खुशखबरी: शादी के बाद भी नहीं छीनेगा हक! राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा ऐलान- 'दूसरे राज्य की बहुओं' को भी मिलेगा EWS आरक्षण

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फोटो सोर्स- इंटरनेट, एडिट, npg.news

Rajasthan HC: राजस्थान हाईकोर्ट ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि दूसरे राज्य की बहुओं को भी EWS आरक्षण का लाभ मिलेगा।

जोधपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) आरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्व फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने साफ कहा कि अन्य राज्य में जन्मी लेकिन विवाह के बाद राजस्थान में रह रही महिलाएं भी सरकारी योजनाओं में EWS आरक्षण की हकदार है। उन्हें इस लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।

क्या है मामला ?

महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता और नर्सिंग ऑफिसर (नियमित भर्ती 2023) से संबंधित याचिकाओं पर वरिष्ठ न्यायाधीश डॉ पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायाधिपति संदीप शाह की खंडपीठ ने फैसला सुनाया है। खंडपीठ ने एकलपीठ निर्णय के खिलाफ राज्य सरकार की विशेष अपीलों को खारिज कर दिया है। इस दौरान कहा गया कि अन्य राज्य में जन्मी और विवाह के बाद राजस्थान में रह रही महिलाएं भी सरकारी योजनाओं में EWS आरक्षण की हकदार है। उन्हें इस लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।

अंतिम चयन सूची से हटा दिया गया नाम

डीडवाना की रहने वाली पुनिता रानी और झालावाड़ की रहने वाली रीना कुंवर राजपूत ने याचिका दायर की थी। इस मामले में अधिवक्ता यशपाल खिलेरी ने कहा कि चिकित्सा विभाग ने 2023 में महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता और नर्सिंग ऑफिसर के पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी की थी। महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता के 3384 और नर्सिंग ऑफिसर के 6981 पदों पर भर्ती के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण EWS वर्ग के लिए तय किया था। पुनिता रानी और अन्य महिला अभ्यर्थियों ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) श्रेणी में आवेदन किया था, जिसके बाद उन्होंने मेरिट सूची में अपनी जगह भी बनाई थी इसके बावजूद अंतिम चयन सूची से उनका नाम हटा दिया गया।

चिकित्सा विभाग ने क्या कहा ?

इस मामले में चिकित्सा विभाग का कहना था कि महिलाएं मूल रूप से दूसरे राज्य में रहने वाली थी और शादी के बाद यहां आकर रह रही थी। इसलिए उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) का लाभ नहीं दिया जा सकता।

याचिका में क्या कहा गया ?

वहीं याचिका में कहा गया कि महिलाएं शादी करके राजस्थान आई है। अधिकारी की ओर से निवासी प्रमाण पत्र और EWS प्रमाण पत्र भी जारी किया गया। इतना ही नहीं कार्मिक विभाग और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से परिपत्र भी जारी किया गया, जिसमें कहा गया कि विवाह के बाद राजस्थान आई महिलाओं को EWS प्रमाण पत्र देकर आरक्षण का लाभ दिया जाए।

हाईकोर्ट ने क्या निर्देश दिए ?

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपीलें खारिज करते हुए याचिकाकर्ता महिला अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी EWS श्रेणी में पुन: विचारित करने के आदेश दिए हैं। वहीं हाई कोर्ट ने आगे कहा कि यदि याचिकाकर्ता निर्धारित कट ऑफ के अंदर आती है, तो उन्हें नियुक्ति प्रदान की जाए। इतना ही नहीं उन्हें वरिष्ठा सहित परिणामी लाभ और वास्तविक नियुक्ति की तिथि से सभी मौद्रिक लाभ देने के आदेश दिए हैं।

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