Supreme Court News: रजिस्टर्ड सेल डीड को असली और वैध माना जाता है, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- इसे फर्जी घोषित नहीं किया जा सकता
Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, यह कानून की एक तय स्थिति है कि एक रजिस्टर्ड सेल डीड अपने साथ वैधता और प्रामाणिकता की एक मज़बूत धारणा रखती है। न्यायालय को किसी रजिस्टर्ड दस्तावेज़ को हल्के में या लापरवाही से 'फर्जी' घोषित नहीं करना चाहिए।

supreme court of india (NPG file photo)
Supreme Court News: दिल्ली। एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, यह कानून की एक तय स्थिति है कि एक रजिस्टर्ड सेल डीड अपने साथ वैधता और प्रामाणिकता की एक मज़बूत धारणा रखती है। न्यायालय को किसी रजिस्टर्ड दस्तावेज़ को हल्के में या लापरवाही से 'फर्जी' घोषित नहीं करना चाहिए।
डिवीजन बेंच ने कहा, एक पंजीकृत सेल डीड को ज़्यादा वैध और असली माना जाता है, लिहाजा बिक्री के लेन-देन का विरोध करने के लिए इसे 'फर्जी' घोषित नहीं किया जा सकता। जस्टिस राजेश बिंदल और मनमोहन की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा, यह कानून की एक तय स्थिति है कि एक रजिस्टर्ड सेल डीड अपने साथ वैधता और प्रामाणिकता की मज़बूत धारणा रखती है। बेंच ने कहा, रजिस्ट्रेशन सिर्फ़ एक प्रक्रियात्मक औपचारिकता नहीं है, बल्कि एक गंभीर कार्य है जो दस्तावेज़ को उच्च स्तर की पवित्रता प्रदान करता है। लिहाजा एक न्यायालय को किसी रजिस्टर्ड दस्तावेज़ को हल्के में या लापरवाही से 'फर्जी' घोषित नहीं करना चाहिए।
डिवीजन बेंच ने खरीदार की याचिका स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया है। खरीदार के पक्ष में निष्पादित रजिस्टर्ड सेल डीड को बाद में विक्रेता ने बिना किसी विश्वसनीय सबूत के 'फर्जी' बताकर विवादित कर दिया था। प्रतिवादी ने अपना कर्ज चुकाने के लिए याचिकाकर्ता के पास अपना घर गिरवी रखा था। जब प्रतिवादी याचिकाकर्ता की मांग पर गिरवी छुड़ाने में विफल रहा तो एक रजिस्टर्ड बिक्री समझौता किया गया, जिससे याचिकाकर्ता घर का एकमात्र मालिक बन गया। हालांकि, संपत्ति पर पहले से ही कब्ज़ा होने के कारण, प्रतिवादी याचिकाकर्ता का किरायेदार बन गया और एक किराया समझौता भी दोनों के बीच किया गया।
14 महीनों तक प्रतिवादी ने किराया दिया और 1974 में इस देनदारी को स्वीकार किया। हालांकि, जब 1975 में बेदखली की कार्यवाही शुरू हुई तो उसने 1977 में एक मुकदमा दायर कर दिया, जिसमें यह तर्क दिया कि बिक्री फर्जी थी, क्योंकि यह वास्तव में कर्ज सुरक्षित करने के लिए एक गिरवी थी। ट्रायल कोर्ट और अपीलीय अदालतों ने बिक्री को असली माना, लेकिन हाई कोर्ट ने अपीलीय अदालत के फैसले को पलटते हुए इसे गिरवी माना। हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए हेमलता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
याचिका की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए कहा, अपीलीय अदालत ने फैसलाा बहाल कर दिया और सेल डीड को असली लेनदेन माना। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, रजिस्टर्ड दस्तावेज़ों में वैधता की एक मज़बूत धारणा होती है। उन्हें ठोस दलीलों और ठोस सबूतों के बिना हल्के में फर्जी घोषित नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, चूंकि विचाराधीन सेल डीड और किराया समझौता दोनों रजिस्टर्ड हैं, इसलिए दस्तावेज़ों की वैधता और प्रामाणिकता के बारे में एक बहुत मज़बूत धारणा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सेल डीड में सभी बातें और शर्तें स्पष्ट, निश्चित और बिना किसी अस्पष्टता के है।
