पीरियड्स के दौरान और कई बार मीनोपाॅज से पहले महिलाओं को इतनी ज्यादा ब्लीडिंग होती है कि उनका बिस्तर से उठना असंभव हो जाता है। गद्दे तक ब्लड से भर जाते हैं। ऐसे में शीशम के पत्तों का मिश्री के साथ सेवन करें। तुरंत फायदा होगा।
स्वामी रामदेव के अनुसार प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग शुरू हो जाए तो तुरंत शीशम के पत्तों को घोंटकर पिएं। ब्लीडिंग रुक जाएगी।
आचार्य बालकृष्ण के अनुसार स्तन में अगर कोई गांठ बन रही है तो शीशम के पत्तों को पीसकर उसका लेप स्तन पर करें इससे गांठ घुलना शुरू हो जाएगी।
यूटीआई यानि मूत्र मार्ग संक्रमण में असहनीय जलन, बुखार, कंपकंपी आदि समस्याएं होती हैं। ऐसे में दिन में दो से तीन बार शीशम के पत्तों का 50 ग्राम काढ़ा पीने से राहत मिलेगी।
अगर आपको पीसीओडी की समस्या हो तो भी शीशम के पत्तों के मिश्री के साथ सेवन और काढ़े से लाभ होगा।
योनि से श्वेत स्राव अगर ज्यादा और बदबूदार हो, रंगत पीली या मटमैली सी हो और उसके कारण पीठ में या पेट के निचले हिस्से में दर्द हो और पैड तक यूज़ करना पड़ रहा हो तो शीशम के पत्तों का मिश्री के साथ सेवन आराम देता है।
स्किन की केयर के लिए भी आप शीशम के पत्तों से बने लेप का प्रयोग कर सकती हैं। यह जलन होने पर ठंडक देती हैं और खुजली और रूखी त्वचा से भी राहत देती हैं।
शीशम के पत्ते नेचुरली दर्द को कम करते हैं। इसके काढ़े के सेवन से महिलाओं को पीरियड्स समेत शरीर के अन्य दर्दों से भी राहत मिलती है।