अक्सर लोग मेहनत की कमी को पैसों की तंगी की वजह मानते हैं, लेकिन कई बार समस्या मेहनत में नहीं, बल्कि वास्तु के अनुसार कुछ छोटी-छोटी गलतियाँ है जो धन की रुकावट, खर्चों की बढ़ोतरी का कारण बन जाती हैं। अगर आप समय रहते इन्हें न सुधारा तो कंगाल होना निश्चित है।
अगर घर साफ न रहे, सामान इधर-उधर बिखरा हो और बेवजह चीज़ें जमा होती रहें, तो वास्तु के अनुसार धन की ऊर्जा रुक जाती है। ऐसा माहौल खर्च बढ़ाता है और कमाई के रास्तों में अड़चन पैदा करता है।
मुख्य द्वार को वास्तु में लक्ष्मी का प्रवेश द्वार माना जाता है। अगर वहां टूट-फूट, अंधेरा, जूते-चप्पलों का ढेर या गंदगी रहती है, तो धन का प्रवेश कमजोर माना जाता है।
रसोई घर को अन्न और समृद्धि का स्थान माना जाता है। अगर सिंक में रातभर जूठे बर्तन पड़े रहें या किचन गंदा रहे, तो वास्तु के अनुसार यह धन की कमी का संकेत है।
घर में खराब घड़ी, टूटे फर्नीचर, जले बल्ब या बेकार इलेक्ट्रॉनिक सामान रखना बहुत बड़ी वास्तु गलती मानी जाती है। ऐसी चीज़ें धन की रुकावट और ठहराव की ऊर्जा लाती हैं।
कई लोग स्टोरेज के चक्कर में बेड और अलमारी के नीचे पुराना सामान भर देते हैं। वास्तु के अनुसार इससे ऊर्जा का प्रवाह रुकता है। बल्कि धन से जुड़े फैसलों में भी रुकावट पैदा करती है, जिससे पैसा टिक नहीं पाता।
अगर घर में पर्याप्त रोशनी और हवा नहीं आती, तो वास्तु इसे नकारात्मक संकेत मानता है। अंधेरा घर में सुस्ती, निराशा और खर्च बढ़ाता है।
बार-बार कहना कि पैसा नहीं है, कमी चल रही है या खर्च बहुत है, यह भी एक बड़ी गलती मानी जाती है। वास्तु के अनुसार शब्दों की ऊर्जा होती है। ऐसे होने से नकारात्मक बातें मजबूत होते चले जाते हैं और धन की कमी बनी रहती है।
चाहे आप रोज़ पूजा करें या न करें, लेकिन पूजा का स्थान गंदा, टूटा या अस्त-व्यस्त नहीं होना चाहिए। वास्तु के अनुसार यह स्थान घर की सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र होता है। इसकी अनदेखी से मानसिक अशांति और आर्थिक असंतुलन बढ़ सकता है।
जहां रोज़ लड़ाई-झगड़ा, चिल्लाहट और तनाव रहता है, वहां धन टिकना मुश्किल माना जाता है। वास्तु कहता है कि शांति के बिना समृद्धि संभव नहीं। लगातार नकारात्मक माहौल मेहनत के फल को भी कमजोर कर देता है।