Begin typing your search above and press return to search.

Supreme Court News: कर्मचारियों की खबर: नामिनी को मृत सरकारी कर्मचारी के GPF राशि पाने का है अधिकार,इसके लिए उत्तराधिकार प्रमाण पत्र की नहीं है जरुरत

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट के डिवीजन बेंच ने कहा कि मृत सरकारी कर्मचारी के जीपीएफ राशि पाने का अधिकार नामिनी को है। इसके लिए नामिनी को उत्तराधिकार प्रमाण पत्र पेश करने की जरुरत नहीं है। केंद्र सरकार को नसीहत देते हुए डिवीजन बेंच ने कहा, सरकार को मृत कर्मचारी की संपत्ति को लेकर चलने वाले पारिवारिक विवादों में नहीं उलझना चाहिए। नामांकन होने पर नामिनी को राशि का भुगतान करना चाहिए।

Supreme Court
X

Supreme Court News

By Radhakishan Sharma

Supreme Court News: दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के डिवीजन बेंच ने कहा कि मृत सरकारी कर्मचारी के जीपीएफ राशि पाने का अधिकार नामिनी को है। इसके लिए नामिनी को उत्तराधिकार प्रमाण पत्र पेश करने की जरुरत नहीं है। केंद्र सरकार को नसीहत देते हुए डिवीजन बेंच ने कहा, सरकार को मृत कर्मचारी की संपत्ति को लेकर चलने वाले पारिवारिक विवादों में नहीं उलझना चाहिए। नामांकन होने पर नामिनी को राशि का भुगतान करना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के डिवीजन बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी ने अपने GPF खाते में किसी व्यक्ति को वैध रूप से नामांकित किया है, या नामिनी बनाया है, तो उस नामांकित व्यक्ति को पूरी राशि पाने के लिए उत्तराधिकार प्रमाणपत की आवश्यकता नहीं होगी। वह राशि 5 हजा रुपये से अधिक क्यों न हो।

मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के डिवीजन बेंच ने कहा, जहां वैध नामांकन मौजूद है, वहां मृत कर्मचारी के भविष्य निधि खाते की राशि सीधे नामिनी को दी जानी चाहिए। डिवीजन बेंच ने कहा, यदि हर मामले में नामांकित व्यक्ति से उत्तराधिकार प्रमाणपत्र मांगा जाएगा, तो नामांकन की पूरी व्यवस्था ही अर्थहीन हो जाएगी। 5 हजार रुपये की सीमा अब अप्रासंगिक हो गई है।

महंगाई के मौजूदा दौर में पांच हजार का कोई महत्व नहीं रह गया है

सुप्रीम कोर्ट के डिवीजन बेंच ने कहा, वर्ष 1925 में 5 हजार रुपये एक बड़ी धनराशि हुआ करती थी, महंगाई के मौजूदा दौर में इसका कोई महत्व नहीं रह गया है। सरकार ने खुद ही GPF (Central Services) Rules, 1960 के Rule 33(ii) में जरुरी प्रावधान किया है। प्रावधान में साफ किया है, नामांकित व्यक्ति को राशि किसी भी रकम तक बिना किसी प्रमाणपत्र दी जाएगी। डिवीजन बेंच ने कहा, नामांकित व्यक्ति मालिक नहीं, ट्रस्टी होता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया, नामांकित व्यक्ति राशि का अंतिम मालिक नहीं, बल्कि केवल ट्रस्टी होता है। कोई अन्य वैध वारिस अदालत में अपने हिस्से के लिए मुकदमा कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दी नसीहत

एक सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके GPF खाते की राशि उसके भाई परेश चंद्र मंडल को देनी थी, क्योंकि वह नामांकित व्यक्ति था। केंद्रीय न्यायिक अधिकरण में मामला दायर कर भतीजों ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई। बाद में मामला हाई कोर्ट पहुंचा। मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने मृत कर्मचारी के भाई वैध वारिस मानते हुए राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया था।

हाई कोर्ट के फैसले को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। दायर याचिका में बताया कि राशि पांच हजार रुपये से अधिक है,लिहाजा उत्तराधिकार प्रमाण पत्र पेश करना जरुरी है। मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट के डिवीजन बेंच ने केंद्र सरकार की दलीलों को खारिज कर दिया। डिवीजन बेंच ने कहा कि सरकार को मृत कर्मचारी की संपत्ति को लेकर चलने वाले पारिवारिक विवादों में नहीं उलझना चाहिए। नामांकन होने पर नामिनी को राशि का भुगतान करना चाहिए।

Radhakishan Sharma

राधाकिशन शर्मा: शिक्षा: बीएससी, एमए राजनीति शास्त्र व हिन्दी साहित्य में मास्टर डिग्री, वर्ष 1998 से देशबंधु से पत्रकारिता की शुरुआत। हरिभूमि व दैनिक भास्कर में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया। 2007 से जुलाई 2024 तक नईदुनिया में डिप्टी न्यूज एडिटर व सिटी चीफ के पद पर कार्य का लंबा अनुभव। 1 अगस्त 2024 से एनपीजी न्यूज में कार्यरत।

Read MoreRead Less

Next Story