Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने UGC से पूछा, गैर अनुदान प्राप्त यूनिवर्सिटी पर UGC गाइड लाइन बाध्यकारी है या नहीं? ऐसे विश्वविद्यालयों पर नियंत्रण कैसे करते हैं
Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग UGC से पूछा है कि सरकारी अनुदान का लाभ ना लेने वाले देशभर में संचालित यूनिवर्सिटी पर उनके नियम व दिशा निर्देश बाध्यकारी है या नहीं। किन नियमों के तहत विश्वविद्यालयों का संचालन करते हैं। मानिटरिंग की क्या व्यवस्था है।

Supreme Court News: दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग UGC से पूछा है कि सरकारी अनुदान का लाभ ना लेने वाले देशभर में संचालित यूनिवर्सिटी पर उनके नियम व दिशा निर्देश बाध्यकारी है या नहीं। किन नियमों के तहत विश्वविद्यालयों का संचालन करते हैं। मानिटरिंग की क्या व्यवस्था है।
मदुरई कुमाराज यूनिवर्सिटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने UGC से पूछा है कि क्या याचिकाकर्ता विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध कॉलेजों को केंद्र या राज्य सरकार की ओर से कोई वित्तीय सहायता मिलता है। सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी को शपथ पत्र के साथ इन बातों के अलावा यह भी जवाब पेश करने कहा है कि क्या गैर अनुदान प्राप्त यूनिवर्सिटी को यूजीसी गाइडलाइन का पालन करना अनिवार्य है या फिर केवल निर्देशात्मक प्रकृति का है। शीर्ष अदालत ने यह भी पूछा है कि क्या ये नियम याचिकाकर्ता विश्वविद्यालय पर बाध्यकारी रूप से लागू होती है।
दरअसल याचिकाकर्ता यूनिवर्सिटी ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि याचिकाकर्ता यूनिवर्सिटी यूजीसी गाइड लाइन से बंधा हुआ है। फिजिक्स के एक गेस्ट लेक्चरर ने हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर कर मदुरई यूनिवर्सिटी को यूजीसी गाइड लाइन का पालन कराने की मांग की थी। याचिकाकर्ता गेस्ट लेक्चरर ने अपनी याचिका में मांग की थी कि यूनिवर्सिटी फरवरी 2010 की UGC Guidelines को गेस्ट लेक्चरर, टाइम टीचर के संदर्भ में लागू करे और उनका मानदेय 1000 रुपये प्रति घंटा (अधिकतम 25,000 रुपये प्रति माह) तय किया जाए।
वर्तमान में विश्वविद्यालय उन्हें 125 रुपये प्रति घंटा और अधिकतम 10,000 रुपये प्रति माह का भुगतान कर रहा था।
मामले की सुनवाई करते हुए मद्रास हाई कोर्ट के सिंगल बेंच ने विश्वविद्यालय को UGC गाइड लाइन के अनुसार मानदेय देने का निर्देश दिया था। हाई कोर्ट के सिंगल बेंच फैसले को चुनौती देते हुए यूनिवर्सिटी ने डिवीजन बेंच में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता विश्वविद्यालय ने अपनी याचिका में कहा था कि न तो राज्य कानून के तहत और न ही विश्वविद्यालय द्वारा औपचारिक रूप से UGC रेगुलेशन को अपनाया गया है, इसलिए वे यूजीसी गाइड लाइन का पालन करने के लिए बाध्यकारी नहीं हो सकते। याचिका की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता विश्वविद्यालय UGC गाइड लाइन का पालन करने के लिए बाध्यकारी बताते हुए याचिका को खारिज कर दिया था।
हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच के फैसले को विश्वविद्यालय ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के डिवीजन बेंच में हुई। डिवीजन बेंच ने यूजीसी से पूछा है कि यदि याचिकाकर्ता विश्वविद्यालय को UGC या राज्य, केंद्र सरकार से कोई फंड नहीं मिलता है या नहीं। मामले को आगे की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 28 जनवरी की तिथि तय कर दी है।
