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Supreme Court News : सुप्रीम कोर्ट ने कहा: एसीड अटैक के दोषियों को मिले कड़ी सजा, दोषी की संपत्ति क्यों नहीं की जा सकती जब्त...

Supreme Court News : एसिड अटैक से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार ने से कहा, दोषियों को कड़ी सजा मिले इस दिशा में कानून में दखल देना जरुरी है।

Supreme Court News : सुप्रीम कोर्ट ने कहा: एसीड अटैक के दोषियों को मिले कड़ी सजा, दोषी की संपत्ति क्यों नहीं की जा सकती जब्त...
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supreme court of india (NPG file photo)

By Radhakishan Sharma

Supreme Court News: दिल्ली। एसिड अटैक से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार ने से कहा, दोषियों को कड़ी सजा मिले इस दिशा में कानून में दखल देना जरुरी है। दहेज हत्या के मामले में जो प्रावधान लागू होता है,उसी अंदाज में एसिड अटैक के दोषियों को भी सजा मिले।

सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच ने एसिड अटैक सर्वाइवर शाहीन मलिक जनहित द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को इस मामले में सख्त काननू बनाने की सलाह दी। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में उन पीड़ितों के लिए पहचान और कानूनी सुरक्षा की मांग की है, जिन्हें एसिड पीने के लिए मजबूर किया गया।

याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि मलिक के मामले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया है। आराेपियों को बरी किए जाने को चुनौती देते हुए मलिक ने एक आपराधिक अपील दायर की है। उनकी परिस्थितियों को देखते हुए बेंच ने कानूनी सहायता देने की पेशकश की। याचिकाकर्ता मलिक ने डिवीजन बेंच से कहा, उन्होंने अपनी ज़िंदगी के 16 कीमती साल कानूनी लड़ाई लड़ने में बिताए, लेकिन आखिर में हमलावरों को बरी होते देखा। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि हाई कोर्ट से उनकी दायर अपील पर तेज़ी से फैसला करने के लिए दिशा निर्देश जारी की जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के हाई कोर्ट से एसिड अटैक मामलों के लंबित होने के संबंध में रिपोर्ट मांगी थी। कलकत्ता, इलाहाबाद, गुजरात आदि ने रिपोर्ट पेश कर दी है, कई अन्य हाई कोर्ट ने अब तक रिपोर्ट पेश नहीं किया है। कोर्ट के सामने पेश किए गए स्टेटस के अनुसार, 15 हाई कोर्ट ने लंबित एसिड अटैक मामलों का विवरण दिया है। उत्तर प्रदेश में 198 लंबित मामले हैं, पश्चिम बंगाल में 60, गुजरात में 114, बिहार में 68 और महाराष्ट्र में 58। अन्य हाई कोर्ट से स्टेटस रिपोर्ट का अभी भी इंतज़ार है।

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में देशभर हाई कोर्ट से एसिड अटैक मामलों को प्राथमिकता और समयबद्ध तरीके से तेज़ी से निपटाने पर विचार करने कहा है। सभी राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों को एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास, मुआवज़े और चिकित्सा सहायता के लिए लागू योजनाओं का विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। डिवीजन बेंच ने आदेश में कहा, हम हाई कोर्ट से अनुरोध करते हैं कि वे एसिड अटैक से संबंधित मामलों को समयबद्ध तरीके से और प्राथमिकता के आधार पर तेज़ी से निपटाने के लिए निर्णय लेने की वांछनीयता पर विचार करें।

चार सप्ताह में पेश करें रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चार हफ़्तों के अंदर पूरी जानकारी देने का निर्देश दिया, जिसमें एसिड अटैक की घटनाओं का साल-दर-साल डेटा, चार्जशीट दाखिल करना, ट्रायल और अपील का पेंडिंग होना और हर पीड़ित की पूरी जानकारी शामिल है, जैसे शिक्षा, रोज़गार, वैवाहिक स्थिति, मेडिकल इलाज और राज्य द्वारा किया गया या प्रस्तावित खर्च।

मामले की सुनवाई के दौरान CJI ने कहा, आरोपी की संपत्ति ज़ब्त क्यों नहीं की जानी चाहिए? अगर कोई व्यक्ति एसिड अटैक का दोषी पाया जाता है तो उसकी सभी अचल संपत्ति क्यों न ज़ब्त करके पीड़ित को मुआवज़ा देने के लिए इस्तेमाल की जाए? केंद्र सरकार से कहा, कुछ असाधारण सज़ा के कदम उठाने होंगे।

एडिशनल सॉलिसिटर जनरल से CJI ने कहा कि सज़ा को सख्त बनाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से कुछ कानूनी दखल ज़रूरी हो सकता है। दहेज हत्या के मामलों की तरह सबूत का बोझ पलटने का भी सुझाव दिया। एसिड अटैक दहेज हत्या से कम गंभीर नहीं है।

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

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