Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने कहा: जमानत याचिका पर सुनवाई टालना उचित नहीं, पढ़िए किन कारणों से सुप्रीम कोर्ट ने दिया ये फैसला
Supreme Court News: एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राशि जमा ना करने की वजह से जमानत याचिका पर सुनवाई टालना उचित नहीं है। केवल इस आधार पर याचिका की सुनवाई नहीं टाला जा सकता, याचिकाकर्ता ने पूर्व में अदालत को दी गई अंडरटेकिंग का पालन नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा, जमानत याचिका का फैसला उसके गुण-दोष के आधार पर किया जाना चाहिए।

Supreme Court News: दिल्ली। एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राशि जमा ना करने की वजह से जमानत याचिका पर सुनवाई टालना उचित नहीं है। केवल इस आधार पर याचिका की सुनवाई नहीं टाला जा सकता, याचिकाकर्ता ने पूर्व में अदालत को दी गई अंडरटेकिंग का पालन नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा, जमानत याचिका का फैसला उसके गुण-दोष के आधार पर किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले के साथ ही हाई कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है।
हाई कोर्ट ने जमानत याचिका पर सुनवाई इसलिए टाल दी थी कि एक कंपनी के निदेशक ने अदालत के पूर्व के आदेश के मद्देनजर शेष राशि जमा नहीं कर पाया था। पूर्व की सुनवाई के दौरान उसने अदालत को वचन दिया था कि राशि वह जमा करा देंगे। कंपनी के निदेशक ने कथित रूप से गबन की राशि का बड़ा हिस्सा पहले ही जमा करा दिया था। सुप्रीम कोर्ट के डिवीजन बेंच ने कहा ककि अदालत को जमानत याचिका को गुण-दोष के आधार पर तय करना चाहिए,अग्रिम जमा राशि पर जोर देकर जमानत याचिका को लंबित नहीं रखा जाना चाहिए।
यह है मामला
पूरा मामला एमएस प्रगत अक्षय ऊर्जा लिमिटेड को दी गई तकरीबबन 4.10 करोड़ रुपये की सरकारी सब्सिडी के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। याचिकाकर्ता कंपनी का एक निदेशक है, जिसे 12 दिसंबर 2019 को गिरफ्तार किया गया। कंपनी ने 26 दिसंबर 2019 को 2 करोड़ 17 लाख 92 हजार 500 रुपये अदालत में जमा कर दिए। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को जानकारी दी थी, शेष राशि भी जमा कर दी जाएगी, जिसके आधार पर दिल्ली हाई कोर्ट ने 22 अप्रैल, 2020 को उसे अंतरिम जमानत दी थी। हालांकि नियमित जमानत याचिका लंबित रही और अंतरिम जमानत समय-समय पर बढ़ाई जाती रही। बाद में, शेष राशि जमा न होने के आधार पर हाई कोर्ट ने अंतरिम जमानत रद्द कर दी थी।
हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए कंपनी के निदेशक ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट के समक्ष दलील दी कि भले ही अंडरटेकिंग का पालन नहीं हुआ हो, लेकिन हाई कोर्ट को जमानत याचिका का फैसला गुण-दोष के आधार पर करना चाहिए, न कि केवल उसी आधार पर अंतरिम जमानत रद्द करनी चाहिए। दोनों पक्ष के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा, जमानत सुनवाई को राशि जमा करने की पूर्व शर्त से जोड़ने को हतोत्साहित किया जाना चाहिए। इससे आपराधिक न्याय प्रणाली के दुरुपयोग की आशंका पैदा होती है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, कंपनी के निदेशक के खिलाफ IPC की धारा 409 के तहत कोई स्वतः दोषसिद्धि की धारणा नहीं होती। निदेशक की आपराधिक जिम्मेदारी ट्रायल में सिद्ध की जानी होती है। ऐसे में, जब कथित रूप से गबन की गई सब्सिडी की 50 प्रतिशत से अधिक राशि पहले ही जमा हो चुकी है तो केवल शेष राशि जमा न होने के आधार पर जमानत पर विचार न करना उचित नहीं है। सुप्रीम कोर्टने दिल्ली हाइकोर्ट को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता की नियमित जमानत याचिका का यथाशीघ्र सुनवाई करे। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने तीन सप्ताह की अवधि तय कर दी है।
