की घटना में 2 साल से गायब छात्रावास अधीक्षिका बच गई और सहायक शिक्षक को बलि का बकरा बनाते हुए सस्पेंड कर दिया गया, मूक-बधिरों की भाषा न समझने वालों को जबरिया दे दी गई थी अतिरिक्त जिम्मेदारी
0 सहायक शिक्षक ने 2 साल में 6 बार लिखित में डीईओ, बीईओ से किया था अतिरिक्त कार्यभार से मुक्त करने का आग्रह
0 सवाल ये भी कि महिला अधीक्षिका गायब हो गई तो पुरूष क्षिक्षक को रात में हॉस्टल की जिम्मेदारी क्यों दी जा रही थी?
जशपुर, 26 सितंबर 2021। जशपुर के दिव्यांग गर्ल्स हॉस्टल में रेप और छेड़खानी की घटना के बाद बड़ा खुलासा हुआ है। एक तो जिस भारती सिंह को छात्रावास अधीक्षिक बनाया गया था, वे ज्वाईन करने के बाद दो साल से गायब हैं। शिक्षा विभाग ने भारती सिंह की उपस्थिति सुनिश्चित करने की बजाए हॉस्टल में खाना-पीना की जिस सहायक शिक्षक को जिम्मा दिया गया था, उसे ही हॉस्टल की अतिरिक्त जिम्मेदारी दे दी।
इस पूरे मामले में स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बहुत बड़ी चूक सामने आ रही है। क्योंकि जिस शिक्षक को छात्रावास अधीक्षक की जिम्मेदारी दी गई है वह न तो मूक बधिर बच्चों की भाषा जानता है और न ही बच्चे उसकी भाषा समझते थे। यही वजह है कि पिछले 2 साल में उसने 6 बार लिखित में और दर्जनों बार मौखिक में अधिकारियों से यह आग्रह किया था कि समर्थ आवासीय दिव्यांग प्रशिक्षण केंद्र में किसी ऐसे शिक्षक की नियुक्ति की जाए जो इन बच्चों की पीड़ा और भाषा समझ सके। इसके लिए उसने जिला मिशन समन्वयक विकास खंड शिक्षा अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी को निरंतर पत्र लिखा था। लेकिन अधिकारियों ने कभी मामले को संज्ञान में ही नहीं लिया। सबसे ताज्जुब की बात है कि इस शिक्षक के पास विगत 2 सालों में एक साथ तीन-तीन प्रभार थे और वर्तमान में भी वह स्कूल तथा छात्रावास अधीक्षक की दोहरी जिम्मेदारी निभा रहा था। जिसमें स्कूल और छात्रावास के बीच की दूरी 20 किलोमीटर है ।
दरअसल प्रभारी छात्रावास अधीक्षक संजय राम की मूल पोस्टिंग शासकीय प्राथमिक शाला देवरी विकासखंड कांसाबेल में है जिसे स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल में अटैच कर दिया गया था इसके अतिरिक्त उसके पास छात्रावास अधीक्षक का भी प्रभार था। ऐसे में जब शिक्षक स्कूल में होता था तब छात्रावास वैसे भी खाली होता था इसीलिए शिक्षक के द्वारा बार-बार यह निवेदन किया जा रहा था कि वहां पर पूर्णकालिक ऐसे अधीक्षक की नियुक्ति कर दी जाए जो मूकबधिर बच्चों की इशारे वाली भाषा समझता हो ।
खुद के भी बच्चे को खो दिया सहायक अधीक्षक ने !
शिक्षक नेता विवेक दुबे ने कहा है कि प्रभारी छात्रावास अधीक्षक एक तरफ जहां निलंबन की गाज गिरा दी गई है वहीं दूसरी तरफ इस पूरे घटना का प्रभाव उसके निजी जीवन पर भी भरपूर पड़ा है। छात्रावास अधीक्षक की पत्नी गर्भवती थी और ऐसे समय में भी छात्रावास अधीक्षक को दोहरी जिम्मेदारी निभानी पड़ रही थी। घटना 22 सितंबर को देर रात घटित हुई। पत्नी को ऐसी हालत में छोड़ छात्रावास अधीक्षक दौड़े-दौड़े प्रशिक्षण केंद्र पहुंचे मामले की पूरी जानकारी ली उच्च अधिकारियों को अवगत कराया मामले को कहीं पर भी दबाने या छिपाने की कोशिश नहीं की और मामले की एफआईआर तक लिखवाई। इधर 23 तारीख यानी ठीक अगले दिन सुबह पत्नी को प्रसव पीड़ा स्टार्ट हो गया और उसे भी उसने हॉस्पिटल में एडमिट किया लेकिन दुर्भाग्य कहिए की दोपहर 2ः30 बजे उन्हें मृत नवजात शिशु होने की जानकारी मिली जिसका अंतिम संस्कार भी उन्होंने खुद अपने हाथों से शाम 4ः30 बजे किया। अगले दिन इस मामले में उन्हें भी दोषी मानते हुए निलंबन की कार्यवाही कर दी गई ।
महिला अधीक्षिका गायब
यह स्पष्ट प्रावधान है कि बालिकाओं के छात्रावास में महिला अधीक्षिका ही निवासरत हो सकती है और इसी के आधार पर कलेक्टर जशपुर ने 2019 में भारती सिंह छात्रावास अधीक्षिका के नाम आदेश जारी करते हुए उन्हें वहां पदस्थ किया था और संजय राम को केवल भोजन व्यवस्था करने का प्रभार दिया गया था किंतु कार्यभार ग्रहण के बाद से ही छात्रावास अधीक्षिका वहां निवासरत नहीं थी, 2 साल में अधिकारियों को इस बात का भान तक नहीं हुआ की जिसे जिम्मेदारी दी गई है वह नदारद है और जब घटना घट गई तो ऐसे शिक्षक पर गाज गिरा दी गई जिसे रात में छात्रावास में रहने का अधिकार ही नहीं था
शिक्षक नहीं अधिकारी दोषी-विवेक दुबे, नेता शिक्षक संघ
इस पूरे मामले में प्रभारी छात्रावास संजय राम को दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया गया है। जबकि उनके द्वारा विगत 2 सालों से लगातार उच्च अधिकारियों को इस पूरे मामले की सूचना दी जा रही थी और यह भी कहा जा रहा था कि उनसे यह अतिरिक्त प्रभार ले लिया जाए, एक ऐसा शिक्षक जिसे मूक बधिर दिव्यांग छात्रों की भाषा ही समझ में नहीं आती थी उसे जानबूझकर इस केंद्र में रखा गया था ऐसे में यह उस केंद्र के बच्चों के साथ कितनी बड़ी नाइंसाफी थी इसे आसानी से समझा जा सकता है क्योंकि जिस अधीक्षक को उनकी जिम्मेदारी दी गई थी वह तो उनकी बात समझ ही नहीं पाते थे और न ही बच्चे उनकी… राजीव गांधी शिक्षा मिशन के जिला मिशन समन्वयक, विकास खंड शिक्षा अधिकारी से लेकर जिला शिक्षा अधिकारी को तक उन्होंने बार-बार अवगत कराया था लेकिन किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंगी और यह पूरी घटना घटित हो गई। वास्तव में यह घटना अधिकारियों की लापरवाही के चलते हुई है जिसका दोषी सहायक शिक्षक को बनाया गया है।