OBC आरक्षण को चुनौती: 27% OBC आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट से कहा...
Supreme Court: मध्य प्रदेश सरकार के अन्य पिछड़ा वर्ग OBC के लिए 27% आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं का बैच सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को वापस भेज दिया है।

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दिल्ली।21 फरवरी 2026| मध्य प्रदेश सरकार के अन्य पिछड़ा वर्ग OBC के लिए 27% आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं का बैच सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को वापस भेज दिया है। इन याचिकाओं में 2019 के एक्ट को चुनौती दी गई, मध्य प्रदेश सरकार ने शासकीय सेवाओं में OBC के लिए आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को तीन महीने में फैसला सुनाने का आदेश दिया है।
बता दें, मध्य प्रदेश में अनुसूचित जातियों को 16% और अनुसूचित जनजातियों को 20% आरक्षण की सुविधा दी जा रही है। OBC अन्य पिछड़ा वर्ग को 27% करने से आरक्षण 50% की सीमा से ज़्यादा हो जाएगा। 10% EWS कोटे के आरक्षण के साथ कुल आरक्षण 73% हो जाएगा।आरक्षण का यह मुद्दा लंबे समय से कोर्ट में लंबित है। लिहाजा कोर्ट ने हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से इन मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल बेंच का गठन करने का अनुरोध किया था। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने अनुरोध किया कि इस तरह बनाई गई स्पेशल बेंच तीन महीने के अंदर मामलों का निपटारा करे। कोर्ट ने कहा, हमारी राय है कि मध्य प्रदेश का हाई कोर्ट राज्य के लिए जरुरतों के साथ ही कानूनी मान्यता पर पूरी तरह से विचार करने के लिए सबसे अच्छी स्थिति में होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, आर्टिकल 32 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए हाई कोर्ट के फैसले के बिना, इन मुद्दों की स्वतंत्र रूप से जांच करना गलत होगा।
क्या है मामला?
मध्य प्रदेश सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग OBC को आरक्षण देने के लिए मध्य प्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जातियां, अनुसूचित जनजातियां और अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1994 लागू किया था। इंद्रा साहनी बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया (1992) के बाद आया, जिसमें आरक्षण पर 50% की ऊपरी सीमा तय की गई। मध्य प्रदेश एक्ट के अनुसार, सभी पदों के लिए सरकारी नौकरी में OBC को 14% आरक्षण दिया गया, अनुसूचित जातियों को 16% और अनुसूचित जनजातियों को 20% आरक्षण दिया गया।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में OBC आरक्षण की स्थिति
मध्य प्रदेश स्टेट रीऑर्गेनाइज़ेशन एक्ट, 2000 (जिसके तहत छत्तीसगढ़ राज्य बना था) के बाद आरक्षण की मात्रा 1994 के तहत मूल रूप से जारी रही। जहां तक छत्तीसगढ़ राज्य की बात है, छत्तीसगढ़ लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, जन जातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) (संशोधन) अधिनियम, 2011 के ज़रिए अनुसूचित जनजातियों और OBC के लिए आरक्षण को बढ़ाकर 58% कर दिया गया। इस बदलाव को छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में एक याचिका के ज़रिए चुनौती दी गई और 2022 में इसे रद्द कर दिया गया। हालांकि, इस आदेश पर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है।
हाई कोर्ट ने लगा दी है अंतरिम रोक
मध्य प्रदेश में OBC के लिए आरक्षण को बढ़ाकर 27% करने की लगातार मांग हो रही थी। राज्य सरकार ने इन मांगों को मान लिया और मध्य प्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जातियां, अनुसूचित जनजातियां और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) संशोधन अध्यादेश, 2019 नाम का ऑर्डिनेंस जारी किया, जिसके अनुसार OBC के लिए आरक्षण बढ़ाकर 27% कर दिया गया। राज्य सरकार के इस निर्णय को चुनौती देते हुए योगेश कुमार ठाकुर ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी कर याचिका के लंबित रहने तक इस पर रोक लगा दी है। एक अन्य याचिका पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने 4 मई, 2022 के एक आदेश के ज़रिए मध्य प्रदेश सरकार को 14% से ज़्यादा ओबीसी आरक्षण देने से रोक दिया है।
हाई कोर्ट के फैसले को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी है चुनौती
हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने रिट याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मौजूदा ट्रांसफर याचिका दायर की।
सुप्रीम कोर्ट ये कहा
मध्य प्रदेश सरकार ने कहा कि राज्य भर्ती के लिए दो अलग-अलग लिस्ट तैयार कर रहा है ताकि अगर बढ़ा हुआ रिजर्वेशन रद्द हो जाए तो कोई दिक्कत न हो। राज्य सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, राज्य का हाई कोर्ट इस मामले पर विचार करने के लिए ज़्यादा सही है। हाई कोर्ट में छत्तीसगढ़ सरकार की स्थिति पॉजिटिव एक्शन पर विचार करने के लिए "अकेला गाइडिंग प्रिंसिपल" नहीं हो सकती। आगे कहा गया, "रिज़र्वेशन की मांग और साथ ही राज्य अफरमेटिव एक्शन के लिए जो तरीके अपना सकते हैं, वे उस राज्य के सामाजिक ताने-बाने के आधार पर हर राज्य में अलग-अलग होंगे।
