सीता माता प्रभु श्री राम की पत्नी थीं, ये तो सभी जानते हैं। पर उनका अपहरण क्यों हुआ? आइए जानते हैं आचार्य चाणक्य इस बारे में क्या कहते हैं।
सीता माता प्रभु श्री राम के साथ चौदह वर्ष के वनवास पर गई थीं। यह कैकेयी का दशरथ से मांगा वरदान था। ताकि कैकेयी के बेटे भरत को अयोध्या का राजपाठ मिल सके।
प्रभु श्री राम, माता सीता और भाई लक्ष्मण वनों, गुफाओं में भटकते फिर रहे थे। इसी दौरान रावण ने माता सीता का हरण कर लिया।
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि माता सीता का अपहरण इसलिये हुआ क्योंकि वे अत्यंत रूपवती थीं। उनके रूप की ख्याति दूर-दूर तक थी।
वहीं रावण को अत्यधिक गर्व था। उसे अपनी शक्ति, समृद्धि और ईश्वर से प्राप्त वरदान पर बड़ा घमंड था। वह खुद को अपराजेय मानता था।
रावण के घमंड ने जहां उसे सीता माता का अपहरण करने के लिए प्रेरित किया वहीं उसका घमंड अंततः उसके पूरे परिवार को भी ले डूबा।
इसलिये आचार्य चाणक्य कहते हैं कि "अति सर्वत्र वर्जयेत् " यानि हर चीज़ की अति नुकसान का कारण बनती है।