Gehu ke Jaware ke juice pine ke fayde: कैंसर, लिवर और किडनी के लिए वरदान है गेहूं का ज्वारा। जानिए इसके सेवन का सही तरीका!
Gehu ke Jaware ke juice pine ke fayde: आज के समय में मानव का जीवन गलत खानपान और तनावों से भरा हुआ है। हर इंसान को कुछ ना कुछ बीमारियां और कमजोरी जरूर है। इन्हीं में ही कैंसर, लीवर और किडनी की बीमारी भी काफी आम होती जा रही है। ऐसे में आपको कई लोग दवाइयो की लिस्ट और अलग–अलग औषधी भी बताएंगे, लेकिन इनसे कोई खास प्रभाव नजर नहीं आता। लेकिन इसी समय यह खास औषधि आपके लिए एक वरदान साबित होगी। हम बात कर रहे है गेहूं के ज्वारे की...

Gehu ke Jaware ke juice pine ke fayde: आज के समय में मानव का जीवन गलत खानपान और तनावों से भरा हुआ है। हर इंसान को कुछ ना कुछ बीमारियां और कमजोरी जरूर है। इन्हीं में ही कैंसर, लीवर और किडनी की बीमारी भी काफी आम होती जा रही है। ऐसे में आपको कई लोग दवाइयो की लिस्ट और अलग–अलग औषधी भी बताएंगे, लेकिन इनसे कोई खास प्रभाव नजर नहीं आता। लेकिन इसी समय यह खास औषधि आपके लिए एक वरदान साबित होगी। हम बात कर रहे है गेहूं के ज्वारे की, जिसे अंग्रेजी में व्हीटग्रास भी कहा जाता है। जब भी गेहूं के दाने को बोया जाता है तो जो पत्ता ऊपर निकलता है उसे ही ज्वारा कहते हैं। नवरात्रि जैसे शुभ अवसरों पर सभी हिन्दू घरों में यह उगाया जाता है। कई वैज्ञानिको ने इसे हरा खून (green blood) भी कहा है। आईए जानते हैं गेहूं के ज्वारों के रस पीने के फायदे।
गेहूं के ज्वारों का रस है पोषक तत्वों का खजाना
गेहूं के ज्वारे को दूध और अंडों की तरह सुपर फूड की श्रेणी में रखा गया है। ऐसा माना जाता है कि 1 किलोग्राम ज्वारे के रस में 23 किलोग्राम सब्जियों के गुण पाए जाते हैं। इसे मानव शरीर के लिए एक शक्तिशाली टॉनिक बताया गया है साथ ही इसमें पाए जाने वाला क्लोरोफिल ऊर्जा का सबसे शुद्ध उत्पाद है। इसके 100 ग्राम ताजे रस में 90 मिलीग्राम तक क्लोरोफिल प्राप्त हो जाता है जो शरीर की आंतरिक प्रक्रियाओं को चलाने में सहायक है।
इसके साथ ही इसमें विटामिन A, B–कॉम्प्लेक्स, C, और E भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसका सबसे विशेष गुण है विटामिन B17 जिसे लेट्रियल भी कहा जाता है, जो कैंसर के अणुओं को खत्म करने के लिए कारगर है। इसके साथ ही इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन और तांबा जैसे खनिज तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। इसमें 17 प्रकार के अमीनो एसिड पाए जाते हैं कुछ तो ऐसे हैं जो हमारे शरीर द्वारा भी नहीं बनाए जाते। इसके सेवन से कई गंभीर बीमारियों जैसे– कैंसर, लकवा, पीलिया, दांत के रोग, त्वचा संबंधी रोग, गैस, अपच, लिवर, पायरिया, डायबिटीज, पथरी, मुंह में छाले, मल त्याग में समस्या, आंतों में सूजन और दस्त आदि से राहत जरूर मिलता है।
गेहूं के ज्वारे को कैसे उगाएं
इसे उगना काफी सरल प्रक्रिया है। इसके लिए आपको अच्छी क्वालिटी के गेहूं के दाने लेने हैं। इन दोनों को 10 से 12 घंटे तक पानी में भिगो के रखना है। जब दाने फुल जाएं तो समझ लीजिए कि इसे अब मिट्टी में लगाने का समय आ चुका है। फिर किसी छोटे गमले या किसी ट्रे में दोमट मिट्टी और गोबर खाद लेकर भीगे हुए गेहूं के दोनों को मिट्टी के ऊपर फैला दें। फिर इसके ऊपर मिट्टी की एक और हल्की सी परत इन बीजों के ऊपर चढ़ाए और हल्के हाथों से बीजों को अंदर दबा दें। फिर इस गमले को किसी गीले कपड़े से एक से दो दिन तक ढंक कर रखें, जिससे पर्याप्त नमी बनी रहे। साथ ही ये भी ध्यान रखें कि गमले में हवा और धूप आती रहे।
यदि आप बिना मिट्टी के इसे उगाना चाहते है तो यह भी संभव है। इसके लिए आपको एक ट्रे लेना है और इस ट्रे के ऊपर गिला सूती कपड़ा बिछा दे। जैसा कि हमने पहले बताया है कि बीज को 10–12 घंटे पानी में रखकर निकालने के बाद आपको इस ट्रे में फैला देना है, ध्यान रहे कि कोई भी बीज एक दूसरे के ऊपर ना हो। फिर इसके ऊपर एक और कपड़ा बिछा दें और इसे किसी ठंडी जगह पर रख दे। इसमें नमी बनाए रखने के लिए पानी से स्प्रे करते रहे और जिस दिन दिखे की बीजों से अंकुर निकल आए है उस दिन ऊपर के कपड़े के हटाकर खुले हवा में रहने दें। जब इस पौधे की ऊंचाई 7 से 8 इंच हो जाए तभी इसे काटना चाहिए।
कैसे करें गेहूं के ज्वारे का सेवन
गेहूं के ज्वारे का सेवन रस/जूस बनाकर किया जा सकता है। जूस बनाने के लिए आपको ज्वारे के ताजे पत्ते लेने होंगे फिर से अच्छी तरह से धो लें। फिर साफ पत्तों को पीसने के बाद एक साफ सूती कपड़े या छलनी से छान लें और गूदे को निचोड़ कर पूरा रस निकाल लें। ज्वारे का रस हमेशा ताजा ही पीना चाहिए। इसका रस पीने के साथ साथ चबा कर भी खा सकते है, जो दांत और मसूड़ों के लिए फायदेमंद है। इसका रस पीने के बाद आधे घंटे तक किसी भी चीज का सेवन ना करें। एक बात और ध्यान रखें की इसके सेवन के बाद आपको उल्टियां भी हो सकती है पर यह घबराने वाली बात नहीं है यह सिर्फ शरीर में जमे हुए विष के प्रति एक सामान्य शारीरिक प्रतिक्रिया है। कई लोगों का यह अनुभव रहा है कि इसके सेवन से उन्हें फुर्ती और ताकत दोनों मिली है।
अस्वीकरण/Disclaimer: पाठकों के लिए यह केवल सामान्य जानकारी देने के लिए लिखी गई है। स्वास्थ्य संबंधी कोई भी समस्या हो तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इस लेख के लिए NPG.NEWS किसी प्रकार के जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
