हम आपको एक ऐसी बॉलीवुड एक्ट्रेस के बारे में बता रहें हैं, जिन्होंने 700 हिट फिल्मों में काम करने का रिकॉर्ड्स बनाया था. लेकिन इनकी मौत की दर्दनाक कहानी जानकर आपकी रूह कांप जाएगी. इस एक्ट्रेस की लाश 3 दिन तक घर में सड़ती रही.
भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक ऐसा नाम दर्ज है जिसने पर्दे पर 'क्रूर सास' और 'शातिर खलनायिका' के लिए एक्ट्रेस ललिता पवार जानी जाती हैं. लेकिन जिस महिला ने पर्दे पर दूसरों के घर उजाड़ने के रोल किए, असल जिंदगी में उसके अपने ही घर में ऐसी आग लगी जिसने उसे जीते जी राख कर दिया.
ललिता पवार की कहानी शुरू होती है 1916 में महाराष्ट्र के नासिक से. कुदरत का करिश्मा देखिए कि जब उनकी मां अंबा देवी के मंदिर पहुंचीं, तभी उन्हें प्रसव पीड़ा हुई और मंदिर के द्वार पर ही ललिता का जन्म हुआ. मंदिर के नाम पर उनका नाम अंबिका रखा गया.
9 साल की उम्र में, एक फिल्म की शूटिंग देखते वक्त उनकी मासूमियत ने डायरेक्टर नाना साहेब का ध्यान खींचा. यही से उन्होंने एक बाल कलाकार के तौर पर अपना सफर शुरू किया.
साल 1928 में 'राजा हरिश्चंद्र' से शुरू हुआ यह सफर साइलेंट फिल्मों से होता हुआ, ललिता पवार की जिंदगी में साल 1942 एक काल बनकर आया.
फिल्म 'जंग-ए-आजादी' के एक सीन में भगवान दादा ने इतनी जोर का तमाचा जड़ा कि ललिता वहीं गिर गईं. सेट पर मौजूद लोगों को लगा कि यह बेहतरीन एक्टिंग है, लेकिन जब ललिता के कान से खून बहने लगा, तब हड़कंप मच गया था.
इलाज के दौरान डॉक्टर ने गलत दवा दे दी, जिसका रिएक्शन ऐसा हुआ कि ललिता के शरीर के दाहिने हिस्से को लकवा मार गया. उनकी दाहिनी आंख पूरी तरह सिकुड़ गई और चेहरा टेढ़ा हो गया. वही फिल्में हाथ से चली गईं.
1948 में फिल्म 'गृहस्थी' से उन्होंने धमाकेदार वापसी की. इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में उनकी एक्टिंग ने तहलका मचा दिया. ललिता के नाम 700 फिल्मों और 7 दशकों तक काम करने का 'गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड' दर्ज हुआ.
ललिता की पहली शादी प्रोड्यूसर गणपतराव पवार से हुई थी. वही उसी की छोटी बहन ने उनके पति के साथ अफेयर कर लिया. इसके बाद उन्होंने गणपतराव को छोड़ दिया और बाद में फिल्म प्रोड्यूसर राजप्रकाश गुप्ता से शादी की.
बुढ़ापे में वे पुणे के अपने बंगले 'आरोही' में अकेली रहा करती थीं. 1998 की एक मनहूस शाम, ललिता ने अकेलेपन में दम तोड़ दिया.
3 दिन बीते गए लेकिन किसी को खबर नहीं थी कि ललिता अब इस दुनिया में नहीं रही. जब बंगले से शरीर के सड़न की तेज बदबू आने लगी तब पुलिस ने दरवाजा तोड़ा. ललिता की लाश तीन दिन पुरानी हो चुकी थी और बुरी तरह सड़ चुकी थी.